विज्ञापन

कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ी, सेना जॉइन की… अब देशभर में दौड़ रहे मेजर नायडू

मेजर ए. शरद नायडू ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर सेना जॉइन की और अब तक 32 राज्यों में 46 हाफ मैराथन दौड़ चुके हैं. उनका लक्ष्य 50 वर्ष से पहले पूरे देश में दौड़ पूरी करना है.

कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ी, सेना जॉइन की… अब देशभर में दौड़ रहे मेजर नायडू
नई दिल्ली:

भारतीय सेना के अधिकारी मेजर ए. शरद नायडू इन दिनों अपने एक अनोखे मिशन को लेकर सुर्खियों में हैं. 39 साल की उम्र में कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर सेना में शामिल हुए मेजर नायडू अब देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में हाफ मैराथन दौड़ने का लक्ष्य पूरा कर रहे हैं. वह अब तक 46 हाफ मैराथन पूरी कर चुके हैं और 32 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में दौड़ लगा चुके हैं.

मेजर नायडू वर्तमान में 107 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी) से जुड़े हैं. सेना में शामिल होने से पहले उनके पास कॉर्पोरेट जगत में 12 साल से अधिक का अनुभव था. मैकेनिकल इंजीनियरिंग और एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर सेना और देश सेवा का रास्ता चुना.

'50 साल से पहले पूरा देश दौड़कर देखना है'

मेजर नायडू ने साल 2022 में अपने लिए एक लक्ष्य तय किया. 50 वर्ष की उम्र से पहले भारत के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में हाफ मैराथन पूरी करनी है. इस मिशन की शुरुआत मिजोरम के वैरेंगटे में एक सोलो रन से हुई, जिसने उनके सफर को एक नई दिशा दी. पिछले एक साल में ही वह उत्तर, पूर्वोत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत में 14 हाफ मैराथन पूरी कर चुके हैं.

यह भी पढ़ें- LPG की कालाबाजारी पर सरकार का सख्त एक्शन, 24 घंटे में 3,400 छापे, 1,000 सिलेंडर जब्त

मेजर नायडू कहते हैं, 'मेरा उद्देश्य मेडल जीतना नहीं है. मैं भारत को समझना चाहता हूं, उसकी संस्कृति, लोग और उनका जीवन. हर राज्य मुझे कुछ नया सिखाता है. मेरा लक्ष्य ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत' को जीना है.'

अब मिशन के अंतिम चरण में

मेजर नायडू अभी तक 36 में से 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश कवर कर चुके हैं. अब उन्हें हिमाचल प्रदेश, केरल, लक्षद्वीप और लद्दाख में दौड़ लगानी बाकी है. सेना की जिम्मेदारियों के बीच समय निकालकर वह अपने मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं. वह ड्यूटी, ट्रेनिंग और अपनी फिटनेस दिनचर्या को संतुलित करते हुए अलग‑अलग राज्यों में जाकर हाफ मैराथन पूरी करते हैं. उनका कहना है कि हर दौड़ उनके लिए 'एक नया अनुभव और सीख' होती है.

यह भी पढ़ें- सेना में महिलाओं को मिलेगा परमानेंट कमीशन, अब तक नहीं मिलता था पूरी नौकरी का मौका, जानें- क्या था पूरा मामला और अब क्या बदलेगा

दृढ़ता और समर्पण की मिसाल

कॉर्पोरेट करियर छोड़कर सेना का रास्ता चुनना और फिर पूरे देश में दौड़ लगाने का लक्ष्य तय करना. मेजर नायडू का सफर दृढ़ता, अनुशासन और निरंतरता का प्रतीक है. उनका यह मिशन भारतीय सेना के मूल्यों, कर्मठता, समर्पण और देशभक्ति का एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करता है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Indian Army, Army Parade, Inspirational Story, Indian Army Jobs
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com