कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में प्रभारी बदलने के बाद अब तमिलनाडु में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की है. मणिकम टैगोर को इस काम के लिए चुना गया है. मणिकम टैगोर लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप भी हैं और अक्सर राहुल गांधी के आसपास ही बैठते हैं. टैगोर लोकसभा में कांग्रेस के हल्ला ब्रिगेड के भी सदस्य हैं, पिछली लोकसभा में इनको कुछ दिनों के लिए निलंबित भी किया गया था. जब तब उनका निलंबन वापस नहीं हुआ, तब तक वो अन्य निलंबित सांसदों के साथ संसद परिसर में धरना पर भी बैठते रहे.
मणिकम टैगोर को अध्यक्ष बनाने के पीछे की असली वजह
मणिकम टैगोर को तमिलनाडु का अध्यक्ष बनाने के पीछे की असली वजह है, उनका डीएमके के साथ विरोध. मणिकम तमिलनाडु के उन नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने हमेशा से राहुल गांधी को कहा कि कांग्रेस को डीएमके के साथ सत्ता साझा करना चाहिए या कहें कि डीएमके पर दबाव डाला जाए कि कांग्रेस को सरकार में शामिल किया जाए. जब डीएमके ने ये बात नहीं मानी, तो मणिकम ने प्रवीण चक्रवर्ती के साथ मिल कर राहुल गांधी को यह भी समझाने की कोशिश की थी कि पार्टी को एक्टर विजय की पार्टी टीवीके के साथ चुनाव लड़ना चाहिए.
लोकसभा चुनाव में वायको को हराया था
हालांकि, यह हो नहीं सका, क्योंकि पी चिदंबरम और कांग्रेस अध्यक्ष डीएमके को छोड़ना नहीं चाहते थे. लेकिन इस सब का इनाम प्रवीण चक्रवर्ती और मणिकम टैगोर दोनों को मिला. प्रवीण चक्रवर्ती को राज्यसभा में लाया गया और मणिकम को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. मणिकम तमिलनाडु में के. सेल्वापेरिनथगई की जगह लेंगे. मणिकम तमिलनाडु के विरुधुनगर से सांसद हैं और अपने सबसे पहले लोकसभा चुनाव में वायको को हराया था. 51 वर्ष के मणिकम ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत एनएसयूआई से की थी और अभी आंध्र प्रदेश और अंडमान निकोबार के प्रभारी है.
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