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वोटर लिस्ट में नहीं था नाम तो शख्स ने दे दी जान, बेटी ने कहा- SIR का भय उन्हें पूरी तरह घेरे था

SIR के भय से 35 साल के शख्स की मौत हो गई. परिवार ने आरोप लगाया है कि मृतक खेपा हाजरा विशेष गहन पुनरीक्षण सुनवाई (SIR) में शामिल होने के बावजूद अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं किए जाने से निराश था.

वोटर लिस्ट में नहीं था नाम तो शख्स ने दे दी जान, बेटी ने कहा- SIR का भय उन्हें पूरी तरह घेरे था
SIR के भय से शख्स की मौत
West Bengal:

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट में जारी किया जा रहा, जिसमें हजारों लोगों के नाम लिस्ट से गायब हैं. ऐसे में जिन स्थानीय लोगों का नाम लिस्ट में नहीं हो वह दहशत में आ गए हैं. ताजा मामला पश्चिम बर्धमान जिले का हैं, जहां कांक्सा क्षेत्र के अकंद्रा गांव एक 35 साल के शख्स की मौत हो गई. परिवार ने आरोप लगाया है कि मृतक खेपा हाजरा विशेष गहन पुनरीक्षण सुनवाई (SIR) में शामिल होने के बावजूद अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं किए जाने से निराश था. परिवार का आरोप है कि वह गंभीर डिप्रेशन में था और उसे नागरिकता खोने का डर सता रहा था और उसने आत्महत्या कर ली.

SIR के बाद पूरक सूची में भी नहीं हुआ नाम शामिल

पुलिस के मुतबाकि, खेपा हाजरा का नाम पश्चिम बंगाल की 2002 की वोटर लिस्ट में नहीं था. हाल ही में SIR के बाद उनका नाम 'अंडर-एज्यूडिकेशन' श्रेणी में दिखा, सामान्य मतदाता सूची में नहीं. सुनवाई में शामिल होने के बावजूद उनका नाम पूरक सूची में भी शामिल नहीं हुआ. इसके बाद से वह धीरे-धीरे डिप्रेशन में चले गए. परिवार ने बताया कि हाजरा दैनिक मजदूरी करता था. वह पिछले कुछ दिनों से ठीक से खाना नहीं खा रहा था और किसी से बात भी नहीं कर रहा था.

बीते शनिवार (28 मार्च) को हाजरा गायब हो गया. लंबे समय तक नहीं आया तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की. बाद में गांव के खेत में उसे बेहोश पाया गया. जिसके बाद उसे दुर्गापुर उप-जिला अस्पताल भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके जहर खाने की पुष्टि की. वहीं दो दिन तक चले इलाज के बाद सोमवार (30 मार्च) को उसकी मौत हो गई.

SIR के भय में घिरे थे- बेटी

मृतक की पत्नी, बृंदा हाजरा ने कहा कि उसके पति का नाम वोटर लिस्ट में नहीं आया तो वह डर में जी रहे थे. वह मुश्किल से खाते या बोलते थे. आखिर में उसने गंभीर कदम उठाया अब हमें समझ नहीं आ रहा कि क्या करें. वहीं हाजरा की बेटी दुर्गा ने कहा कि हमनें उन्हें मनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे SIR को लेकर फैले भय में पूरी तरह घिरे हुए थे.

मौत पर शुरू हुई सियातसत

इस घटना ने राजनीतिक बहस भी छेड़ दी है. दुर्गापुर पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार प्रदीप मजूमदार ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा, "अवैध प्रवासियों की पहचान के बहाने जानबूझकर भय फैलाया जा रहा है. वैध दस्तावेज रखने वाले लोगों को मौत के कगार पर धकेला जा रहा है." वहीं, भाजपा के जिला प्रवक्ता सुमंत मंडल ने इसका विरोध करते हुए कहा, "यह प्रक्रिया अन्य राज्यों में भी लागू की गई है, लेकिन वहां ऐसी कोई घटना नहीं हुई. तृणमूल कांग्रेस जनता को जानबूझकर भ्रमित कर रही है. हम सभी को आश्वस्त करते हैं कि घबराने की कोई वजह नहीं है."

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