- नटराजन का राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में नामांकन आपराधिक मामले की जानकारी न देने के कारण रद्द कर दिया गया.
- झारखंड में परिमल नथवानी के कागजात में तीन तकनीकी गड़बड़ियां सामने आने के बाद नामांकन होल्ड पर रखा गया था.
- बाद में नथवानी के नामांकन को सही करार दिया गया और वे झारखंड की राज्यसभा सीट के लिए चुनाव मैदान में बने रहे.
मध्यप्रदेश में राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा रद्द कर दिया गया. कहा गया कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी थी, जबकि कांग्रेस का कहना है कि नटराजन के खिलाफ कोई ऐसा आपराधिक मामला नहीं है, जिसका खुलासा करना अनिवार्य हो. अब यह मामला चुनाव आयोग से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. कुछ ऐसा ही मामला झारखंड में भी देखने को मिला, जहां दो सीटों के लिए तीसरे उम्मीदवार के रूप में एक बड़े औद्योगिक घराने से जुड़े परिमल नथवानी चुनाव मैदान में उतरे, जिन्हें बीजेपी का समर्थन प्राप्त है. परिमल नथवानी पहले भी दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और फिलहाल आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सदस्य थे, जहां उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है.
कागजों में तीन तकनीकी गड़बड़ियां
दस्तावेजों की जांच के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी के कागजों में तीन तकनीकी गड़बड़ियां सामने आईं. कुछ दस्तावेजों में उनका नाम ‘परिमल नाथवानी' दर्ज है, जबकि कुछ जगह ‘नाथवानी परिमल' लिखा गया है. दूसरी गलती यह थी कि उनके खिलाफ किसी भी आपराधिक मामले की जानकारी वाला कॉलम खाली छोड़ दिया गया था. तीसरी गड़बड़ी HUF वाले फॉर्म में भी अधूरी जानकारी की थी. मामला गरमाने पर रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन फिलहाल होल्ड पर डाल दिया. बाद में आपत्तियों पर सुनवाई के लिए नथवानी को अगले दिन तक का समय दिया गया और अंततः उनके नामांकन को सही करार दिया गया.
कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील सलमान खुर्शीद को रांची भेजा, लेकिन वे देर से पहुंचे और उन्हें बहस में हिस्सा लेने का मौका नहीं मिला. ऐसे में कांग्रेस का पक्ष सुरेंद्र चौहान ने रखा. अब परिमल नथवानी चुनाव मैदान में हैं और कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की सीट मुश्किल में पड़ गई है. झारखंड में प्रणव झा को कांग्रेस उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से ही विवाद शुरू हो गया था. जेएमएम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि राज्यसभा उम्मीदवार के चयन में उनके नेता हेमंत सोरेन को विश्वास में नहीं लिया गया. यहां तक कि जेएमएम ने दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की बात भी कही. इसके बाद कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और हरियाणा के नेता अजय शर्मा को रांची भेजा. बघेल इसलिए भेजे गए क्योंकि उन्होंने 2019 में मुख्यमंत्री रहते हुए हेमंत सोरेन के लिए चुनाव प्रचार किया था, जबकि अजय शर्मा की भी सोरेन से अच्छी तालमेल बताई जाती है.
बीजेपी समर्थित परिमल नथवानी की एंट्री ने बदला 'खेल'
कई दौर की बातचीत के बाद हेमंत सोरेन मान गए और जेएमएम ने केवल एक उम्मीदवार उतारा. मुख्यमंत्री ने महागठबंधन के सभी विधायकों को डिनर पर भी बुलाया. इससे लगा कि महागठबंधन में सब ठीक है और प्रणव झा की राह आसान हो गई है, लेकिन तभी निर्दलीय और बीजेपी समर्थित परिमल नथवानी की एंट्री हो गई. जब उनका पर्चा वैध घोषित हुआ, तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा सांसद नासिर हुसैन को रांची भेजा. नासिर हुसैन और झारखंड के प्रभारी के. राजू ने विधानसभा परिसर में धरना भी दिया. इसके बाद सलमान खुर्शीद को भेजा गया, लेकिन वे समय पर नहीं पहुंच सके.
अब स्थिति यह है कि झारखंड में दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं- जेएमएम के बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और बीजेपी समर्थित निर्दलीय परिमल नथवानी. जीत के लिए एक उम्मीदवार को 28 वोट चाहिए. जेएमएम, कांग्रेस, राजद और माले मिलाकर 56 विधायक हैं, जिससे महागठबंधन दोनों सीटें जीत सकता है. वहीं एनडीए के पास 24 विधायक हैं और जयराम महतो एकमात्र अतिरिक्त विधायक हैं. ऐसे में परिमल नथवानी को जीत के लिए महागठबंधन में क्रॉस वोटिंग की जरूरत पड़ेगी. ऐसे हालात में लगता है कि मध्यप्रदेश के बाद कांग्रेस की झारखंड की यह राज्यसभा सीट भी फंस गई है.
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