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समुद्री महाकुंभ ‘मिलन 2026’: 74 देशों के साथ भारत का क्या है महासागर विजन, आप भी जान लीजिए

यह अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया जाएगा-हार्बर चरण और समुद्री चरण. बंदरगाह वाला चरण व्यावसायिक बातचीत को मजबूत करने, आपसी समझ को बढ़ावा देने, सहयोग बढ़ाने और जुड़ाव के एक व्यापक कार्यक्रम के माध्यम से लोगों के बीच संबंधों को बढ़ाने पर केंद्रित होगा.

समुद्री महाकुंभ ‘मिलन 2026’: 74 देशों के साथ भारत का क्या है महासागर विजन, आप भी जान लीजिए
नई दिल्ली:

बंगाल की खाड़ी से लेकर हिंद महासागर तक, सबसे बड़ी नौसैनिक एक्सरसाइज 'मिलन 2026' का आगाज हो चुका है. विशाखापत्तनम से शुरू हो रहे इस अभ्यास में 74 देश हिस्सा ले रहे हैं. भारत एक ऐसी मिलिट्री एक्सरसाइज की मेजबानी कर रहा है, जिसमें अमेरिका और रूस, और उनके साथ ईरान तक शामिल है. एक्सरसाइज की शुरुआत में भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी अपने सम्बोधन में सभी देशों को धन्यवाद दिया. 

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एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारत में, समय-समय पर होने वाले सम्मेलनों की एक लंबी परंपरा रही है. ये लोगों को एक साथ लाकर संबंधों को मजबूत करते हैं. साथ ही ये साझा प्रतिबद्धता और उद्देश्य की पुष्टि करने का अवसर प्रदान करते हैं. इसी भावना के साथ, मिलान एक समुद्री महाकुंभ की तरह है. ये दुनिया भर के समुद्री पेशेवरों का एक ऐसा मिलन है, जो समुद्रों को सुरक्षित, संरक्षित और खुला रखने की साझा प्रतिबद्धता और उद्देश्य से एकजुट हैं.

इस मौके पर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे. नेवी चीफ ने रक्षा मंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे अहम मौके पर उनकी उपस्थिति समुद्री मामलों को भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले महत्व को दिखाता है. इससे ये सुनिश्चित होता है कि सरकार, क्षेत्र से हटकर, और देशों से भी सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है. साथ ही नेवी चीफ ने भारत के 'महासागर' विजन को भी दुनिया के सामने रखा.

उन्होंने कहा कि इस जटिल समुद्री वातावरण के प्रति हमारा दृष्टिकोण भारत के माननीय प्रधानमंत्री के महासागर दृष्टिकोण पर आधारित है. भारतीय नौसेना इसी समावेशी दृष्टिकोण से निर्देशित होती है. हम अपने प्रत्येक समुद्री साझेदार और मित्र के साथ समान रूप से जुड़ते हैं, यह मानते हुए कि प्रत्येक नौसेना अपनी-अपनी ताकत लेकर आती है - चाहे वह अनुभव हो, भौगोलिक स्थिति हो या क्षमता.

साथ ही इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी भारत के समुद्री विजन को लेकर सरकार का रुख बताया. उन्होंने कहा कि आज, हम मिलान के माध्यम से समुद्री गतिविधियों के परिचालन पहलू में निर्णायक रूप से आगे बढ़ते हुए, उस एकजुट भावना और समुद्री गति को औपचारिकता से ठोस रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा ही देशों को एकजुट करने के सभी प्रयासों में एक अहम भागीदार की भूमिका निभाई है. हमने बहुपक्षीय बैठकों और समन्वित गश्तों में नियमित रूप से भाग लिया है; हमारी सेनाओं ने सुनामी जैसी मानवीय आपदाओं में त्वरित प्रतिक्रिया दी है और पड़ोसियों को समय पर सहायता प्रदान की है. हम चक्रवातों के समय कई संयुक्त विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र निगरानी और जलवैज्ञानिक सहायता एवं सपोर्ट मिशन में भी शामिल रहे हैं. 

यह अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया जाएगा-हार्बर चरण और समुद्री चरण. बंदरगाह वाला चरण व्यावसायिक बातचीत को मजबूत करने, आपसी समझ को बढ़ावा देने, सहयोग बढ़ाने और जुड़ाव के एक व्यापक कार्यक्रम के माध्यम से लोगों के बीच संबंधों को बढ़ाने पर केंद्रित होगा. इस चरण के दौरान प्रमुख गतिविधियों में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सेमिनार, विषय वस्तु विशेषज्ञ आदान-प्रदान, द्विपक्षीय जुड़ाव, युवा अधिकारियों का मिलन और भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच क्रॉस-डेक यात्राएं शामिल हैं.

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हार्बर चरण में पूर्व-सेल योजना सम्मेलन, परिचालन और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, शहर और सांस्कृतिक पर्यटन, खेल बातचीत और एक मिलन सांस्कृतिक शाम भी शामिल है, जो भाग लेने वाले कर्मियों और प्रतिनिधिमंडलों को परिचालन व्यस्तताओं से परे सार्थक बातचीत के अवसर प्रदान करता है. समुद्री चरण में समुद्र में उन्नत परिचालन अभ्यासों की एक श्रृंखला होगी, जिसे भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग और अंतरसंचालनीयता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है इन अभ्यासों में समन्वित समुद्री सुरक्षा संचालन, सामरिक पैंतरेबाज़ी और संचार अभ्यास शामिल होंगे, जिससे आपसी विश्वास, परिचालन तालमेल और सामूहिक तैयारी को मजबूत किया जाएगा.

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