नई दिल्ली: घर पर 2 बार बिजली कड़के तो मतलब घर के किसी करीबी के द्वारा गलत काम या रेप करने से जुड़ी घटना का इशारा है. यह सोचने और पढ़ने में थोड़ा सा अजीब लगेगा. पर यह एक हकीकत से जुड़ा हुआ है. दरअसल, मेघालय में खासी समुदाय के लोग रहते हैं. घर पर बिजली कड़कने पर किसी गंदे काम की ओर इशारे की उनकी ही मान्यता है. इसी मान्यता की मदद से एक 16 साल की लड़की के साथ दरिंदगी करने वाला जेल के सलाखों के पीछे पहुंच गया. कोर्ट में ट्रायल के दौरान दरिंदे के खिलाफ उसी की मां ने कटघरे में खड़े होकर गवाही दी. यह मामला उस समय सुर्खियों में आया, जब 18 मई को मेघालय हाईकोर्ट ने दरिंदगी करने वाले बांतेइलांग सोहशांग की अपील को खारिज कर दिया. चीफ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगदोह के फैसले से 16 साल की लड़की के साथ बार-बार रेप करने के जुर्म में सोहशांग को कोर्ट से मिली 10 साल की सजा का हर दिन जेल में बिताना होगा.
2016 में नाबालिग लड़की संग हुई थी दरिंदगी
जानकारी के अनुसार, पीड़ित लड़की मार्च और जुलाई 2016 के बीच अपनी मौसी के घर पर रही. उसी दौरान उसके मौसी के लड़के बांतेइलांग सोहशांग ने उसके साथ कई बार रेप किया. सोहशांग ने लड़की को धमकी दी थी कि अगर किसी को बताया तो जान से हाथ धो बैठेगी. इसी वजह से वह चुप रही, लेकिन यह चुप्पी तब तक बनी रही जब तक आसमान नहीं फट पड़ा. उसी साल मई में जब सोहशांग के घर पर दो बार बिजली गिरी तो सोहशांग की अपनी मां ही उससे पूछताछ करने लगी. आखिरकार उसने अपनी मां के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया. उसने मान लिया कि वह उस लड़की के साथ ज़्यादती कर रहा था.
कोर्ट में खड़े होकर बेटे के खिलाफ मां ने दी गवाही
इसके बाद मां ने अपने बेटे को बचाने के बजाय लड़की की बुआ को पूरे घटना की बारे में जानकारी दी और फिर बात लड़की की मां तक पहुंच गई. बाद में परिवार के बड़े-बुज़ुर्गों की बैठक में परंपराओं के उस दायरे के अंदर कोई हल नहीं निकल पाया. अंत में मामला पुलिस तक जा पहुंचा. जब यह मामला ट्रायल के लिए अदालत में पहुंचा तो मां अपने बेटे के खिलाफ गवाही देने के लिए खड़ी हो गई. कोर्ट में सुनवाई के दौरान दरिंदे सोहशांग ने तर्क दिया कि यह रिश्ता दोनों की मर्ज़ी से बना था. हालांकि, हाईकोर्ट ने उसकी अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया.
ध्यान देने वाली बात है कि पीड़ित लड़की नाबालिग थी और उसने कोर्ट में साफ-साफ कहा कि उसके साथ जो कुछ भी हुआ, वह सब ज़बरदस्ती किया गया था. जिरह के दौरान भी वह एक बार भी नहीं घबराई. मेडिकल सबूत, पीड़ित लड़की के बयान और एक के बाद एक गवाहों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पॉक्सो कोर्ट द्वारा 2021 में सोहशांग को दोषी ठहराए जाने के फ़ैसले को बरकरार रखा. पॉक्सो कोर्ट ने सोहशांग को नाबालिग लड़की के साथ रेप का दोषी मानते हुए 10 साल की जेल की सज़ा और 30,000 रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया था.
हाईकोर्ट ने पीड़ित लड़की को उसके पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए 50,000 रुपये का मुआवज़ा दिए जाने के फैसले को भी बरकरार रखा. यह मुआवज़ा 'मेघालय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण' के माध्यम से दिया जाएगा. अब 'पश्चिम खासी हिल्स' के 'ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण' को छह हफ़्तों के भीतर अदालत के सामने इस भुगतान का सबूत पेश करना होगा.
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