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केरलम विधानसभा चुनाव- BJP पिछली बार शून्य थी, अबकी बार इतनी सीटें जीतने के आसार

केरल विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन इस बार कैसा है? यह पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में कैसे बेहतर है?

केरलम विधानसभा चुनाव- BJP पिछली बार शून्य थी, अबकी बार इतनी सीटें जीतने के आसार
  • ऐतिहासिक रूप से केरल में सीपीएम और एडीएफ गठबंधनों के पास सत्ता रहती आई है.
  • 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 113 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे पर एक भी जीत नहीं सकी.
  • 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी दो सीटों पर जीत की ओर बढ़ रही है.
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केरलम विधानसभा चुनाव 2026 के वोटों की गिनती में बीजेपी फिलहाल दो सीटों पर आगे चल रही है. राज्य की चित्तनूर और निमॉम विधानसभा सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी बहुत कम मतों के अंतर से फिलहाल आगे चल रहे हैं. वहीं राज्य की अन्य 8 सीटों पर बीजेपी के प्रत्याशी दूसरे पायदान पर चल रहे हैं. बीजेपी के प्रत्याशी अतिंगल, कासरगोड, कजाकोट्टम, मालामपुजा,  मांजेश्वर,  पल्लकड, तिरुवल्ला, तिरुवनंतपुरम विधानसभा सीटों पर दूसरे नंबर पर हैं. बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में केरल में बीजेपी को एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी, लिहाजा इस बार उसे दो सीटों की बढ़त हासिल होने के आसार हैं.

केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन (यूडीएफ) के बीच ही चुनाव में सीधी भिड़ंत रहती है. एलडीएफ पिछले दो चुनावों में सत्ता पर काबिज हुआ तो इस बार यूडीएफ जीत की ओर बढ़ रहा है. 9 अप्रैल को एक चरण में हुए केरल विधानसभा की 140 सीटों में से फिलहाल 90 पर यूडीएफ आगे चल रहा है और राज्य में सरकार गठन के उसके पूरे आसार हैं. 

ऐतिहासिक रूप से केरल में सीपीएम और एडीएफ गठबंधनों के पास सत्ता रहती आई है. पिछले दो बार से सत्ता पर काबिज होती आई भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) को जनता ने  केरल के विधानसभा चुनाव नतीजों ने यह तो स्पष्ट रूप से बताया है कि मतदाताओं को लेफ्ट पार्टी का विकल्प चाहिए था ऐसे में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ को उन्होंने बढ़ चढ़ कर वोट दिया है. दरअसल बीजेपी वहां पहचान और विकास के नैरेटिव पर चुनाव लड़ती है. इसके अलावा वो अपने संगठन के विस्तार में बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक मुद्दों को उठाने में भी जुटी रही.

केरल में त्रिशूर और तिरुवनंतपुरम को राजनीतिक रूप से निर्णायक माना जाता है. त्रिशूर में बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की और तिरुवनंतपुरम के निकाय चुनाव में उसने पिछले साल बाजी मारी थी.

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2021 में केरल विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन कैसा था?

2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 113 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे. मोदी के साथ नया केरल का नारा दिया और लव जिहाद को प्रतिबंधित करने का वादा किया. पर एनडीए अपनी अकेली सीट निमॉम भी हार गई और वहां उसके वोट शेयर में भी अप्रत्याशित गिरावट आई. 

इतना ही नहीं पूंजर, कुन्नाथुनाड, पेरुम्बावूर, कोच्चि, वाइपिन, कोठामंगलम और मुवत्तुपुझा के अलावा एनडीए वेंगारा में भी बीजेपी प्रत्याशी चौथे स्थान पर खिसक गए.
बीजेपी को कुल 2,354,468 मत हासिल हुए. जो कुल मत का 11.30 फीसद था और उसके कुल वोटों में 0.77 प्रतिशत की वृद्धि हुई. पर 113 में से एक भी प्रत्याशी जीत नहीं सके.

हालांकि, मांजेश्वर, कासारगोड, मालामपुजा, पल्लकड, चत्तनूर, अतिंगल, कजाकोट्टम, वतियुरकावु और निमॉम यानी कुल 9 सीटों पर बीजेपी के प्रत्याशी दूसरे पायदान पर रहे.

चुनाव के नतीजों के कुछ हफ्तों बाद बीजेपी के राज्य प्रमुख के सुरेंद्रन पर चुनावों में हवाला के पैसों के इस्तेमाल का आरोप लगा. इस मामले को बाद में प्रवर्तन निदेशालय को सौंप दिया गया. 

2016 के विधानसभा में बीजेपी का प्रदर्शन

2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने केरल में खाता खोला था और तिरुवनंतपुरम के निमॉम विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी, वहीं 6 सीटों पर दूसरे पायदान पर भी रही थी जबकि अगले कुछ सालों में 8 विधानसभा उप-चुनाव में दूसरे नंबर पर रही थी. जबकि वोट शेयर में एलडीएफ और यूडीएफ के बाद NDA 15 फीसद के साथ तीसरे पायदान पर रहा.

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