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केदारनाथ धाम में कूड़े का अंबार, सिर्फ 5 महीनों में जमा हुआ 50.30 मीट्रिक टन कचरा, पिछले साल की तुलना में ढाई गुना ज्यादा

RTI कार्यकर्ता ने कहा कि केदारनाथ में केवल पांच महीनों में पिछले सालों की पूरी यात्रा की तुलना में कई गुना अधिक कचरा पैदा होना हमारे पर्यावरण के लिए बहुत खतरनाक है. इसके लिए सबसे बड़े जिम्मेदार हम लोग खुद हैं.

केदारनाथ धाम में कूड़े का अंबार, सिर्फ 5 महीनों में जमा हुआ 50.30 मीट्रिक टन कचरा, पिछले साल की तुलना में ढाई गुना ज्यादा
केदारनाथ में 5 महीनों में सबसे ज्यादा कचरा पैदा हुआ. (AI इमेज)
  • केदारनाथ धाम में अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच कुल 50.30 मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ
  • 2026 के पांच महीनों में पैदा हुआ कचरा 2023 के पूरे साल की तुलना में लगभग 50% से ज्यादा है
  • करीब 20 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा जमा हुआ, जिसमें से 92.5 प्रतिशत का निस्तारण किया जा चुका है

उत्तराखंड की चार धाम यात्रा के लिए हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और जगह-जगह कूड़ा-कचरा छोड़ आते हैं. केदारनाथ धाम में सबसे ज्यादा कचरा महज पांच महीनों में जमा हुआ है. अप्रैल 2026 से अगस्त के बीच महज पांच महीनों में 50.30 मीट्रिक टन कचरा पैदा हुआ, जो पिछले साल पूरे यात्रा के दौरान एकट्ठा हुए कचरे के मुकाबले ढाई गुना से अधिक है. केदारनाथ नगर पंचायत ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत कचरे को लेकर ये जानकारी दी है, इन आंकड़ों के मुताबिक, इस साल के शुरुआती पांच महीनों में ही पिछले तीन वसालों में किसी भी पूरे साल के दौरान पैदा हुए कचरे की तुलना में कहीं अधिक कचरा वहां पैदा हुआ.

केदारनाथ में 5 महीने में 50.30 मीट्रिक टन कचरा

नगर पंचायत ने उत्तर प्रदेश के नोएडा के रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता के पूछे गए सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है. नगर पंचायत के मुताबिक, केदारनाथ में 2023 में 32.58 मीट्रिक टन, 2024 में 26.10 मीट्रिक टन और 2025 में 21.40 मीट्रिक टन कचरा पैदा हुआ था. इसके मुकाबले 2026 में अप्रैल से अगस्त के दौरान ही 50.30 मीट्रिक टन कचरा पैदा हो चुका है. इस तरह 2026 के केवल पांच महीनों में पैदा हुआ कचरा पूरे 2023 की तुलना में करीब 54 प्रतिशत, 2024 की तुलना में करीब 93 प्रतिशत और 2025 की तुलना में करीब 135 प्रतिशत अधिक है.

20 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा

नगर पंचायत के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में 1.7 मीट्रिक टन कचरा पैदा हुआ, जो मई में बढ़कर 16.3 मीट्रिक टन हो गया. जून में 11.5 मीट्रिक टन, जुलाई में 10.5 मीट्रिक टन और अगस्त में 10.3 मीट्रिक टन कचरा पैदा हुआ. जवाब में नगर पंचायत ने प्लास्टिक कचरे का आंकड़ा भी उपलब्ध कराया है. इसके अनुसार, 2026 में अब तक करीब 20 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ, जिसमें से 18.5 मीट्रिक टन यानी 92.5 प्रतिशत का प्रसंस्करण किया जा चुका है, जबकि करीब 1.5 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा अभी शेष है.

नगर पंचायत ने केदारनाथ में लैंडफिल की क्षमता 30,000 वर्ग फुट बताई है. उसके मुताबिक, लैंडफिल में अभी 28,000 वर्ग फुट क्षमता शेष है. नगर पंचायत ने यह भी बताया कि पिछले पांच सालों के दौरान केदारनाथ में चार लैंडफिल बनाए गए हैं.

अब तक करीब 15 लाख श्रद्धालुओं ने किए केदारनाथ के दर्शन

इस मामले में गुप्ता ने कहा कि बढ़ते कचरे के बीच लैंडफिल पर निर्भरता हिमालयी पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है, खासकर तब जब केदारनाथ जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. इस साल अब तक करीब 15 लाख श्रद्धालु केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि आरटीआई से सामने आए ये आंकड़े केदारनाथ में कचरा प्रबंधन पर बढ़ते दबाव की तस्वीर पेश करते हैं.

उन्होंने कहा कि केदारनाथ में केवल पांच महीनों में पिछले सालों की पूरी यात्रा सत्र की तुलना में कई गुना अधिक कचरा पैदा होना हमारे पर्यावरण के लिए बहुत खतरनाक है. केदारनाथ जैसी पवित्र और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील जगह को कचरा घर बनाने के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार हम लोग खुद हैं.

इनपुट- भाषा के साथ

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