- ममता बनर्जी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में बंगाल SIR मामले पर सुनवाई के दौरान वकीलों के साथ बैठी नजर आईं
- ममता ने कोर्ट में खुद अपनी बात रखने की अनुमति मांगी ताकि मामले के निपटारे में मदद मिल सके
- SIR के मामले पर पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग पक्षकार हैं. इसीलिए ममता बनर्जी खुद अदालत पहुंची थीं
ममता बनर्जी का बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक अलग ही रूप देखने को मिला. वह वकीलों के साथ बैठकर बंगाल SIR के मुद्दे पर अदालत में अपनी बात रखतीं नजर आईं. बंगाल सीएम सोमवार, 8 फरवरी को एक बार फिर से इसी भूमिका में नजर आएंगी. वह एसआईआर के मुद्दे पर अदालत में एक बार फिर से सरकार का पक्ष रखती नजर आएंगी.
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SIR पर ममता बनर्जी ने रखा सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की. उन्होंने चुनाव आयोग को मतदाता सूची से कोई भी नाम हटाने से रोकने और अपनी बात रखने की इजाजत मांगी थी. इस दौरान ममता ने कोर्ट से कहा कि मुझे इस केस में तथ्यों और हालात की पूरी जानकारी है. मैं एक सूबे की मुख्यमंत्री और टीएमसी पार्टी की चेयरपर्सन हूं. मैं कोर्ट के कामकाज के तरीके और अनुशासन से बखूबी वाकिफ हूं. अगर कोर्ट में मैं अपनी बात खुद रखती हूं तो कोर्ट को इस मामले के निपटारे में मदद मिलेगी. ममता ने कहा कि SIR के मुद्दे पर हमें न्याय नहीं मिल रहा है. हमारे सवालों के जवाब देने के लिए कोई भी तैयार नहीं है.
न्याय कहीं पिछले दरवाजे पर अटक गया है
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने उनसे कहा कि आपकी तरफ से पहले ही कपिल सब्बल और श्याम दीवान दलीलें रख चुके हैं. इस पर उन्होंने कहा कि जब शुरू से वकील लड़ रहे हों, रिकॉर्ड पर बार-बार बातें रखी जा रही हों, चुनाव आयोग को 6 बार लिखा गया हो और एक भी जवाब न मिले, तो यह महससू होना स्वाभाविक है कि न्याय कहीं पिछले दरवाजे पर अटक गया है.
ममता बनर्जी ने कोर्ट में कहा कि यह चुनाव आयोग नहीं, व्हाट्सएप आयोग है. यह पहली बार है जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के खिलाफ दायर अपने ही मामले में पैरवी की है. खचाखच भरे कोर्टरूम में ममता बनर्जी ने अपनी बात रखने की अनुमति मांगी. ममता बनर्जी ने कोर्ट में कहा कि चुनाव आयोग बंगाल की जनता को कुचल रहा है. पहले चरण में, 56 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए. उन्हें फॉर्म 6 जमा करने का मौका ही नहीं मिला. वह सिर्फ बंगाल को ही निशाना बना रहे हैं. बंगाल में ही उन्होंने मेक्रो-ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं.
ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचीं, SIR पर क्या हैं मांगें?
- 2025 की मतदाता सूची का उपयोग करें, 2026 के चुनावों के लिए कोई नया प्रयोग न करें
- वर्तनी की गलतियों (तार्किक विसंगति) के लिए मतदाताओं को सुनवाई में न घसीटें
- 1.4 करोड़ विवादित मतदाताओं के नाम सभी के देखने के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराएं
- विसंगति के मामलों में आधार कार्ड को पहचान के पर्याप्त प्रमाण के रूप में स्वीकार करें
- बल्क फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाताओं के सीक्रेट मास डिलीटेशन को रोकें
फिर सुप्रीम कोर्ट में दिखेंगी ममता बनर्जी
बता दें कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम इसका प्रैक्टिकल हल निकालने की कोशिश करेंगे. मामले में सोमवार को अगली सुनवाई होगी. इस दौरान ममता बनर्जी एक बार फिर से अदालत में नजर आएंगी.
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