- महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए यह सिफारिश की गई है
- संसदीय समिति की अगर सिफारिश मानी गई तो KYC कराना होगा जरूरी
- समिति ने सिफारिश में कहा है कि कंपनियों को नियमित अंतराल पर उपयोगकर्ताओं का KYC कराना चाहिए
अगर संसदीय समिति की सिफारिशें मानी गईं तो जल्दी ही सोशल मीडिया प्लेटफार्म के लिए केवाईसी (KYC) अनिवार्य हो सकता है. महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए यह सिफारिश की गई है. गौरतलब है कि पिछले काफी वक्त से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से नाबालिगों को दूर रखने की बात हो रही है. संसदीय समिति ने गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय को यह महत्वपूर्ण सिफारिश की है.
उम्र और पहचान की जांच की सिफारिश
संसदीय समिति के प्रस्ताव के मुताबिक,सोशल मीडिया, डेटिंग एप्स और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर केवाईसी (KYC) आधारित उपयोगकर्ता के पहचान और उम्र की जांच करने की व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है. यह सिफारिश महिलाओं के सशक्तीकरण पर संसदीय समिति द्वारा 'साइबर अपराध और महिलाओं की साइबर सुरक्षा' विषय पर प्रस्तुत की गई रिपोर्ट का हिस्सा है.
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समिति की सख्त सिफारिशें
समिति ने जोर देकर कहा है कि फर्जी प्रोफाइल और गुमनाम उत्पीड़न जैसी समस्याओं को रोकने के लिए सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अनिवार्य KYC सत्यापन होना चाहिए. समिति की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कंपनियों को नियमित अंतराल पर उपयोगकर्ताओं का पुनः सत्यापन करना चाहिए और उन खातों पर विशेष नजर रखनी चाहिए जिनकी शिकायत बार-बार की जाती है.
डेटिंग और गेमिंग एप्स के लिए भी बने नियम
इसके अलावा, डेटिंग और गेमिंग एप्स के लिए सख्त लाइसेंसिंग नियम और आयु-सत्यापन प्रोटोकॉल बनाने की मांग की गई है. ताकि महिलाओं और नाबालिगों को धोखाधड़ी या शोषण से बचाया जा सके. उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर भारी जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव है. पैनल ने अपनी रिपोर्ट में इस बात को साफ किया है कि कैसे फर्जी खातों के कारण साइबर स्टालकिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न और बिना सहमति के निजी तस्वीरों का प्रसार बढ़ रहा है.
सिफारिश पर कुछ सवाल भी
रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और पहचान की चोरी की घटनाएं अब आम हो गई हैं, जिन्हें रोकने के लिए केवाईसी के साथ-साथ शिकायतों की जांच के लिए सिस्टम बनाने की जरूरत है. इन उपायों से जहां एक ओर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग कम होगा और पहचान सुनिश्चित करना आसान होगा, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर निजता और डेटा सुरक्षा पर बहस छिड़ने की भी संभावना है.
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