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पीएम नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा से लगेंगे गुजरात की कल्पसर परियोजना को पंख,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी नीदरलैंड यात्रा के दौरान वहां के 'अफस्लुइटडिज्क' डैम का दौरा किया.यह परियोजना भी गुजरात की कल्पसर परियोजना की ही तरह है. पीएम के इस दौरे से कल्पसर परियोजना के पूरा होने की उम्मीदें जग गई हैं.

पीएम नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा से लगेंगे गुजरात की कल्पसर परियोजना को पंख,
नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से गुजरात की महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. प्रधानमंत्री रविवार को नीदरलैंड में थे. वहां उन्होंने अपने समकक्ष रॉब जेटेन के साथ नीदरलैंड की प्रसिद्ध जल प्रबंधन संरचना,'अफस्लुइटडिज्क' (Afsluitdijk) का दौरा किया. उन्होंने इस बांध में इस्तेमाल की गई तकनीक को सीखने योग्य बताया. उल्लेखनीय बात यह है कि 'अफस्लुइटडिज्क' और गुजरात की कल्पसर परियोजना के बीच बहुत-सी समानताएं हैं. कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग के लिए प्रधानमंत्री की मौजूदगी में भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के बुनियादी ढांचा और जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए. इससे परियोजना का कार्य तेज रफ्तार से आगे बढ़ने के नए द्वार खुल गए हैं.

अनियमित बारिश और सूखे की समस्या से वर्षों से जूझ रहे गुजरात को सरदार सरोवर बांध के निर्माण से राहत तो मिली है, लेकिन दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी एक परियोजना पर ही निर्भर रहना जोखिम ही कहा जा सकता है. इसीलिए, तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी ने खंभात की खाड़ी में महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना की संकल्पना की थी. हालांकि, यह परियोजना तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण है.

क्या है कल्पसर परियोजना

कल्पसर परियोजना के अंतर्गत खंभात की खाड़ी में एक विशाल बांध का निर्माण कर समुद्र में गिर रहीं सात नदियों के पानी का उपयोग करने की योजना है. इस योजना का उद्देश्य खंभात की खाड़ी पर मीठे पानी का एक विशाल जलाशय बनाना है. इसमें ज्वारीय ऊर्जा उत्पादन, सिंचाई और परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर का एकीकृत विकास शामिल है.

साल 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के करकमलों से कल्पसर बांध की पथरेखा सुनिश्चित करने के लिए भावनगर में समुद्री सर्वेक्षण का ऐतिहासिक शुभारंभ किया गया. लेकिन, योजना के बेहद जटिल होने के कारण इसे साकार करने में कई प्रकार की मुश्किलें सामने आ रही हैं. इन मुश्किलों से निपटने के लिए सरकार की ओर से लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं. इस साल 30 मार्च को गांधीनगर में नीदरलैंड की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कल्पसर योजना को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की थी.दोनों ने 'इंडो-डच' विशेषज्ञ समूह के गठन और जी2जी भागीदारी के बारे में चर्चा की थी.

कल्पसर परियोजना से क्या फायदा होगा

कल्पसर परियोजना के साकार होने पर सौराष्ट्र के नौ जिलों की 42 तहसीलों को करीब 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लाभ मिलेगा. इस योजना से दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र के बीच की दूरी 240 किलोमीटर से कम होकर 60 किलोमीटर रह जाएगी. इतना ही नहीं योजना से लगभग 1500 मेगावाट पवन ऊर्जा और 1000 मेगावाट सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन भी होगा. योजना से पर्यटन और मत्स्य पालन का विकास भी सुनिश्चित होगा.

कल्पसर परियोजना को साकार करने के लिए समय-समय पर विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार की गई हैं. इन डीपीआर में सर्वाधिक महत्वपूर्ण 'क्लोजर मेथेडोलॉजी' में नीदरलैंड के समुद्री क्षेत्र में लंबा अनुभव रखने वाले विश्व प्रसिद्ध संस्थान 'रॉयल हास्कोनिंग' ने काफी महत्वपूर्ण कार्य किया है.

क्या है नीदरलैंड का 'अफस्लुइटडिज्क'

'अफस्लुइटडिज्क' नीदरलैंड ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे मशहूर इंजीनियरिंग परियोजनाओं में से एक है. यह दुनिया के लिए जल प्रबंधन का एक शानदार उदाहरण है. इसका निर्माण करीब 80 साल पहले किया गया था. ये 32 किलोमीटर लंबा बैरियर डैम उत्तरी सागर को मीठे पानी की झील से अलग करता है.इसके साथ ही, यह बांध नीदरलैंड के निचले इलाकों के बड़े हिस्से को भारी बाढ़ से बचाता है, यही वजह है कि इसे बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक मानक माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह समुद्र के खारे पानी को रोककर अंदर मीठे पानी का एक बहुत बड़ा जलाशय बनाता है.'अफस्लुइटडिज्क' परियोजना में मीठे पानी के भंडारण के अलावा जहाजरानी, परिवहन संपर्क और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन भी शामिल है.

प्रधानमंत्री का दृढ़ संकल्प और नीदरलैंड की भागीदारी से साकार होगी कल्पसर परियोजना. प्रधानमंत्री  मोदी सदैव दीर्घकालीन और बड़े लक्ष्य लेकर आगे बढ़ते हैं.गुजरात में अपने मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान उन्होंने कल्पसर परियोजना का स्वप्न देखा था. राज्य को जल संकट की स्थिति से बाहर निकालकर जल समृद्ध बनाने के संकल्प के साथ उन्होंने सरदार सरोवर बांध जैसी विराट परियोजना को धरातल पर उतारा. दशकों तक राजनीतिक और पर्यावरणीय अवरोधों का सामना कर रही सरदार सरोवर योजना को साकार करने के लिए उन्होंने अद्म्य इच्छा शक्ति और फौलादी संकल्प का परिचय दिया.

पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना

प्रधानमंत्री मोदी कल्पसर योजना को लेकर शुरुआत से आशावादी रहे हैं. तमाम प्रकार की अड़चनों के बावजूद उन्होंने इस परियोजना को साकार करने के स्वप्न को आंखों से ओझल नहीं होने दिया. जटिल इंजीनियरिंग और तकनीक की विराट चुनौतियों के कारण परियोजना में विलंब अवश्य हुआ, लेकिन नीदरलैंड दौरे के दौरान उनका जल प्रबंधन संरचना 'अफस्लुइटडिज्क' का निरीक्षण करने जाना और कल्पसर परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में भारत का नीदरलैंड के साथ आशय पत्र पर हस्ताक्षर करना, यह बताता है कि प्रधानमंत्री कल्पसर परियोजना को लेकर कितने गंभीर और आशावादी हैं.

भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह दौरा दोनों देशों की इस साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है कि वे जल प्रबंधन के नवाचार, जलवायु अनुकूलन और सतत अवसंरचना के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे.

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र  मोदी का यह दौरा और कल्पसर परियोजना के लिए हुए आशय पत्र पर हस्ताक्षर से गुजरात के लिए सुनहरी संभावनाओं के नए द्वार खुल गए हैं. इसके साथ ही, नीदरलैंड अपने विश्व प्रसिद्ध 'अफस्लुइटडिज्क' डैम प्रोजेक्ट के 90 साल से अधिक के प्रबंधन के अनुभव और निपुणता का लाभ भारत को देगा. यह सहयोग 29 मार्च, 2022 को दोनों देशों के बीच हुई 'जल पर भारत-डच रणनीतिक साझेदारी' पर आधारित है. बता दें कि नीदरलैंड के पास समुद्र में बांध बनाने की उच्च स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञता है. अब गुजरात को इसी विशेषता का लाभ मिलने जा रहा है, जो राज्य की महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा.

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