- के सी त्यागी ने इस साल जनवरी में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी
- त्यागी ने मार्च में जेडीयू की सदस्यता नवीनीकरण नहीं की और अब वे पार्टी के सदस्य नहीं हैं
- रविवार को के सी त्यागी राष्ट्रीय लोकदल में शामिल होंगे, जयंत चौधरी की मौजूदगी में सदस्यता ग्रहण करेंगे
इसी साल 9 जनवरी को के सी त्यागी ने बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग की थी . इस मांग को लेकर जेडीयू ने बेहद तल्ख़ अंदाज़ में कहा था कि के सी त्यागी पार्टी में हैं या नहीं , ये नहीं पता है . तभी से त्यागी के पार्टी छोड़कर आरएलडी में जाने की अटकलें लगने लगी थीं .रविवार को पूर्व जेडीयू नेता के सी त्यागी राष्ट्रीय लोकदल यानि आरएलडी में शामिल हो जाएंगे . दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और आरएलडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी की मौजूदगी में के सी त्यागी अपने कुछ अन्य समर्थकों के साथ पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे . अभी तक ये साफ़ नहीं है कि आरएलडी में त्यागी की भूमिका किस रूप में रहेगी .
16 मार्च को छोड़ी थी जेडीयू की सदस्यता
केसी त्यागी की आरएलडी में शामिल होने की अटकलें पिछले कई दिनों से लगाई जा रही थी जिसपर कल विराम लग जाएगा . इसी महीने की 16 तारीख़ को एक बयान जारी करके के सी त्यागी ने ऐलान किया था कि उन्होंने जेडीयू की सदस्यता अभियान के तहत अपनी सदस्यता का नवीकरण नहीं करवाया है और अब वो जेडीयू के सदस्य नहीं हैं .
नीतीश को भारत रत्न दिए जाने की मांग की
उसी बयान में त्यागी ने कहा था कि 22 मार्च को दिल्ली में एक बैठक कर अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे . इसी साल 9 जनवरी को के सी त्यागी ने बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग की थी . इस मांग को लेकर जेडीयू ने बेहद तल्ख़ अंदाज़ में कहा था कि के सी त्यागी पार्टी में हैं या नहीं , ये नहीं पता है . तभी से त्यागी के पार्टी छोड़कर आरएलडी में जाने की अटकलें लगने लगी थीं .
आरएलडी को भी होगा फ़ायदा
14 जनवरी को एनडीटीवी ने ये ख़बर दी थी कि के सी त्यागी आरएलडी का दामन थाम सकते हैं . उस समय पार्टी की तरफ़ से महासचिव मलूक नागर ने त्यागी से मुलाक़ात कर जयंती चौधरी की ओर से पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था . जयंती चौधरी ने ख़ुद भी इस मामले में के सी त्यागी से बात की थी . त्यागी के आरएलडी में शामिल होने से पार्टी के गढ़ पश्चिम उत्तर प्रदेश में पार्टी का जनाधार बढ़ेगा क्योंकि इस इलाके में त्यागी के समाज से आने वाले लोगों की अच्छी खासी तादाद है . साथ ही , जयंती चौधरी को पार्टी की ओर से बात रखने वाले एक सशक्त , जानकार और अनुभवी आवाज़ की ज़रूरत है जो के सी त्यागी के रूप में पूरी हो सकेगी . वहीं जेडीयू में हाशिए पर पहुंचा दिए गए त्यागी को भी अपने गढ़ पश्चिम उत्तर प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक आधार मिल सकेगा . इतना ही नहीं , त्यागी अपने आप को हमेशा से जयंत चौधरी के दादा , किसान नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को अपना आदर्श मानते रहे हैं .
शरद यादव और नीतीश के बेहद करीबी रहे
2003 में जब समता पार्टी और जनता दल का विलय करके जेडीयू का गठन किया गया था तब जॉर्ज फर्नांडिस , शरद यादव और नीतीश कुमार के साथ के सी त्यागी भी उसके सबसे मज़बूत स्तंभों में शामिल थे . त्यागी ने तबसे पार्टी के प्रधान महासचिव की हैसियत से इन सभी नेताओं , ख़ासकर शरद यादव और नीतीश कुमार के साथ काफ़ी क़रीब से काम किया . उस पीढ़ी के नेताओं में केवल नीतीश कुमार ही बचे हैं , हालांकि उनकी तबियत को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे हैं . लिहाज़ा नीतीश कुमार से त्यागी का संवाद न के बराबर हो रहा था . ज़ाहिर है त्यागी के लिए जेडीयू में बने रहना बेहद मुश्किल हो चला था . ऐसे में त्यागी के लिए जेडीयू की तरह ही एनडीए की दूसरी सहयोगी पार्टी आरएलडी में शामिल होना सबसे मुनासिब था .
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