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This Article is From Nov 13, 2025

कश्मीर में 2 हाइब्रिड आतंकी गिरफ्तार, हैंड ग्रेनेड समेत हथियार-गोला बारूद बरामद, क्या थी साजिश?

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शबीर अहमद नजार और शबीर अहमद मीर के रूप में हुई है. दोनों सोपोर के रहने वाले हैं. उनके कब्जे से पिस्टल, मैगजीन, 20 कारतूस, 2 हैंड ग्रेनेड भी मिले हैं.

कश्मीर में 2 हाइब्रिड आतंकी गिरफ्तार, हैंड ग्रेनेड समेत हथियार-गोला बारूद बरामद, क्या थी साजिश?
  • जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सोपोर से दो हाइब्रिड आतंकवादियों को राष्ट्रीय राइफल्स और CRPF की मदद से गिरफ्तार किया है
  • गिरफ्तार आतंकियों के कब्जे से पिस्टल, मैगजीन, कारतूस के अलावा हैंड ग्रेनेड भी बरामद किए गए हैं
  • हाइब्रिड आतंकवादी आम नागरिक की तरह रहते हैं लेकिन मौका मिलने पर आतंकवादी गतिविधियां अंजाम देते हैं
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जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए सोपोर में दो हाइब्रिड आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है. इस कार्रवाई को 22 राष्ट्रीय राइफल्स और सीआरपीएफ की 179 बटालियन की मदद से अंजाम दिया गया. दोनों आतंकियों को सोपोर के मोमिनाबाद में सादिक कॉलोनी में लगाए गए संयुक्त चेकपोस्ट पर पकड़ा गया. 

सुरक्षा नाके के पास पकड़े गए

संदिग्धों की आवाजाही की खबर मिलने के बाद यह नाका लगाया गया था. चेकिंग के दौरान फल मंडी की तरफ से अहत बाबा क्रॉसिंग की ओर दो व्यक्ति आते दिखे. जैसे ही उन्होंने सुरक्षा बलों को देखा तो भागने का प्रयास किया. हालांकि टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया.

पिस्टल, हैंड ग्रेनेड भी बरामद

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान शबीर अहमद नजार निवासी मोहल्ला तौहीद कॉलोनी माजबाग और शबीर अहमद मीर निवासी ब्राथ सोपोर के रूप में हुई है. उनके कब्जे से एक पिस्टल, एक मैगजीन, 20 जिंदा कारतूस, 2 हैंड ग्रेनेड के अलावा आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई.

आतंकवाद से जुड़े होने का शक

पुलिस का कहना है कि दोनों के पास से हथियार और गोला-बारूद बरामद होना दिखाता है कि वे इलाके में आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों में शामिल थे. इस बारे में सोपोर थाने में एफआईआर दर्ज करके आगे जांच शुरू कर दी गई है. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्धता जताई है.

कौन होते हैं हाइब्रिड आतंकवादी?

हाइब्रिड आतंकवादी वो लोग होते हैं, जो आतंकवादी संगठनों की लिस्ट में नहीं होते और आम नागरिक की तरह जिंदगी बिताते हैं. लेकिन मौका पड़ने पर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देते हैं. सुरक्षाबलों द्वारा उनकी पहचान करना और ट्रैक करना मुश्किल होता है क्योंकि वो अपनी डबल पहचान छिपाकर रखते हैं.

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