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पहले साड़ी में दौड़कर जीता दिल, अब ट्रैकसूट में मैदान पर छाईं कविता कविता; सोशल मीडिया पर हो रही जमकर तारीफ

साड़ी पहनकर नंगे पैर दौड़ने वाली वही कविता अब एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कुछ और है. तस्वीरों में कविता बिल्कुल बदले हुए अंदाज में नजर आ रही हैं.

कविता महतो
NDTV
  • कविता महतो ने झारखंड के रामगढ़ में होमगार्ड भर्ती के दौरान साड़ी पहनकर 1600 मीटर की दौड़ पूरी की.
  • आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद कविता ने आत्मविश्वास से ट्रायल में शानदार प्रदर्शन किया.
  • कविता का वायरल वीडियो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बना और उनकी मेहनत को सोशल मीडिया पर सराहा गया.

साड़ी पहनकर फिजिकल टेस्ट ट्रायल के दौरान दौड़ लगाकर सुर्खियां बटोरने वाली कविता एक बार फिर चर्चा में हैं. उनका साड़ी में दौड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब उनकी नई तस्वीर सामने आई है. इस बार कविता बदले हुए अंदाज में ट्रैकसूट और स्पोर्ट्स शूज पहनकर मैदान में कड़ी मेहनत और अभ्यास करती नजर आ रही हैं. उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है.

इससे पहले झारखंड के रामगढ में होमगार्ड भर्ती के दौरान कविता महतो ने अपने जज्बे से हर किसी का दिल जीत लिया. आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. भर्ती प्रक्रिया के तहत आयोजित 1600 मीटर की ट्रायल दौड़ में कविता नंगे पैर और साड़ी पहनकर मैदान में उतर गईं. जहां अन्य अभ्यर्थी जूतों के साथ दौड़ रहे थे, वहीं कविता अपने परिवार की उम्मीदों को साकार करने के इरादे से पूरे आत्मविश्वास के साथ ट्रैक पर दौड़ीं. उन्होंने आभावों के बावजूद शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 7 मिनट में 1600 मीटर की दौड़ पूरी कर ली. उनकी मेहनत और संघर्ष का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.

बता दें कि रामगढ़ के सोसो गांव की रहने वाली 27 वर्षीय कविता कुमारी की पहचान आज भले ही एक वायरल वीडियो के जरिए बनी हो. लेकिन उनके संघर्ष की कहानी इससे कहीं बड़ी है. करीब तीन साल पहले लंबी बीमारी के चलते उनके पति दीपक महतो का निधन हो गया था. पति के जाने के बाद दो छोटे बच्चों और पूरे परिवार की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई. कठिन परिस्थितियों के बावजूद कविता ने हिम्मत नहीं हारी और परिवार का सहारा बनने का फैसला किया. घर का खर्च चलाने और बच्चों का भविष्य संवारने के लिए उन्होंने कुछ समय तक सिक्योरिटी गार्ड के रूप में भी काम किया. तमाम चुनौतियों और आर्थिक तंगी के बीच कविता लगातार मेहनत करती रहीं. आज उनका संघर्ष और जज्बा लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है.

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