केरल में वीआईपी सुरक्षाकर्मियों की मनमानी और मामले को दबाने की कोशिशों पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. नव केरल सदस कार्यक्रम के दौरान यूथ कांग्रेस और केएसयू के कार्यकर्ताओं पर हुए हमले की जांच में अड़ंगा डालने और आरोपियों को बचाने के आरोप में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एमआर अजीतकुमार को निलंबित कर दिया गया है.
1995 बैच के आईपीएस अधिकारी अजीतकुमार फिलहाल 'केरल स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन' के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (CMD) के पद पर तैनात थे. विशेष जांच टीम (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद उनके खिलाफ यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है.
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क्या है पूरा मामला?
यह घटना दिसंबर 2023 की है, जब अलप्पुझा में तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के 'नव केरल सदस' काफिले को यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए थे. इसके जवाब में मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात गनमैन और सुरक्षाकर्मियों ने कार्यकर्ताओं की बेरहमी से पिटाई कर दी थी. उस वक्त इस घटना को लेकर काफी बवाल हुआ था, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने सुरक्षाकर्मियों के बचाव में इसे "बचाव अभियान" करार दिया था.
जांच भटकाने का लगा आरोप
विशेष जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि जब एमआर अजीतकुमार एडीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) के पद पर तैनात थे, तब उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जांच की दिशा बदलवाने की कोशिश की.
मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने एसआईटी को दिए बयानों में जांच अधिकारी इंस्पेक्टर केपी टॉमसन ने बताया कि तत्कालीन एडीजीपी अजीतकुमार ने केस डायरी की खुद समीक्षा की थी और जब जांच में मुख्यमंत्री के सुरक्षाकर्मियों की संलिप्तता सामने आई, तो उन्होंने नाराजगी जताई थी. डीएसपी सुनीलराज के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों के जरिए संदेश भिजवाए गए थे कि मुख्यमंत्री के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर के खिलाफ मामले को जल्द से जल्द रफा-दफा कर दिया जाए.
कोर्ट के रुख के बाद खुली पोल
अक्टूबर 2024 में क्राइम ब्रांच ने सुरक्षाकर्मियों को क्लीन चिट देते हुए एक 'रिफर रिपोर्ट' दाखिल की थी, जिसे मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दिया था. सत्ता परिवर्तन के बाद जब इस मामले की नए सिरे से एसआईटी जांच शुरू हुई, तो पूरा सच सामने आ गया. एसआईटी ने मुख्यमंत्री के पूर्व गनमैन समेत पांच सुरक्षाकर्मियों को आरोपी बनाया और पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया.
अजीतकुमार ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, निलंबित आईपीएस अधिकारी एमआर अजीतकुमार ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है. सरकार को दिए जवाब में उन्होंने कहा कि उन्होंने जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया. हालांकि, राज्य पुलिस प्रमुख और सरकार ने उनके स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए निलंबन के आदेश जारी कर दिए.
-अश्विन नंदकुमार की रिपोर्ट
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