- मोगा में गुरतरन गोयल की दुकान कुछ लोगों ने विधायिका से जुड़े विवाद के बाद बड़ी संख्या में ढहा दी गई है
- गोयल ने पुलिस को दी शिकायत में पांच लोगों को नामजद किया लेकिन विधायक अमनदीप अरोड़ा का नाम नहीं है
- विधायक अमनदीप अरोड़ा ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि जमीन विवाद कांग्रेस शासन के दौरान हुआ
मोगा की विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा से जुड़े ठिकानों पर ईडी की तलाशी और पूछताछ पूरी होने के एक दिन बाद, मोगा में गुरतरन गोयल की एक दुकान को कुछ लोगों ने बड़े पैमाने पर ढहा दिया. गोयल विधायक के खिलाफ मामले उठाते रहे हैं. गोयल ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की साजिश का आरोप लगाते हुए सिटी मोगा पुलिस को दी शिकायत में पांच लोगों को नामजद किया है. इस शिकायत में विधायक का नाम नहीं है.
अपनी शिकायत में गोयल ने कहा कि उनकी मां मोनिका गोयल के नाम की यह दुकान विधायक अमनदीप अरोड़ा के इशारे पर ढहाई गई. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने विधायक और उनके सहयोगियों से जुड़े कई संपत्ति घोटालों को उजागर किया था. विधायक को लगता है कि उनकी शिकायतों से ही ईडी हरकत में आई, इसलिए उनकी दुकान ढहाई गई.
विधायक अमनदीप कौर ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि गोयल का परिवार मेडिकल की दुकान चलाता है और 1998 से उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के कई मामले चल रहे हैं. उन्होंने कहा, 'मेरा किसी तोड़फोड़ से कोई लेना-देना नहीं है. वे कई संपत्ति विवादों में उलझे हुए हैं.'
हालांकि, गोयल ने दावा किया कि उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को एनडीपीएस एक्ट समेत कई आपराधिक मामलों में फंसाया गया, ताकि वे अपनी कीमती संपत्तियां छोड़ने को मजबूर हों. उन्होंने आरोप लगाया कि जब परिवार दबाव में इनमें से कुछ संपत्तियां देने पर सहमत हो गया, तो पुलिस ने इन मामलों में यू-टर्न ले लिया.
पुलिस ने कहा कि गोयल की संपत्ति ढहाए जाने की शिकायत की जांच की जा रही है और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
विधायक से 36 घंटे की तलाशी और पूछताछ पूरी होने के एक दिन बाद ईडी अधिकारियों ने बताया कि उनकी जांच धरमकोट थाने में नवदीप सिंह, दिलकुश कुमारी और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर आधारित है. यह एफआईआर गांव अधरमान में सरकारी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी से जुड़ी है. इसके चलते राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे के रूप में 1,00,65,724 रुपये का गलत भुगतान होने का आरोप है.
ईडी के अनुसार मुआवजे की राशि दिलकुश कुमारी के बैंक खाते में जमा हुई, जिसे बाद में फ्रीज कर दिया गया. एजेंसी ने इस राशि को इधर-उधर करने में विधायक, उनके पति और सहयोगियों की संलिप्तता का आरोप लगाया है. एजेंसी ने मोगा में केंद्र सरकार, पंजाब सरकार, मार्केट कमेटी, नगर निगम और चर्च ट्रस्ट की जमीनों को विधायक के रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम धोखाधड़ी से हासिल या हस्तांतरित करने का भी आरोप लगाया है. इनमें यूनाइटेड चर्च ऑफ नॉर्दर्न इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन की 52 मरला 8 सरसाही जमीन भी शामिल है. एजेंसी ने कहा कि उसने कथित बेनामी संपत्तियों का संकेत देने वाले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है.
विधायक अमनदीप अरोड़ा ने इन आरोपों को भी नकारा। उन्होंने कहा कि जमीन रिकॉर्ड में हेराफेरी से उनका कोई संबंध नहीं है, क्योंकि यह मामला धरमकोट क्षेत्र का है और यह जमीन कांग्रेस शासन के दौरान अधिग्रहीत की गई थी और भुगतान भी उसी समय हुए. उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार के किसी सदस्य या रिश्तेदार का ईडी द्वारा बताई गई किसी भी संपत्ति के कथित धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा, 'मैंने इन संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड जुटा लिया है और खुद ईडी के सामने पेश करूंगी.'
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