- महाराष्ट्र में अशोक खरात ने भगवान शिव का अवतार बनकर धार्मिक आस्था का गलत फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की ठगी की
- अशोक खरात और उसके सहयोगियों के खिलाफ ईडी ने मुंबई की विशेष पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है
- आरोपी ने दो सहकारी क्रेडिट सोसाइटियों के जरिए कई बैंक खाते संचालित कर बेनामी खातों में नकदी जमा कराई थी
महाराष्ट्र में खुद को भगवान शिव का अवतार बताकर लोगों की आस्था के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले कथित बाबा अशोक कुमार एकनाथ खरात उर्फ कैप्टन उर्फ बंधु बाबा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने 17 जुलाई को मुंबई की विशेष पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी. इस चार्जशीट में अशोक खरात, उसकी पत्नी कल्पना खरात और चार अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है.
ईडी ने बताया कि जांच के दौरान ये सामने आया कि अशोक खरात लोगों की धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाता था. वह खुद को भगवान शिव का अवतार बताकर लोगों को विश्वास दिलाता था कि उसके पास दिव्य शक्तियां हैं. वह दावा करता था कि उसकी "अवतार पूजा" कराने से गंभीर बीमारियां ठीक हो जाएंगी, जीवन की परेशानियां दूर हो जाएंगी और कारोबार में तरक्की होगी. इन दावों पर भरोसा कर कई लोगों ने उसे बड़ी रकम, जमीन और दूसरी संपत्तियां सौंप दीं.

जांच में पता चला कि इस तरह ठगी और डराकर वसूले गए पैसों को छिपाने के लिए उसने एक सुनियोजित नेटवर्क बनाया था. ईडी के मुताबिक आरोपी ने दो सहकारी क्रेडिट सोसाइटियों का इस्तेमाल करते हुए कई बैंक खातों का संचालन किया. एक कर्मचारी की मिलीभगत से कई बेनामी खातों में भारी मात्रा में नकदी जमा कराई गई और बाद में उसे अलग-अलग माध्यमों से निकाला गया. इसके बाद इस पैसे को रिश्तेदारों और करीबी लोगों के पास रखा गया या फिर परिवार के सदस्यों के नाम पर नासिक, अहमदनगर, सोलापुर, पुणे और मुंबई में महंगी अचल संपत्तियां खरीदने में लगाया गया.

ईडी की जांच की शुरुआत महाराष्ट्र के सरकारवाड़ा, शिर्डी, सिन्नर और राहाता पुलिस थानों में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर हुई थी. इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि अशोक कुमार खरात लोगों को झूठे चमत्कार और धार्मिक दावों के जरिए अपने जाल में फंसाता था और उनसे पैसे व संपत्ति ऐंठ लेता था.
इससे पहले ईडी ने 19 मई 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में अशोक कुमार खरात को गिरफ्तार भी किया था. फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है. ईडी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी.
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