राज्यसभा में गुरुवार को एंटी पेपर लीक बिल केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पेश किया. चर्चा में भाग लेते हुए राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पुराने और नए कानून में कोई अंतर नहीं है. सिर्फ आंकड़ों का अंतर है. सिर्फ ज्यादा सजा, ज्यादा जुर्माना से कुछ नहीं बदलेगा. सरकार ने 2024 में जल्दबाजी में ये कानून लाई थी. जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत जोड़ो आंदोलन के समय से युवाओं का मुद्दा उठा रहे हैं.सिर्फ हालात को शांत करने के लिए सरकार ये बिल लाई है.
उन्होंने कहा कि पेपर लीक बिल अभी भी अधूरा है. जो अब कर रहे हैं, वो 2024 में क्यों नहीं किया. सरकार पेपर लीक पर नहीं जागती अगर युवाओं ने आंदोलन नहीं किया होता. युवाओं को धन्यवाद है कि उन्होंने सरकार को झुकने को मजबूर किया. सरकार को लगा कि अगर उन्होंने युवाओं की बात नहीं मानी तो हालात बेकाबू हो जाएंगे. सरकार ने डर के आखिरकार उनकी मांगें मान लीं. उन्हें डर था कि कहीं कुर्सी चली जाएगी.
जनता के दबाव में सरकार झुक गई. जब छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे, तब सरकार ने क्यों बातचीत नहीं की. सरकार की वजह से ये स्थिति आई. सरकार ने छात्रों को अराजक कहा. गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर बोल नहीं रहे हैं. कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर शाह क्यों नहीं खुलकर बोल रहे हैं. देश की भलाई के लिए बोलना चाहिए. गृह मंत्री सदन में नहीं दिख रहे हैं. प्रधानमंत्री भी नहीं बोल रहे हैं. सरकार को ये बताना चाहिए कि पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया. बिहार में छात्रों पर एके-47 से गोलियां चलाई गईं. प्रदर्शन करने वाले छात्र थे, आतंकी नहीं थे.
छात्र संसद की ओर शांतिपूर्वक मार्च निकालना चाहते थे, लेकिन बदले में उन्हें लाठी, पेलेट गन, आंसू गैस के गोले मिले. सरकार हालात को संभाल नहीं सकी. छात्रों ने सरकार को सबक सिखाया है. मेट्रो स्टेशन तक बंद कर दिए गए. किसी का हाथ पैर टूटा और किसी को और चोट आई.
खड़गे ने कहा कि परीक्षा प्रणाली नहीं बदली, एनटीए में बदलाव नहीं हुआ तो फिर से कुछ महीनों बाद कोई पेपर लीक होगा. जब आंदोलन चल रहा था, तब सरकार ने संवाद क्यों नहीं किया. छात्रों को पीटने वाले सादे कपड़ों में कौन लोग थे. प्रधानमंत्री को संसद में आकर बयान देना चाहिए. इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान का स्वागत क्यों हुआ. ये सरकार नाकामियों का उत्सव मनाती है. पश्चाताप करने की जगह ये लोग जश्न मना रहे हैं. छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए. 2016 से ही ही नीट में गड़बड़ी के आरोप थे, लेकिन एक्शन नहीं लिया गया. पेपर लीक में संजीव मुखिया को क्लीन चिट कैसे मिली है. कम से कम 152 पेपर लीक पिछले एक दशक में हुए हैं.
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