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महाराष्ट्र में 13 साल में मिलीं 91 हजार से ज्यादा लापता लड़कियां, 'प्यार-मोहब्बत' निकली घर छोड़ने की सबसे बड़ी वजह

महाराष्ट्र में पिछले 13 साल में 91 हजार से ज्यादा लापता लड़कियों को सुरक्षित खोज निकाला है. सीएम देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में यह आंकड़े पेश किए.

महाराष्ट्र में 13 साल में मिलीं 91 हजार से ज्यादा लापता लड़कियां, 'प्यार-मोहब्बत' निकली घर छोड़ने की सबसे बड़ी वजह
  • पिछले 13 साल में महाराष्ट्र से गायब हुई 91000 से ज्यादा लड़कियों को पुलिस ने सुरक्षित खोजा
  • 60% लड़कियां प्रेम संबंधों या अंतरधार्मिक कारणों से घर से लापता हुई थीं
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हर गुमशुदगी मामले को किडनैपिंग मानकर दर्ज की गई रिपोर्ट
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महाराष्ट्र विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक हैरान करने वाला आंकड़ा पेश किया. पिछले 13 सालों में राज्य से लापता हुई 91 हजार से ज्यादा लड़कियों को पुलिस ने सुरक्षित खोज निकाला है और उन्हें उनके परिवारों से मिला दिया है. सीएम फडणवीस ने बताया कि लगभग 60 फीसदी लड़कियां अंतरधार्मिक संबंधों सहित प्रेम प्रसंग के कारण घर से लापता हुई थीं. वहीं करीब 21% मामलों में घर छोड़ने की वजह पारिवारिक विवाद था. इसके अलावा मानसिक दबाव, पढ़ाई, बीमारी और असल अपहरण जैसे कारण भी शामिल रहे.

क्या कहते हैं गुमशुदगी के आंकड़े?

जनवरी 2012 से दिसंबर 2025 के बीच राज्य में कुल 1 लाख 37 हजार 211 लड़के-लड़कियां लापता हुए थे, जिनमें से 1 लाख 31 हजार 737 को ढूंढ लिया गया है. इनमें करीब 95 हजार लड़कियां शामिल थीं, जिनमें से 91 हजार से अधिक को ट्रेस कर घर वापस भेज दिया गया है.

पुलिस ने कैसे किया मुमकिन?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार हर गुमशुदगी के मामले को किडनैपिक मानकर दर्ज किया गया, जिससे पुलिस की जांच और रिस्पॉन्स में काफी तेजी आई. इसके अलावा, सरकार ने स्पेशल सेल बनाए और पुलिस स्टेशनों की ट्रैकिंग क्षमता सुधारने के लिए उनके लिए एक खास रैंकिंग सिस्टम भी शुरू किया.

महिलाओं को अपनों से ही सबसे ज्यादा खतरा

महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर बात करते हुए सीएम ने बताया कि 99% रेप केस सुलझा लिए गए हैं. लेकिन सबसे डराने वाली बात यह है कि 99.31% मामलों में आरोपी कोई और नहीं, बल्कि पीड़िता के जान-पहचान वाले ही थे. पुलिस ने ऐसे 92% मामलों में चार्जशीट दाखिल कर दी है.

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नए कानूनों से आया बड़ा बदलाव

ब्रिटिश काल के कानून IPC की जगह भारतीय न्याय संहिता BNS के लागू होने से न्याय प्रक्रिया में गजब की तेजी आई है. अब समन भेजने और बयान दर्ज करने जैसी 84% प्रक्रियाएं पूरी तरह डिजिटल हो चुकी हैं. 10 साल तक की सजा वाले मामलों में 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की दर जो पहले 2-3% थी, वह अब बढ़कर 46% हो गई है. 2012-13 में जहां अपराधियों को सजा दिलाने की दर महज 9% के आसपास थी, वह नए कानूनों के तहत बढ़कर 78% हो गई है.

महाराष्ट्र के साइबर क्राइम प्रोजेक्ट को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है. हालांकि सीएम ने माना कि विदेशों में भेजे गए धोखाधड़ी के पैसों की रिकवरी अब भी एक बड़ी चुनौती है क्योंकि उन देशों से सीमित सहयोग ही मिल पाता है। वहीं 2024 और 2025 के बीच राज्य में लूट, डकैती और छेड़छाड़ जैसे अपराधों में कमी आई है, लेकिन हत्या के प्रयास, अपहरण और ड्रग्स से जुड़े मामलों में इजाफा दर्ज किया गया है.

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