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चुनाव से पहले पुरुलिया में माओवादी पोस्टरों से मचा हड़कंप, जंगलमहल में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले पुरुलिया के जंगलमहल क्षेत्र में माओवादी पोस्टर मिलने से हड़कंप मच गया है. इन पोस्टरों के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है.

चुनाव से पहले पुरुलिया में माओवादी पोस्टरों से मचा हड़कंप, जंगलमहल में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
पोस्टर देख एजेंसिया भी अलर्ट
  • पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में माओवादी संगठन से जुड़े पोस्टर मिलने के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है
  • स्थानीय सड़क निर्माण, बेरोजगारी, आवास वितरण में अनियमितताओं की जांच और अवैध शराब पर कार्रवाई की मांग
  • सुरक्षा एजेंसियों ने पोस्टरों को हटाकर तलाशी अभियान शुरू किया है और इलाके में गश्त बढ़ा दी है
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले पुरुलिया जिले के कुछ इलाकों में माओवादी गतिविधियों से जुड़ी आशंकाओं ने फिर से सिर उठा लिया है. जिले में कथित तौर पर माओवादी संगठनों से जुड़े पोस्टर मिलने के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है. खासतौर पर संवेदनशील माने जाने वाले जंगलमहल क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई हैं. पुलिस के मुताबिक, मंगलवार सुबह पुरुलिया के बलरामपुर थाना क्षेत्र में ये पोस्टर सामने आए. घातबेरा‑केरुआ बेल्ट में स्थित एक बीट ऑफिस के पास सफेद कागज पर लाल स्याही से लिखे गए ये पोस्टर चिपके हुए मिले थे. पुलिस सूत्रों का कहना है कि पोस्टरों की भाषा और शैली पारंपरिक माओवादी प्रचार सामग्री से मिलती‑जुलती है. सबसे अहम बात यह है कि इन पोस्टरों पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई.

स्थानीय मुद्दों को लेकर मांगें और चेतावनियां

पोस्टरों में कई स्थानीय मुद्दों को उठाया गया है. इनमें जंगलमहल क्षेत्र में पक्की सड़कों के निर्माण, बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने, सरकारी योजनाओं से कथित तौर पर वंचित लोगों को आवास मुहैया कराने और आवास आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं की जांच की मांग शामिल की गई है. इसके साथ ही पोस्टरों में स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को चेतावनी भी दी गई है. एक अन्य पोस्टर में अवैध शराब कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है, वहीं जंगलों से अवैध लकड़ी कटाई पर रोक लगाने की बात भी कही गई है. इन पोस्टरों में वन विभाग के अधिकारियों को लेकर भी धमकी भरे संदेश दर्ज होने की बात सामने आई है.

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इलाके में बढ़ा तनाव, पोस्टर हटाए गए

पोस्टरों के मिलने की खबर मिलते ही इलाके में दहशत और चिंता का माहौल बन गया. पुरुलिया का यह क्षेत्र पहले भी माओवादी गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है, ऐसे में लोगों की आशंकाएं और बढ़ गईं. सूचना मिलते ही पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे, पोस्टरों को हटाया गया और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया. इस मामले में अधिकारियों का कहना है कि पोस्टर A4 साइज के कागज पर छपे हुए थे, जो पहले सामने आए माओवादी पोस्टरों से कुछ अलग पैटर्न से मेल खाते हैं. इसे देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि या तो माओवादियों ने अपने तौर‑तरीकों में बदलाव किया है या फिर किसी अन्य समूह ने माओवादी नाम का इस्तेमाल किया है. फिलहाल पोस्टरों की असलियत और उनके पीछे के लोगों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी गई है.

चुनाव से पहले सुरक्षा कड़ी

आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए प्रशासन इस घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से ले रहा है. यही वजह है कि पूरे इलाके में पुलिस गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है. साथ ही तमाम सुरक्षा एजेंसियां हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं, ताकि किसी भी तरह की स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके. पुरुलिया में माओवादी शैली के पोस्टरों की वापसी ने चुनावी माहौल में एक नई बेचैनी जोड़ दी है. फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और हालात पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि जंगलमहल के इस संवेदनशील इलाके में किसी भी तरह की हिंसा या उकसावे की कोशिश को नाकाम किया जा सके.

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