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This Article is From Nov 23, 2024

झारखंड में NDA क्यों हुआ पस्त? इन 3 वजहों से 'INDIA' गठबंधन को मिली जीत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा जैसे शीर्ष भाजपा नेताओं ने आक्रामक तरीके से प्रचार किया, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने किसी को भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं किया,

झारखंड में NDA क्यों हुआ पस्त? इन 3 वजहों से 'INDIA' गठबंधन को मिली जीत
रांची:

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राजग ने झारखंड की सत्ता झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाले गठबंधन के हाथों से छीनने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी लेकिन उसे अंतत: हार का सामना करना पड़ा. इस पराजय से हतप्रभ नेता और कार्यकर्ता यह सोच रहे हैं कि आखिर गड़बड़ी क्या हुई.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा जैसे शीर्ष भाजपा नेताओं ने आक्रामक तरीके से प्रचार किया, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने किसी को भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं किया, क्योंकि उसका अभियान मुख्य रूप से ‘बांग्लादेश से घुसपैठ' और हेमंत सोरेन सरकार के ‘भ्रष्टाचार' पर केंद्रित था.

भाजपा नेताओं ने लगभग 200 जनसभाओं को संबोधित किया जिनमें शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लगभग दो दर्जन जनसभाएं शामिल थीं. उन्होंने झारखंड की राजधानी रांची में विशाल रोड शो भी किया जिसमें भारी भीड़ उमड़ी.

राजग जिन 81 सीट पर चुनाव लड़ी उनमें से बमुश्किल 24 पर आगे चल रही है. भाजपा ने 68 सीट पर चुनाव लड़ा था जबकि 10 सीट पर चुनाव लड़ने वाली उसकी सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) पार्टी का लगभग सफाया हो गया है.

‘एग्जिट पोल' के विपरीत हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने जिन 43 सीट पर चुनाव लड़ा उनमें से 34 सीट पर जीत या बढ़त बनाकर बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है.

राज्य भाजपा के एक सूत्र ने दावा किया कि चुनाव में एक आदिवासी मुख्यमंत्री का चेहरा पेश न करना उसे महंगा पड़ा.एक अन्य नेता ने दावा किया कि पूरा शो ‘बाहर से आए दो नेताओं' द्वारा चलाया गया था और राज्य भाजपा ने अपने लोगों को नजरअंदाज करके दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट दिया.

भाजपा के मौजूदा विधायक केदार हाजरा पूर्व मंत्री लुईस मरांडी के साथ चुनाव से ठीक पहले पार्टी नेताओं पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए झामुमो में शामिल हो गए.

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. बागीश चंद्र वर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि भाजपा अपने पूरे अभियान के दौरान जनता से जुड़े जमीनी मुद्दों को उठाने में विफल रही और पार्टी का अभियान राष्ट्रीय मुद्दों और ‘घुसपैठ' पर केंद्रित था जिससे ग्रामीण जनता जुड़ने में विफल रही.

रांची विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष वर्मा ने कहा कि झामुमो के पारंपरिक वोट बैंक (मुस्लिम, ईसाई और आदिवासी) में महिलाओं को ‘मंईयां सम्मान योजना' जैसी योजनाओं के जरिये जोड़ा गया. ‘मंईयां सम्मान योजना' के तहत 18-50 वर्ष की महिलाओं को मौजूदा सहायता राशि 1000 रुपये के बजाय 2,500 रुपये प्रति माह करने का वादा किया गया था. झारखंड की 81 विधानसभा सीटों में से 68 पर महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है.

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) ने भी चंदनकियारी सीट की तरह भाजपा और आजसू पार्टी को नुकसान पहुंचाते हुए वोटों का एक बड़ा हिस्सा हासिल कर लिया.

चंदनकियारी विधानसभा क्षेत्र में नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी न केवल झामुमो के उमाकांत रजक से हार गए, बल्कि तीसरे स्थान पर रहे. भाजपा ने 68 सीट पर चुनाव लड़ा जबकि इसके सहयोगी आजसू ने 10 और जदयू ने दो और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने एक सीट पर चुनाव लड़ा.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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