भीमा कोरेगांव में आयोजित कार्यक्रम के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
नई दिल्ली:
- भीमा-कोरेगांव का आज 201वां विजय दिवस है. पिछले साल इस मौक़े पर हुई हिंसा के मद्देनज़र इस बार यहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है.
- लाखों लोगों के पहुंचने की उम्मीद को देखते हुए 5 हज़ार पुलिसकर्मियों के अलावा 2 हज़ार स्वयंसेवक, 1200 होमगार्ड, CRPF की 12 टीमें और 31 पुलिस निरीक्षक मुस्तैद हैं. सभी रास्तों की नाकेबंदी कर दी गई है.
- 500 CCTV कैमरों और 11 ड्रोन की मदद से पूरे इलाक़े की निगरानी की जा रही है. विजयस्तंभ आने वालों की गाड़ियां 8 किलोमीटर पहले रोकी जा रही हैं. पुणे शहर में भी सुरक्षा इंतज़ाम मज़बूत हैं. पूरे शहर में 1300 CCTV कैमरों से निगरानी की जा रही है.
- जिले में एक जनवरी 2018 को कोरेगांव भीमा युद्ध स्मारक के समीप हुई हिंसा की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए पुलिस ने 1200 से अधिक लोगों के खिलाफ एहितायाती कार्रवाई की है.
- पुलिस ने यहां शनिवार को बताया कि इस कार्रवाई में कुछ लोगों को क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकना और कुछ अन्य को जिला बदर करना शामिल है.
- जिन लोगों को कोरेगांव भीमा एवं आसपास के क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोका गया है उनमें दक्षिणपंथी हिन्दू नेता मिलिंद एकबोटे तथा वाम झुकाव वाले सांस्कृतिक समूह कबीर कला मंच के सदस्य शामिल हैं.
- भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद को बॉम्बे हाइकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है. हाइकोर्ट ने भीमा-कोरेगांव में रैली करने की इजाज़त नहीं दी है. हालांकि हाइकोर्ट ने कहा है कि चंद्रशेखर भीमा-कोरेगांव स्मारक स्थल जा सकते हैं.
- बीते साल साल एक जनवरी को तब हिंसा भड़क उठी थी जब लोग ईस्ट इंडिया कंपनी के बलों की पेशवा की सेना पर हुई जीत की 200वीं जयंती मनाने कोरेगांव भीमा गये थे. इस हिंसाई में एक व्यक्ति की जान भी गयी थी.
- हिंसा के मामले में कई वामपंथी विचारकों को भी देश भर से गिरफ्तार किया गया था.
- उन पर हिंसा फैलाने और पीएम मोदी की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप लगाया गया है.
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Koregaon Bhima Memorial