महादेव बेटिंग केस: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप और स्काई एक्सचेंज से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है. जांच एजेंसी ने करीब 940.77 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है. ED के मुताबिक ये संपत्तियां कारोबारी विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनके नियंत्रण वाली विभिन्न कंपनियों से जुड़ी हुई हैं. इस कार्रवाई को अब तक की जांच में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
किन संपत्तियों पर हुई कार्रवाई?
ED द्वारा अटैच की गई संपत्तियों में कई महंगी आवासीय संपत्तियां, जमीन के बड़े टुकड़े, कंपनियों के शेयर और अन्य वित्तीय निवेश शामिल हैं. एजेंसी का कहना है कि इन संपत्तियों का संबंध उस धन से है जिसे अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के जरिए अर्जित किया गया था. जांच के दौरान मिले दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर यह कार्रवाई की गई है.
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कई राज्यों में दर्ज मामलों से शुरू हुई जांच
इस पूरे मामले की जांच की शुरुआत छत्तीसगढ़ के दुर्ग में दर्ज एफआईआर से हुई थी. इसके अलावा छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में दर्ज अन्य मामलों को भी जांच का आधार बनाया गया. इन मामलों में ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म चलाने वाले ऑपरेटरों, प्रमोटरों और उनके सहयोगियों पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
विदेश से चल रहा था सट्टेबाजी का नेटवर्क
ED की जांच में सामने आया है कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काई एक्सचेंज से जुड़ा यह नेटवर्क विदेश से संचालित किया जा रहा था. एजेंसी के अनुसार फ्रेंचाइजी आधारित "पैनल सिस्टम" के जरिए देशभर में इसका विस्तार किया गया. इस नेटवर्क के माध्यम से हर महीने 450 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की जा रही थी. जांच एजेंसी का दावा है कि यह देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क में से एक है.
शेल कंपनियों के जरिए लगाया गया काला धन
जांच के दौरान यह भी पता चला कि अवैध सट्टेबाजी से कमाए गए धन को वैध दिखाने के लिए शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया. नकदी के बदले फर्जी एंट्रियां कराई गईं और कई स्तरों वाले वित्तीय लेनदेन के जरिए पैसों के वास्तविक स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई.
ED के अनुसार इसी प्रक्रिया के माध्यम से करीब 940.77 करोड़ रुपये विकास गर्ग के नियंत्रण वाली कंपनियों तक पहुंचाए गए. बाद में इन पैसों का इस्तेमाल शेयर, सिक्योरिटीज और अन्य संपत्तियां खरीदने में किया गया.
3,800 करोड़ रुपये तक पहुंची कार्रवाई
ED ने बताया कि इस मामले में अब तक सात प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं. इसके साथ ही विशेष PMLA अदालत रायपुर में कई अभियोजन शिकायतें और चार्जशीट दाखिल की गई हैं जिन पर अदालत संज्ञान भी ले चुकी है. ताजा कार्रवाई से पहले एजेंसी लगभग 2,825 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज कर चुकी थी. अब 940 करोड़ रुपये से अधिक की नई कार्रवाई के बाद इस मामले में अटैच, जब्त और फ्रीज की गई कुल संपत्तियों का मूल्य करीब 3,800 करोड़ रुपये हो गया है.
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