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10-10 रुपए के सिक्कों से खरीदी स्प्लेंडर बाइक, 4 घंटे तक गिनती करते रहे शो-रूम के स्टाफ, VIDEO

हर दिन की लगातार की जा रही छोटी बचत कितने फायदे की चीज होती है, इसका एक उदाहरण सामने आया है. 2017 से एक परिवार 10-10 रुपए के सिक्के जमा कर रहा था. अब इस परिवार ने 1.10 लाख रुपए की बाइक 10-10 रुपए के सिक्कों से खरीद ली है.

10-10 रुपए के सिक्कों से स्प्लेंडर बाइक की खरीद.
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  • तेलंगाना के कोंडे रघुपति ने 10 रुपए के सिक्कों से 1.10 लाख की हीरो स्प्लेंडर बाइक खरीदी.
  • रघुपति और उनके परिवार ने 2017 से लगातार 10 रुपए के सिक्के जमा कर इस बाइक को खरीदने का लक्ष्य रखा.
  • शोरूम के पांच कर्मचारियों ने लगभग चार घंटे तक सिक्कों की गिनती और सत्यापन किया.
हैदराबाद:

बूंद-बूंद से तालाब भरता है. इस कहावत को तेलंगाना के एक शख्स ने चरितार्थ किया है. यहां कोंडे रघुपति नामक एक शख्स ने 10-10 रुपए के सिक्कों से स्प्लेंडर बाइक खरीदी. जब रघुपति सिक्कों से भरी थैली लेकर शो-रूम पहुंचे तो पहले तो स्टाफ ने हिचकिहाट दिखाई. लेकिन बाद में शो-रूम मालिक ने सिक्कों से बाइक खरीदने की रघुपति की चाहत की पूरी किया. अब यह खरीद सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. दरअसल तेलंगाना के यादाद्रि भुवनगिरि जिले के कोंडे रघुपति ने 10-10 रुपए के सिक्कों से बाइक खरीदकर सुर्खियां बटोरी हैं.

1.10 लाख रुपए की खरीद 10-10 के सिक्कों से

चित्याल मंडल के वेलिमिनेडु गांव निवासी कोंडे रघुपति ने श्री विनायका मोटर्स से हीरो स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल 1.10 लाख रुपये में खरीदी और इसकी पूरी राशि 10 रुपये के सिक्कों से भरे बैगों के जरिए अदा की. भुगतान का यह अनोखा तरीका शोरूम कर्मचारियों के लिए हैरानी का कारण बना और देखते ही देखते यह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया. 

2017 से जमा कर रह रहे थे सिक्के

सालों की बचत और बाइक खरीदने के परिवार के संकल्प ने लोगों की सराहना हासिल की है. रघुपति ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ मिलकर वर्ष 2017 से इन सिक्कों को जमा करना शुरू किया था. उनका लक्ष्य एक दिन बाइक खरीदना था. 10 रुपये के सिक्कों के वैध मुद्रा न होने संबंधी अफवाहों के बावजूद उन्होंने उन्हें स्वीकार करना और बचाना जारी रखा, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि उनकी लगातार मेहनत एक दिन रंग लाएगी.

5 स्टाफ ने 4 घंटे में पूरी की गिनती

शोरूम में उस समय दिलचस्प नजारा देखने को मिला जब सिक्कों से भरे बैग लाए गए और उन्हें गिनने के लिए फर्श पर फैलाया गया. यह नजारा देखने के लिए स्थानीय लोग भी जुट गए. करीब पांच कर्मचारियों ने लगभग चार घंटे तक सिक्कों की गिनती और सत्यापन किया, जिसके बाद बिक्री प्रक्रिया पूरी हुई और राघुपति को मोटरसाइकिल सौंप दी गई.

लोगों में चर्चा की वजह बनी यह खरीदी

शोरूम के मालिक उप्पु मधु ने बताया कि रघुपति ने पहले ही उन्हें सिक्कों में भुगतान करने की जानकारी दे दी थी. कर्मचारियों को शुरुआत में गिनती में लगने वाले समय को लेकर चिंता थी, लेकिन रघुपति की लगन और समर्पण को देखकर उन्होंने भुगतान स्वीकार करने का फैसला किया. यह घटना अब स्थानीय स्तर के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है. लोग परिवार की बचत की आदत, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रशंसा कर रहे हैं.

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