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सिया, सोनम, मुस्कान…क़ातिल पत्नियों की ख़बर से इतर डेटा दिखाता है बिल्कुल अलग पिक्चर!

हाल ही में कुछ मामले आए हैं, जिनके बाद महिलाओं को 'विलेन' के तौर पर पेश किया जा रहा है. लेकिन कुछ आंकड़े हैं जो मर्दों की 'हैवानियत' बयां करते हैं.

सिया, सोनम, मुस्कान…क़ातिल पत्नियों की ख़बर से इतर डेटा दिखाता है बिल्कुल अलग पिक्चर!
महिलाओं की हत्या के 60% मामलों में आरोपी पार्टनर या करीबी होता है.
  • कई महिलाओं पर पति या मंगेतर की हत्या के आरोप सामने आए हैं, जिससे महिलाओं की छवि प्रभावित हुई है
  • NCRB के अनुसार 2024 में पति या ससुराल द्वारा 1,21,166 महिलाएं हिंसा का शिकार हुईं, जिसमें दहेज हत्या भी शामिल
  • UN की रिपोर्ट कहती है कि 2024 में दुनिया में महिलाओं की हत्या के 60% मामलों में पार्टनर या रिश्तेदार आरोपी थे
नई दिल्ली:

अतुल सुभाष... सौरभ राजपूत... राजा रघुवंशी... और अब केतन अग्रवाल... साल-डेढ़ साल में सामने आए ये चंद मामले हैं, जिनमें इनकी मौत का कारण पत्नी या मंगेतर थी. अतुल सुभाष ने पत्नी निकिता पर आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली थी. सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान ने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या कर दी थी और ड्रम में भर दिया था. इंदौर के राजा रघुवंशी को पत्नी सोनम ने कथित तौर पर दोस्तों के साथ मिलकर मार डाला. वहीं, अब केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप मंगेतर सिया गोयल पर लगा है.

ये कुछ ऐसे मामले हैं, जिनके सामने आने के बाद महिलाओं को आम चर्चाओं में 'विलेन' बना दिया गया. सोशल मीडिया से लेकर गली-चौबारों तक लोग इन मामलों की चर्चा कर रहे हैं. लेकिन ये चर्चाएं तस्वीर के सिर्फ एक पहलू तक ही सीमित रह जाती हैं. असल आंकड़े पूरी कहानी बताते हैं. निकिता, मुस्कान, सोनम और सिया को लेकर हो रही इन चर्चाओं के बीच लोग उस खालिद नबी की चर्चा नहीं कर रहे हैं, जिसे 18 जून को ही पुलिस ने मुंबई से इसलिए गिरफ्तार किया, क्योंकि उस पर अपनी पत्नी रुखसार की हत्या का इल्जाम है. खालिद ने रुखसार को सिर्फ इसलिए मार डाला, क्योंकि उसे शक था कि उसकी पत्नी का किसी और के साथ चक्कर है और इसे लेकर आए दिन दोनों के बीच झगड़ा होता रहता था.

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केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप मंगेतर सिया पर लगा है.

केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप मंगेतर सिया पर लगा है.

पति या पार्टनर कितने खतरनाक?

कुछ आंकड़े हैं जो पति या पार्टनर की हैवानियत बयां करते हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि 2024 में 1,21,166 महिलाएं ऐसी थीं, जो पति या ससुराल वालों की क्रूरता का शिकार हुई थीं. 

इतना ही नहीं, देशभर में 5,811 महिलाओं की दहेज के लिए हत्या कर दी गई थी. इसका मतलब हुआ कि देश में हर दिन औसतन 16 महिलाओं की हत्या हुई.

NCRB की ही रिपोर्ट बताती है कि 2024 में देशभर में रेप के 29,536 मामले सामने आए थे. इनमें से 13,879 मामले ऐसे थे, जिनमें रेप करने वाला पूर्व पति था या लिव-इन पार्टनर था या किसी ने शादी का वादा किया था.

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मर्डर के आंकड़े भी चौंकाते हैं?

अक्सर कहा जाता है कि धोखा अपने ही देते हैं. और अगर आप महिला हैं तो आपको अपनों से धोखा मिलना लगभग-लगभग तय है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि महिलाओं के लिए जान-पहचान वाले ही सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं. पिछले साल संयुक्त राष्ट्र की 'FEMICIDES IN 2024' रिपोर्ट आई थी. इसमें अनुमान लगाया गया था कि 2024 में दुनियाभर में 83 हजार महिलाओं की हत्या हुई थी, जिनमें से 50 हजार महिलाओं की हत्या उनके पार्टनर या किसी रिश्तेदार ने की थी.

इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दुनियाभर में जितनी हत्याएं होती हैं, उनमें से 80% विक्टिम पुरुष और 20% महिलाएं होती हैं. लेकिन ज्यादातर पुरुषों की हत्या में आरोपी कोई बाहरी ही होता है. लेकिन महिलाओं के साथ ऐसा नहीं है. ज्यादातर महिलाओं की हत्या घर के दायरे में और जान-पहचान के लोग ही करते हैं.

UN की रिपोर्ट बताती है कि 2024 में जितनी महिलाओं की हत्या हुई, उनमें से 50 हजार यानी लगभग 60% में आरोपी उनका पार्टनर या रिश्तेदार था. इसका मतलब हुआ कि हर दिन 137 या हर 10 मिनट में एक महिला की हत्या उसके पार्टनर या किसी रिश्तेदार ने कर दी.

रिपोर्ट कहती है कि कुल मिलाकर, 2024 में 60% महिलाओं की हत्या में उनके पार्टनर या करीबी का हाथ था. जबकि सिर्फ 11% पुरुषों की हत्या उनकी पार्टनर या किसी रिश्तेदार ने की थी.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पार्टनर या किसी रिश्तेदार के हाथों सबसे ज्यादा महिलाओं की मौत अफ्रीका में होती है. दूसरे नंबर पर एशिया है. 2024 में अफ्रीका में 22,600 और एशिया में 17,400 महिलाओं की हत्या उनके पार्टनर या किसी रिश्तेदार ने की थी.

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और हिंसा का तो जवाब नहीं!

NCRB के मुताबिक, 2024 में देशभर में घरेलू हिंसा कानून के तहत 625 मामले दर्ज किए गए थे. ये मामले तो दर्ज हो गए, लेकिन बहुत से मामले ऐसे होते हैं जो दर्ज ही नहीं होते.

आंकड़े बताते हैं कि घरों में ज्यादातर महिलाएं हिंसा को झेलती रहती हैं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के आंकड़े बताते हैं कि 18 से 49 साल की उम्र की 32 फीसदी शादीशुदा महिलाओं ने कभी न कभी पति की शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा या फिर भावनात्मक हिंसा को झेला है.

सर्वे के दौरान 82% महिलाओं ने बताया था कि उन्होंने कभी न कभी अपने पति की यौन हिंसा का सामना किया है.

अंतरराष्ट्रीय आंकड़े भी हैं, जो बताते हैं कि भारतीय महिलाएं पति की हिंसा बहुत झेलती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पास 2023 तक के आंकड़े हैं. ये बताते हैं कि 15 से 49 साल की उम्र की लगभग 30% महिलाएं ऐसी हैं, जो कभी न कभी अपने पति या पार्टनर की हिंसा की शिकार हुई थीं. 

आंकड़ों को माना जाए तो इस मामले में भारतीय महिलाओं की हालत पाकिस्तानी महिलाओं से भी ज्यादा खराब है. WHO की रिपोर्ट बताती है कि इसी उम्र की लगभग 25 फीसदी पाकिस्तानी महिलाओं ने पति या पार्टनर की हिंसा झेली थीं. जबकि, बांग्लादेश में लगभग 50 फीसदी महिलाओं को ये सब झेलना पड़ा.

ये वो आंकड़े हैं जो मर्दों की 'हैवानियत' को बयां करते हैं और बताते हैं कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में महिलाओं को अपने पति, पार्टनर या किसी रिश्तेदार की हिंसा का शिकार होना पड़ता है.

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