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ड्रोन फेडरेशन इंडिया पर फर्जी NOC का मामला, MCA की जांच में हुआ खुलासा

MCA की निरीक्षण रिपोर्ट में ड्रोन फेडरेशन इंडिया (DFI) से जुड़े कथित फर्जी DGCA NOC और अन्य दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं.

ड्रोन फेडरेशन इंडिया पर फर्जी NOC का मामला, MCA की जांच में हुआ खुलासा
ड्रोन फेडरेशन इंडिया पर MCA की जांच
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कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की जांच रिपोर्ट में ड्रोन फेडरेशन इंडिया (DFI) के कामकाज को लेकर कथित तौर पर फर्जी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है. इस मामले को लेकर एमसीए के निरीक्षण अधिकारी ने मामले में डीएफआई से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश भी की है.

नाम बदलने की प्रक्रिया के दौरान उठा मामला

एनडीटीवी के पास एमसीए के सहायक निदेशक अल्ताफ एम. शेख द्वारा तैयार की गई निरीक्षण रिपोर्ट में उपलब्ध है. रिपोर्ट में अनुसार, यह मामला डीएफआई द्वारा अपना नाम 'ड्रोन फेडरेशन इंडिया' से बदलकर 'ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया ' करने की कोशिश के दौरान सामने आया. ऐसे में इस प्रस्तावित नए नाम पर आपत्ति जताई गई थी. आशंका थी कि इससे लोगों के बीच यह संदेश जा सकता है कि संगठन को सरकार का समर्थन या संरक्षण प्राप्त है. रिपोर्ट के अनुसार, नाम बदलने की प्रक्रिया के दौरान डीजीसीए की ओर से जारी बताया गया एक एनओसी अधिकारियों के सामने पेश किया गया. हालांकि, मंत्रालय की जांच के दौरान डीजीसीए ने कथित तौर पर एमसीए को बताया कि यह दस्तावेज असली नहीं था.

NOC पर क्यों उठे सवाल?

रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, NOC में दिया गया फाइल नंबर DGCA के रिकॉर्ड में नहीं मिला. इसके अलावा, दस्तावेज पर जिन अधिकारी के हस्ताक्षर बताए गए थे, वे NOC में दर्ज तारीख से पहले ही रिटायर हो चुके थे. इन तथ्यों के आधार पर निरीक्षण अधिकारी ने दस्तावेज को कथित तौर पर फर्जी माना है.

4 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश

निरीक्षण रिपोर्ट में DFI से जुड़े तीन निदेशकों और एक कंपनी सचिव के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है. इनमें राहत कुलश्रेष्ठ, प्रवीण विनोद प्रजापति, विपुल सिंह और कंपनी सचिव अनूप कुमार पांडेय का नाम शामिल है. इन लोगों के खिलाफ Companies Act, 2013 की धारा 448, धारा 447 तथा अन्य गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की सिफारिश की गई है. ये धाराएं मुख्य रूप से गलत बयान देने और धोखाधड़ी से संबंधित हैं.

एक और हस्ताक्षर को लेकर आरोप

रिपोर्ट में एक अलग मामले का भी उल्लेख है. एक स्पष्टीकरण में इस्तेमाल किए गए हस्ताक्षर को लेकर आरोप है कि वह किसी अन्य कॉरपोरेट दस्तावेज से लेकर इस्तेमाल किया गया था. इस मामले में निरीक्षण अधिकारी ने कंपनी अधिनियम की धारा 158 के तहत भी जिम्मेदारी तय करने की सिफारिश की है.

अभियोजन कार्रवाई में नहीं दिखीं कुछ धाराएं

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बाद में मुंबई के फोर्ट स्थित 37वीं अदालत में दर्ज Special Case No. 578/2026 में कंपनी और उसके तीन निदेशकों के खिलाफ वित्तीय विवरण, कॉरपोरेट रिपोर्टिंग और खातों की पुस्तकों के रखरखाव से जुड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई. हालांकि, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की निरीक्षण रिपोर्ट में जिन धाराओं 448 और 447 के तहत कार्रवाई की सिफारिश की गई थी, वे बाद की इस अभियोजन कार्रवाई में शामिल दिखाई नहीं देतीं.

इसी अंतर को लेकर सवाल

इससे यह सवाल उठ रहा है कि MCA की जांच में सामने आए कथित फर्जी NOC और गलत हस्ताक्षर के आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई हुई और मामला किस स्तर तक पहुंचा. इस मामले को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) में भी शिकायत किए जाने की बात सामने आई है. हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अभी तक साबित नहीं हुए हैं.

DFI का MCA मामले पर बयान

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर किए गए एक पोस्ट में DFI ने कहा, "हम एक सेक्शन 8 की गैर-लाभकारी संस्था हैं, जो सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के साथ मिलकर भारत में सुरक्षित, नियमों के अनुरूप और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ड्रोन उद्योग के निर्माण के लिए काम करती है. DFI अनधिकृत और नियमों का पालन नहीं करने वाले ड्रोन के भारतीय बाजार में प्रवेश के खिलाफ कार्रवाई की भी वकालत करती है. हमें ड्रोन फेडरेशन इंडिया के निदेशकों को लेकर MCA की जांच और इससे संबंधित शिकायत के संबंध में सामने आई हालिया खबरों की जानकारी है.

इस संबंध में DFI ने अपने बयान में कहा है कि मुंबई की अदालत में चल रहे मामले कंपनी अधिनियम के तहत DFI से जुड़ी कुछ प्रक्रियात्मक कमियों से संबंधित हैं. संस्था इन मामलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में सुलझा रही है और साथ ही अपनी आंतरिक अनुपालन व्यवस्था को भी मजबूत कर रही है.

DFI ने कहा कि उसके नाम को ROC रिकॉर्ड में बदलने की प्रक्रिया को लेकर भी अधिकारियों ने जांच की थी. इस प्रक्रिया में कुछ ऐसे दस्तावेज तीसरे पक्ष की ओर से जमा किए गए थे, जिनकी सेवाएं DFI ने सीधे तौर पर नहीं ली थीं. बाद में इनमें से एक दस्तावेज फर्जी पाया गया.

DFI का कहना है कि संस्था या उसके निदेशकों को इस फर्जी दस्तावेज के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और न ही इसे तैयार करने या इस्तेमाल करने में उनकी कोई भूमिका थी. संस्था ने स्वयं पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और फर्जी दस्तावेज तैयार करने या उसका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

संस्था ने आगे कहा कि वह इस मामले की जांच में अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रही है. इस प्रकरण का उसके कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ा है और भारतीय ड्रोन निर्माताओं को समर्थन देने का उसका कार्य जारी है. DFI के अनुसार, उसके निदेशक पारदर्शिता, बेहतर प्रशासन और नियमों के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्ध हैं. DFI ने अपने सदस्यों और साझेदारों का भरोसा बनाए रखने के लिए उनका धन्यवाद किया और कहा कि मामले में आगे होने वाली प्रगति की जानकारी साझा की जाती रहेगी.

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