- तमिलनाडू विधानसभा में 'तमिल थाई वाज्थु' प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हो गया है.
- सीएम विजय की तरफ से यह प्रस्ताव दिया गया था, जिसे सभी पार्टियों ने समर्थन दिया है.
- DMK, AIADMK, BJP, कांग्रेस समेत सदन के अन्य दलों ने प्रस्ताव को समर्थन दिया.
तमिलनाडु विधानसभा में सर्वसम्मति से 'तमिल थाई वजथु' प्रस्ताव पास कर दिया गया है. यह तमिलनाडु का आधिकारिक राज्य गीत है. जिसे अब राज्य में होने वाले हर सरकारी कार्यक्रम में गाना अनिवार्य कर दिया गया है. मुख्यमंत्री विजय की तरफ से पेश किए गए विशेष प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया, जिसमें DMK, AIADMK कांग्रेस, पीएमके, वीसीके, सीपीआई, भाजपा और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी समर्थन दिया है. विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों की तरफ से प्रस्ताव के पक्ष में बोलने के बाद विधानसभा स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने इसे पारित कर दिया.
तमिलनाडु का राज्य गीत
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि तमिल भाषा राज्य के लोगों की पहचान, संस्कृति और भावनाओं का अभिन्न अंग है. उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाज्थु' को प्राथमिकता देना तमिलनाडु की सांस्कृतिक परंपराओं और अधिकारों की रक्षा का सवाल है. सीएम ने याद दिलाया कि मनोन्मनीयम सुंदरनार के लिखे गए 'मनोन्मनीयम' से लिया गया यह गीत 1970 में जारी सरकारी आदेश के बाद से ही सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में गाया जाता रहा है. इसे 2021 में औपचारिक रूप से तमिलनाडु के राज्य गीत का दर्जा दिया गया था. मुख्यमंत्री विजय ने राज्य गीतों के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 1 जुलाई 2026 को जारी एक संचार का भी जिक्र किया. उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को पार्टी की सीमाओं से ऊपर उठकर देखें और कहा कि 'तमिल थाई वाज्थु' का दर्जा राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनना चाहिए.
DMK का समर्थन
डीएमके विधायक गोवी चेजियन ने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने सरकारी आदेश के माध्यम से आधिकारिक कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाज्थु' गाने की परंपरा शुरू की थी. चेजियन ने यह भी बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 17 दिसंबर 2021 को एक आदेश जारी कर इस गीत को गाना अनिवार्य कर दिया था. उन्होंने कहा कि इस परंपरा को मजबूत कानूनी सुरक्षा देने से यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य में इसके दर्जे को बदला न जा सके.
AIADMK का भी समर्थन
AIADMK के महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी ने भी अपनी पार्टी के समर्थन की घोषणा की. उन्होंने 'तमिल थाई वाज्थु' को केवल एक औपचारिक गीत से कहीं अधिक बताते हुए कहा कि यह तमिल भाषा संस्कृति और पहचान का प्रतिनिधित्व करता है. पलानीस्वामी ने इस बात पर भी जोर दिया कि तमिल भाषा पर गर्व और देशभक्ति परस्पर विरोधी भावनाएं नहीं बल्कि एक-दूसरे की पूरक हैं. सदन में मौजूद सभी पार्टियों के समर्थन से विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव को मंजूरी दी और राज्य सरकार तथा शैक्षणिक कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाज्थु' की प्रधानता को फिर से दोहराया.
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