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“मंदिर में मत आओ" दलित नव दंपत्ति को पूजा करने से रोका...कर्नाटक में वीडियो वायरल होने के बाद आरोपी गिरफ्तार

तूमकुरु जिले के अरसम्मा मंदिर में नवविवाहित दलित दंपति को कथित तौर पर ऊंची जाति के व्यक्ति ने अपमानित कर मंदिर से बाहर निकाल दिया. वीडियो वायरल होने के बाद मुख्य आरोपी नारायणप्पा को SC/ST Act के तहत गिरफ्तार किया गया और अन्य की तलाश जारी है.

“मंदिर में मत आओ" दलित नव दंपत्ति को पूजा करने से रोका...कर्नाटक में वीडियो वायरल होने के बाद आरोपी गिरफ्तार
  • तूमकुरु जिले के गोनि गांव के अरसम्मा मंदिर में दलित परिवार के साथ जातिगत दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है
  • नवविवाहित दलित दंपति मंदिर में दर्शन के दौरान एक उच्च जाति के व्यक्ति ने उन्हें प्रवेश से रोका और अपमानित किया
  • पुलिस ने आरोपी नारायणप्पा को SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की
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तूमकुरु:

कर्नाटक के तूमकुरु जिले के तुरुवेकेरे तालुक में स्थित गोनि गांव के अरसम्मा मंदिर में एक दलित परिवार के साथ कथित जातिगत दुर्व्यवहार का गंभीर मामला सामने आया है.  घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. शिकायत के अनुसार, एक नवविवाहित दलित दंपति, पुणीत और पंकजा, शादी के बाद मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे. तभी वहां मौजूद एक  ऊंची जाति के व्यक्ति नारायणप्पा ने कथित रूप से देवी का अवतार लेने का नाटक किया और जोर-जोर से चिल्लाते हुए कहा कि दलितों को मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं है.

पीड़ित परिवार के मुताबिक, नारायणप्पा ने उन्हें फटकारते हुए मंदिर से बाहर जाने को कहा और पूजा घर पर करने की नसीहत दी. घटना के दौरान वहां मौजूद अन्य लोग तमाशा देखते रहे.  घटना का वीडियो मोबाइल कैमरे में कैद हो गया, जिसमें आरोपी को कहते सुना गया “दलितों का मंदिर में प्रवेश वर्जित है… बाहर जाओ.

पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज

इस अपमानजनक घटना से दुखी होकर पीड़ित पंकजा के भाई जगदीश ने तुरुवेकेरे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत नारायणप्पा को गिरफ्तार कर लिया.  इसके अलावा प्रभा, कंतन्ना, अमूल्या, पुट्टेगौड़ा, पद्मा सहित अन्य लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है. 

पुलिस का कहना है कि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और जांच आगे की जा रही है. दूसरी ओर, प्रशासन ने गांव में शांति बैठक आयोजित की और ग्रामीणों को स्पष्ट रूप से बताया कि अस्पृश्यता दंडनीय अपराध है. 

यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वरा के ही जिला तूमकुरु में हुई है. दलित संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना को कर्नाटक में अभी भी जारी जातीय भेदभाव का प्रमाण बताया है.  फिलहाल, पुलिस आगे की जांच कर रही है और वायरल वीडियो तथा चश्मदीदों के बयान के आधार पर आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की तैयारी में है. 

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