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तीन दावेदार, एक कुर्सी… 5 राज्यों के चुनाव के बाद केरल कांग्रेस में टेंशन, आखिर कौन बनेगा सीएम

केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर सस्पेंस और खींचतान तेज हो गई है. सतीशन, के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के बीच चल रही दौड़ के बीच अंतिम फैसला आलाकमान पर छोड़ दिया गया है. दिल्ली में लंबी बैठक के बाद भी नाम तय नहीं हुआ, जबकि कार्यकर्ताओं के सड़क पर प्रदर्शन के बाद अब पार्टी नेतृत्व ने स्थिति को काबू में लेने की कोशिश तेज कर दी है.

तीन दावेदार, एक कुर्सी… 5 राज्यों के चुनाव के बाद केरल कांग्रेस में टेंशन, आखिर कौन बनेगा सीएम
  • केरल में कांग्रेस के तीन दावेदारों के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान और रस्साकशी का मामला सामने आया है
  • कांग्रेस आलाकमान ने केरल सीएम पद के अंतिम फैसले के लिए दिल्ली में तीन घंटे तक बैठक की है
  • बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे
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पांच राज्यों के चुनाव नतीजों को फिलहाल अलग रख दें तो कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी सियासी चुनौती केरल में आ खड़ी हुई है. एक तो लंबे अरसे बाद केरल में कांग्रेस ने किसी तरह लेफ्ट के किले में सेंध लगाई, ऊपर से जब राज्य में सत्ता संभालने की बारी आई तो पार्टी में पहले ही रस्साकशी होने लगी है. दरअसल अब केरल में सीएम पद को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है. राज्य में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सस्पेंस बना हुआ है और तीन बड़े दावेदार वी.डी. सतीशन, के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के बीच खींचतान है कि थम ही नहीं रही. हालात ऐसे हो गए कि समर्थकों के बीच यह लड़ाई सड़कों तक पहुंच गई, जहां जगह-जगह फ्लेक्स बोर्ड, पोस्टर और प्रदर्शन देखने को मिले. नतीजतन पार्टी आलाकमान ने स्थिति संभालने के लिए दखल दिया है और अब किसी भी वक्त अंतिम फैसला होने की संभावना जताई जा रही है.

केरल में सीएम पद की खींचतान, दिल्ली में मैराथन बैठक

केरल कांग्रेस में सीएम पद के लिए जो होड़ मची हुई है, उसको लेकर नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर करीब तीन घंटे तक चली. कांग्रेस की इस उच्च स्तरीय बैठक के बावजूद मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लग सकी. इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के अलावा केसी वेणुगोपाल, सनी जोसेफ, रमेश चेन्निथला, वी.डी. सतीशन, अजय माकन, मुकुल वासनिक और दीपा दासमुंशी शामिल हुए. कांग्रेस की के बाद साफ किया गया कि अंतिम फैसला आलाकमान ही करेगा और सभी नेताओं ने इस पर सहमति भी जताई है.

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कांग्रेस आलाकमान के हाथ फैसला

रमेश चेन्निथला ने बैठक के बाद कहा कि मुख्यमंत्री को लेकर फैसला पार्टी आलाकमान ही करेगा और जल्द ही नाम का ऐलान हो जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि बैठक में चुनाव परिणाम के बाद बदले राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई और सभी नेताओं ने अपने विचार रखे. चेन्निथला ने भी ये साफ किया कि मुख्यमंत्री पद के लिए सभी नामों पर चर्चा हुई है और अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान के हाथ में है. सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान राहुल गांधी और खरगे ने तीनों दावेदारों से अलग‑अलग बात की और उन्हें संदेश दिया कि पार्टी जो भी फैसला करेगी, उसे सभी को मानना होगा. तीनों नेताओं वेणुगोपाल, सतीशन और चेन्निथला ने भी आलाकमान पर भरोसा जताया.

कांग्रेस में बैठकों का सिलसिला

बैठक के बाद जिस तरह कार्यकर्ताओं से प्रदर्शन और सार्वजनिक प्रचार रोकने की अपील की गई, उससे यह संकेत भी मिल रहा है कि समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. दीपा दासमुंशी ने बैठक के बाद कहा कि लंबी चर्चा के बाद जल्द ही मुख्यमंत्री पर अंतिम फैसला होगा और यह तय समय सीमा के भीतर होगा, क्योंकि सरकार गठन के लिए 23 मई आखिरी तारीख है. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि विधायकों ने एक लाइन प्रस्ताव पारित कर आलाकमान को नेता चयन के लिए अधिकृत किया है. साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं से संयम बरतने और सड़कों पर उतरने से बचने की अपील की.

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केरल में लगे पोस्टर और फ्लेक्स बोर्ड हटाए

इस बीच केरल में सियासी तापमान उस वक्त और बढ़ गया था जब समर्थकों ने अपने-अपने नेताओं के समर्थन में पोस्टर और फ्लेक्स बोर्ड लगा दिए थे. हालांकि नेताओं की अपील के बाद तिरुवनंतपुरम से लेकर अलप्पुझा, एर्नाकुलम, त्रिशूर, कन्नूर, कोट्टायम और वायनाड तक इन्हें हटाया गया. सुल्तान बाथरी में प्रस्तावित रैली भी रद्द कर दी गई, हालांकि मलप्पुरम में कुछ समर्थक सतीशन के समर्थन में प्रदर्शन करते नजर आए. पार्टी के वरिष्ठ नेता के.सी. जोसेफ ने इस पूरी स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आंतरिक मामलों को सड़कों पर लाना खतरनाक हो सकता है और इससे पार्टी को नुकसान होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि सार्वजनिक मतभेद संगठन की छवि को कमजोर करते हैं और इसका असर पार्टी पर ही पड़ेगा.

केरल सीएम पद के लिए किसका पलड़ा भारी

केरल में मुख्यमंत्री चयन को लेकर विधायकों की राय भी अहम मानी जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, ज्यादातर विधायकों ने के.सी. वेणुगोपाल के नाम का ही समर्थन किया है, जबकि जमीनी स्तर पर सतीशन को ज्यादा लोकप्रिय बताया जा रहा है. चेन्निथला की वरिष्ठता और अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाए हुए हैं. केरल में यूडीएफ की वापसी भी काफी बड़ी रही है, जहां 140 सीटों में से 102 सीटें इस गठबंधन को मिली हैं और कांग्रेस ने 63 सीटें जीती हैं. इतनी बड़ी जीत के बावजूद मुख्यमंत्री पद को लेकर असमंजस पार्टी के सामने नई चुनौती बनकर उभरा है.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस की मुश्किलें सिर्फ केरल तक सीमित नहीं हैं. कर्नाटक में पहले से ही डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान जारी है, जहां अभी तक मामला ठंडा नहीं हुआ है. ऐसे में पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब सरकार बनाना नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर संतुलन बनाए रखना जरूरी है.
 

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