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This Article is From Mar 27, 2026

सोशल मीडिया के लिए KYC जरूरी हुआ तो कौन-कौन से डॉक्युमेंट दिखाने पड़ सकते हैं?

संसदीय समिति का कहना है कि सोशल मीडिया पर एक बार KYC पर्याप्त नहीं होगा. नियम लागू हुआ तो आपको समय-समय पर सोशल मीडिया पर वेरिफिकेशन कराना पड़ सकता है.

सोशल मीडिया के लिए KYC जरूरी हुआ तो कौन-कौन से डॉक्युमेंट दिखाने पड़ सकते हैं?
  • संसदीय समिति ने सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स, ऑनलाइन गेमिंग के लिए KYC अनिवार्य बनाने की सिफारिश की है
  • भारत में अभी 50 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर वाले सोशल मीडिया को अकाउंट वेरिफिकेशन कराना होता है
  • भारत में KYC का जो सिस्टम बैंकों और टेलिकॉम में लागू है, उसमें सरकार से जारी पहचान पत्र दिखाने होते हैं

भारत में करोड़ों लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. हर छोटी-बड़ी घटना या जानकारी ऑनलाइन शेयर करते हैं. इसके खतरों को देखते हुए एक संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि भारत में सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स और ऑनलाइन गेमिंग के लिए KYC को अनिवार्य बना दिया जाना चाहिए. सवाल ये है कि इस केवाईसी के लिए कौन से दस्तावेजों की जरूरत होगी. 

वेरिफिकेशन अभी भी, लेकिन तरीका अलग

भारत में आईटी रूल्स 2021 के तहत नियम है कि 50 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स या इंटरमीडियटरी को यूजर्स का अकाउंट वेरिफिकेशन कराना जरूरी होता है. ये वेरिफिकेशन अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक (voluntary) होता है. इसकी पुष्टि किसी भारत में एक्टिव किसी मोबाइल फोन के जरिए करानी होती है. 

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समिति का सुझाव, अनिवार्य KYC हो

संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि वेरिफिकेशन के इस प्रोसेस को आगे ले जाया जाना चाहिए और इस वेरिफिकेशन को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए. साथ ही वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को डेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म पर भी लागू किया जाना चाहिए, जिन पर अभी कोई वेरिफिकेशन नहीं करना होता है. 

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बैंकों की तरह हो सकता है KYC

संसदीय समिति ने सोशल मीडिया के लिए KYC की कोई खास प्रक्रिया तो नहीं बताई, लेकिन भारत में KYC का जो सिस्टम बैंकों और टेलिकॉम सेक्टर में लागू है, उसमें लोगों को सरकार से जारी पहचान पत्र सबमिट करने होते हैं. इनमें आधार और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज शामिल हैं. बिना KYC के इन सेवाओं का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होती है. हो सकता है कि इसी तरह की प्रक्रिया सोशल मीडिया के लिए भी लागू की जाए.

एक बार KYC काफी नहीं होगा

संसदीय समिति का कहना है सोशल मीडिया पर एक बार वेरिफिकेशन पर्याप्त नहीं होगा. रिपोर्ट में पीरियोडिक री-वेरिफिकेशन का सुझाव दिया गया है. मतलब अगर नियम लागू हुआ तो आपको समय-समय पर सोशल मीडिया पर अपना केवाईसी वेरिफिकेशन कराना पड़ सकता है. हालांकि ये गौर करने की बात होगी कि सरकारी पहचान पत्रों से सोशल मीडिया पर केवाईसी और प्राइवेसी के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाएगा.

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पहले भी दिया गया था सुझाव

आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं है, जब सोशल मीडिया के लिए केवाईसी वेरिफिकेशन कराने का सुझाव दिया गया है. 2023 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बच्चों के यौन शोषण संबंधित एडवाइजरी में सुझाव दिया था कि सोशल प्लेटफॉर्म्स को केवाईसी कंप्लायंस बनाया जाना चाहिए. 

कितने लोग चलाते हैं सोशल मीडिया

DataReportal की मानें तो भारत में 50 करोड़ से अधिक लोग यूट्यूब का इस्तेमाल करते हैं. फेसबुक के 40.3 करोड़ यूजर हैं जबकि इंस्टा यूज करने वालों की संख्या 48.1 करोड़ को पार कर चुकी है. स्नैपचैट के भी 21.3 करोड़ यूजर बताए जाते हैं. एलन मस्क के प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) के 22 लाख यूजर हैं. रिसर्च कंपनी Esya Centre की 2023 की रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत में लोग हर दिन औसतन 3.2 घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं. 

दुनिया के कई देशों में सोशल मीडिया को बच्चों के लिए सीमित करने की मांग उठ रही है. ऑस्ट्रेलिया ने तो इसे लेकर 2024 में कानून तक बना दिया है, जिसमें सोशल मीडिया के लिए उम्र आधारित वेरिफिकेशन का प्रावधान किया गया है. यूके भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है. भारत में भी कई बार इस तरह की मांग उठ चुकी है. 

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