जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में हाल ही में हुए एक दर्दनाक आतंकी हमले के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी और तलाशी अभियान छेड़ दिया है. इस बड़ी कार्रवाई के तहत पुलिस ने 2000 से अधिक ऐसे लोगों को हिरासत में लिया है जिन पर आतंकवादियों के ओवरग्राउंड वर्कर यानी OGW के तौर पर काम करने का शक है. वहीं दूसरी ओर आतंकवादियों के परिवारों के घरों को विस्फोट से उड़ाए जाने की घटनाओं पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से घाटी के हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं.
अनंतनाग हमले के बाद पुलिस का एक्शन
बुधवार को अनंतनाग के एक व्यस्त बाजार में हुए लक्षित आतंकवादी हमले में पुलिसकर्मी आशिक अहमद कुरैशी की जान चली गई थी. इस कायराना हमले से सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मच गया जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के पूरे समर्थन तंत्र यानी इकोसिस्टम को नेस्तनाबूद करने के लिए व्यापक स्तर पर छापेमारी शुरू कर दी. अकेले श्रीनगर जिले से लगभग 700 संदिग्धों को उठाया गया है.
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इसके अलावा बारामूला में 178 बडगाम में 200 और गांदरबल में 100 लोगों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस का कहना है कि ये गिरफ्तारियां पूरी तरह से खुफिया इनपुट और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत सत्यापन के लिए की गई हैं.
आतंकवादियों के घरों पर चला बुलडोज़र और धमाके
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों ने अनंतनाग जिले में लश्कर-ए-तैयबा के सक्रिय आतंकवादी आदिल अहमद ठोकर और हारून रशीद के परिवारों के घरों को निशाना बनाया. आदिल के घर को एक जोरदार धमाके से पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया जिससे आसपास के अन्य मकानों और एक स्थानीय मस्जिद को भी नुकसान पहुंचा है.
खास बात यह है कि इसी परिवार का घर पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम हमले के बाद भी गिराया गया था जिसके बाद उन्होंने कुछ महीने पहले ही नया घर बनाया था. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर युवाओं की भर्ती भले ही लगभग शून्य हो गई हो लेकिन पुराने बचे हुए आतंकवादी सीमा पार के आतंकियों के साथ मिलकर साजिश रच रहे हैं.
उमर अब्दुल्ला ने जताई कड़ी आपत्ति
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सरकार और सुरक्षा बलों की इस रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि थोकबंद गिरफ्तारियां और घरों को गिराना किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल पहलगाम हमले के बाद भी ऐसी ही कार्रवाई की गई थी और बाद की जांच में यह साबित हुआ था कि उस हमले में कोई भी स्थानीय कश्मीरी शामिल नहीं था.
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बल प्रयोग से स्थिति को एक सीमित दायरे तक ही संभाला जा सकता है लेकिन वास्तविक और स्थायी शांति केवल स्थानीय लोगों के विश्वास और उनके समर्थन से ही हासिल की जा सकती है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आतंकवाद के खिलाफ इस निर्णायक लड़ाई में जनता को विश्वास में लेकर आगे बढ़ना होगा तभी हमें सफलता मिलेगी.
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