- भारत सरकार ने लद्दाख के हानले गांव को डार्क स्काई रिजर्व घोषित कर रात के साफ आकाश को संरक्षित किया है
- डार्क स्काई रिजर्व में कृत्रिम रोशनी को सीमित कर तारे, नक्षत्र और आकाशीय पिंडों को देखा जा सकता है
- पर्यटक और स्थानीय लोग हानले के साफ आसमान और स्टारगेजिंग अनुभव को देखकर मंत्रमुग्ध होकर इसकी प्रशंसा करते हैं
हर जगह की एक खासियत होती है. लद्दाख के एक गांव की खासियत है कि वहां से रात में आसमान सबसे साफ दिखता है. भारत सरकार ने इसके महत्व को समझा और बना दिया 'डार्क स्काई रिजर्व '. अब आप सोचेंगे ये क्या बला है तो आपको बता दें कि डार्क स्काई रिजर्व एक ऐसा विशेष रूप से सुरक्षित क्षेत्र होता है जहां आर्टिफिशियल लाइट यानी लाइट पॉल्यूशन को बहुत कड़े नियमों के तहत नियंत्रित किया जाता है. तो इससे क्या फायदा? यही सोच रहे होंगे आप, तो इसका फायदा ये है कि इससे रात के प्राकृतिक अंधेरे को बचाया जाता है ताकि तारे, नक्षत्र, गैलेक्सी और अन्य आकाशीय पिंड पूरी तरह से साफ और चमकीले दिखाई दे सकें.

डार्क स्काई रिजर्व का एक मनमोहक दृश्य
कतार में खड़े रहते हैं लोग
रात के समय इस गांव में जाने पर कुछ-कुछ ऐसा फील होता है कि आप ब्रह्रांड को देख रहे हैं. इस गांव का नाम हानले है और ये लद्दाख में है. हानले में रात के समय आसमान देखने पर लगता है कि वहां तारों का समंदर है. घने अंधेरे में लोग इस नजारे को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. भारत के पहले इस 'डार्क स्काई रिज़र्व'से ब्रह्मांड का साफ नजारा दिखता है. जैसे ही शाम होती है और 4500 मीटर की ऊंचाई पर बसे हानले गांव में अंधेरा छा जाता है, तो ऐसा लगता है मानो आसमान बिल्कुल पास आ गया हो. आसमान की खूबसूरती देखने के लिए कृत्रिम रोशनी को सीमित रखा जाता है और सैकड़ों लोग खगोल विज्ञान का नजदीक से अनुभव करने के लिए कतार में खड़े रहते हैं.

डार्क स्काई रिजर्व से ऐसी दिखती है गैलेक्सी
तारों, ग्रहों और दूर के खगोलीय अजूबों को देखने में मदद करने के लिए यहां 24 एस्ट्रो-एम्बेसडर्स हैं. इससे भी खास बात ये है कि इनमें से 18 महिलाएं हैं. टेलीस्कोप से लैस ये महिलाएं प्रकृति प्रेमियों को ऐसा अनुभव करने में मदद कर रही हैं, जो भारत में किसी और जगह मुमकिन नहीं है. पिछले दो सालों से, ये आम लोगों तक ब्रह्मांड का ज्ञान और अनुभव पहुंचा रही हैं.खगोलीय रिसर्च के अलावा, यह पहल एस्ट्रो-टूरिज़्म को भी बढ़ावा दे रही है. इसकी वजह से हानले में होमस्टे और गेस्टहाउस खुल गए हैं. जिन महिलाओं के पास कुछ साल पहले तक कमाई का कोई जरिया नहीं था, वे अब महीने में एक से दो लाख रुपये कमा रही हैं. होमस्टे चलाने वाली आंग्मो अपनी किस्मत को धन्यवाद दे रही हैं, क्योंकि हानले में एस्ट्रो-टूरिज़्म ने उनकी जिंदगी बदल दी है. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि आसमान उन्हें महीने में 1.5 लाख रुपये कमाने में मदद करेगा.
पर्यटकों और स्थानीय लोगों की जुबानी कहानी
एक अन्य महिला रिग्ज़िन वांग्मो बताती हैं, "इसने लोगों की जिंदगी में बहुत बड़ा बदलाव लाया है. पहले हानले में सिर्फ मिट्टी के घर हुआ करते थे. अब हालात बदल गए हैं और हर तरफ कंक्रीट के घर दिखते हैं. ऑब्ज़र्वेटरी की वजह से विकास हो रहा है और बहुत कुछ हो रहा है." नोएडा के रहने वाले और प्रकृति प्रेमी रवि सिंह कहते हैं कि तारों को इतनी करीब से देखकर उन्हें अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ. इस शानदार अनुभव को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. रवि सिंह ने बताया, "हम खास तौर पर तारे देखने (स्टारगेज़िंग) के लिए हानले आए थे. वहां कुछ छात्र थे, जिन्होंने सभी टेलीस्कोप लगाए थे, और हम एंड्रोमेडा, मिल्की वे, नेपच्यून वगैरह देख पाए. हमने जो कुछ भी देखा, वह मंत्रमुग्ध कर देने वाला था, मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था. यह नजारा इतना साफ है. मैंने कुछ तस्वीरें भी लीं. मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता, आपको खुद यहां आकर इसे देखना होगा." स्टारगेजिंग ने सचमुच हानले की तस्वीर बदल दी है. गांव के जो लोग पहले खानाबदोश जीवन जीते थे, वे अब एस्ट्रो-एम्बेसडर बन गए हैं और आसमान और पर्यटकों के बीच एक कड़ी का काम कर रहे हैं.
यह भी पढ़ें-
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं