- पप्पू यादव के आवास पर चप्पल फेंकने वाले युवकों ने अपने किए पर कोई पछतावा नहीं जताया
- सुमित और हैप्पी शर्मा ने कहा कि वे धार्मिक आस्था से जुड़े सवाल पूछने और विरोध दर्ज कराने गए थे
- दोनों युवकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और चाकू की जांच के लिए CBI जांच की मांग की है
बिहार से पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव पर चप्पल फेंकने वाले युवकों ने कहा है कि उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है. 3 अगस्त को पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव के आवास पर पहुंचकर विरोध करने वाले सुमित और हैप्पी शर्मा ने NDTV से विशेष बातचीत की. दोनों ने दावा किया कि वे पप्पू यादव से सवाल पूछने गए थे और घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
'गूगल मैप के जरिए पहुंचे पप्पू यादव के आवास'
सुमित ने कहा कि वह और हैप्पी शर्मा संतों के समर्थन में पप्पू यादव के आवास पहुंचे थे. उनके मुताबिक, वे बुलंदशहर से दिल्ली आए थे और गूगल मैप की मदद से पप्पू यादव के घर तक पहुंचे. उन्होंने दावा किया कि वहां पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि आधे घंटे बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस होने वाली है, इसलिए वे वहीं रुक गए.
सुमित के अनुसार, जब पप्पू यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए पहुंचे तो उन्होंने उनसे सवाल किया कि उन्होंने भगवान राम और सनातन आस्था को लेकर ऐसा बयान क्यों दिया, जिससे लोग आहत हुए. उनका आरोप है कि इसी दौरान विवाद बढ़ गया.
'सोने की चेन और घड़ी गायब'
सुमित ने कहा, 'गुस्से में मैंने चप्पल उछाली. इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने हमारे साथ मारपीट की.' उन्होंने दावा किया कि घटना के दौरान उनकी सोने की चेन और घड़ी भी गायब हो गई, जिसकी शिकायत उन्होंने पुलिस में दी है.
CBI जांच की मांग की
उन्होंने कहा कि अगर पहले से हमला करने की योजना होती तो वे बड़ी संख्या में समर्थकों को साथ लेकर आते. यह कोई सुनियोजित कार्रवाई नहीं थी. सुमित ने यह भी मांग की कि घटना के दौरान कथित तौर पर सामने आए चाकू की जांच होनी चाहिए और पूरे मामले की CBI जांच कराई जानी चाहिए. उनका कहना है कि यह भी जांच का विषय है कि चाकू वहां कैसे पहुंचा.
वहीं, हैप्पी शर्मा ने कहा कि अगर उनका इरादा किसी पर हथियार से हमला करने का होता तो वे चप्पल नहीं फेंकते. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ भी मारपीट हुई और उन्हें चोटें आईं. दोनों ने कहा कि वे चुनाव लड़ने या राजनीतिक फायदा लेने के उद्देश्य से वहां नहीं गए थे. उनका कहना है कि वे अपनी धार्मिक आस्था से जुड़े सवाल उठाने पहुंचे थे और उसी का विरोध दर्ज करा रहे थे.
सुमित और हैप्पी शर्मा ने कहा कि वे किसी भी धर्म या आस्था का अपमान होने पर विरोध करने को अपना अधिकार मानते हैं. साथ ही उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई. इस मामले में पुलिस जांच जारी है और घटना को लेकर दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें दर्ज कराई गई हैं.
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