- मध्यपूर्व एशिया में युद्ध के कारण 2 अप्रैल 2026 को कच्चे तेल की औसत कीमत 130.93 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी.
- फरवरी 2026 में कच्चे तेल की कीमत 69.01 डॉलर प्रति बैरल थी, जो युद्ध के बाद लगभग दोगुनी हो गई है.
- भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर खर्च बढ़ता है.
पेट्रोलियम मंत्रालय की Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की ओर से मंगलवार, 07 अप्रैल को जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मध्यपूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से 02 अप्रैल, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत एक दिन में करीब 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर US$ 130.93/बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गयी.
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक 01 अप्रैल, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत बढ़कर US$ 120.84/बैरल थी. सरकारी आकड़ों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी, 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी. यानी, मध्यपूर्व युद्ध एशिया में युद्ध की वजह से कच्चा तेल फरवरी, 2026 की औसत कीमत के मुकाबले 02 अप्रैल, 2026 को 61.92 डॉलर प्रति बैरल महंगा हो गया, यानि 89.72% की बढ़ोतरी!
मार्च 2026 महीने के दौरान भी कच्चे तेल की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही थी. भारत अपनी ज़रुरत का 85% से ज़्यादा कच्चा तेल अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल के और महंगा होने से तेल आयात का खर्च बढ़ता जा रहा है.
सरकारी तेल कंपनियों पर तेल आयात के बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के लिए भारत सरकार ने 27 मार्च, 2026 को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटाने का फैसला किया था. सरकार ने इस आसमान छूती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के समय तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे को कम करने के लिए taxation revenues छोड़ने का फैसला किया था. लेकिन कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत में इस बड़ी बढ़ोतरी से भारत सरकार को फिर हस्तक्षेप करना पड़ सकता है. लेकिन ये महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को घटा दिया है, लेकिन राज्यों ने VAT/Sales Tax में कोई कमी नहीं किया है.
मध्य पूर्व युद्ध के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 1 अप्रैल, 2026 को राज्य सरकारों से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर VAT कम करने की अपील की थी. लेकिन राज्यों की तरफ अभी तक कोई पहल इस दिशा में नहीं की गयी है.
पेट्रोलियम मंत्रालय के Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय साल 2024-25 में राज्यों की पेट्रोलियम, ऑयल और लुब्रिकेंट्स प्रोडक्ट्स पर Sales Tax/VAT से कुल कलेक्शन 3,02,058.5 करोड़ रुपया था. जबकि वित्तीय साल 2025-26 के पहले 6 महीने (H 1) में राज्यों की POL products (Petroleum, Oil, and Lubricants) पर Sales Tax/VAT से कुल कलेक्शन 1,46,892 करोड़ रुपया था.
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