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कन्याकुमारी से कश्मीर तक: कुष्ठ रोग के कलंक को मिटाने के मिशन पर दौड़ रहा ऑस्ट्रेलिया का फिजियोथेरेपिस्ट

ऋषिकेश की यादों से प्रेरित ओम सतीजा ने कुष्ठ रोग जागरूकता के लिए कन्‍याकुमारी से जम्मू-कश्मीर तक 4700 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन पर निकले हैं. ओम सतीजा रोजाना 50 किलोमीटर दौड़ते हुए कुष्ठ रोग के प्रति कलंक हटाकर इलाज और सम्मान का संदेश दे रहे हैं.

कन्याकुमारी से कश्मीर तक: कुष्ठ रोग के कलंक को मिटाने के मिशन पर दौड़ रहा ऑस्ट्रेलिया का फिजियोथेरेपिस्ट
  • ओम सतीजा ने कन्‍याकुमारी से जम्मू-कश्मीर तक 4700 किलोमीटर की दौड़ कुष्ठ रोग जागरूकता फैलाने के लिए शुरू की थी
  • ओम को ऋषिकेश में एक कुष्ठ रोगी के प्रति लोगों के भेदभाव ने इस मिशन पर निकलने की प्रेरणा दी थी
  • ओम रोजाना 50 किलोमीटर दौड़ते हुए तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पंजाब और हिमालय की चुनौतीपूर्ण जलवायु का सामना किया
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नई दिल्‍ली:

इरादे नेक हों तो सपने भी साकार होते हैं, सच्‍ची लगन हो तो रास्‍ते भी आसान होते हैं. इस लगन से ओम सतीजा ने कन्‍याकुमारी से अपनी मेराथन 26 जनवरी को शुरू की थी. अब ये दौड़ते हुए जम्‍मू-कश्‍मीर तक पहुंचेंगे. अभी तक ये 4700 किलोमीटर की दौड़ लगा चुके हैं और इनका एक ही मिशन है- कुष्‍ठरोग के लिए जागरूकता फैलाना. ऋषिकेश की एक बचपन की याद, ऑस्ट्रेलिया के एक क्रिकेट हीरो... यही वे वजह थीं, जो 23 वर्षीय ओम सतीजा को भारत वापस लाईं. एक पर्यटक के रूप में नहीं, बल्कि कुष्ठ रोग से जुड़े कलंक को मिटाने के मिशन पर निकले एक अल्ट्रा मैराथनर के रूप में. 

जब 12 साल पहले ऋषिकेश आए थे ओम
 

ऑस्ट्रेलिया के फिजियोथेरेपिस्ट ओम सतीजा ने कुष्ठ रोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए अब तक 4700 किलोमीटर की दौड़ लगाई है. आखिर ओम इस मिशन पर क्‍यों निकले? ओम बताते हैं, "12 साल पहले मैं अपने पिता के साथ एक आध्यात्मिक यात्रा पर ऋषिकेश आया था. एक सर्दी की सुबह भिखारियों को कंबल बांटते समय मेरी मुलाकात एक कुष्ठ रोगी से हुई. लोग शख्‍स के पास नहीं जा रहे थे, उसे देख भी नहीं रहे थे. यह भेदभाव था. जिस तरह से लोग मुंह फेर रहे थे, जिस तरह से वे पीछे हट जाते थे, वह एहसास मेरे मन में बस गया. तभी से मैंने सोच लिया था कि इन लोगों के लिए कुछ करना है."

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भारत का मौसम बना बड़ी चुनौती 

ओम का कन्‍याकुमारी से कश्‍मीर तक का सफर आसान नहीं रहा. ओम बताते हैं, "ये सफर आसान नहीं रहा है. तमिलनाडु और आध्र प्रदेश में भयंकर उमस के दौरान दौड़ना आसान नहीं रहा. इसके बाद पश्चिम बंगाल आया. अप्रैल के महीने में यहां भयंकर गर्मी थी, यहां भी काफी मुश्लिों का सामना करना पड़ा. लेकिन हम एक-एक कदम आगे बढ़ाते रहे और मंजिल की ओर बढ़ते चले गए."    

गर्मी, लू, उमस और बारिश के बीच हर दिन 50 KM की दौड़ 

ओम को कई सालों बाद अपनी पढ़ाई के दौरान 'जन स्वास्थ्य' विषय पर रिसर्च करते समय पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ द्वारा कोलकाता में कुष्ठ रोगियों के लिए किए गए कामों के बारे में पता चला. इसके बाद ओम ने सोचा, "अगर स्‍टीव वॉ इस नेक काम के लिए अपने मंच का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं?" इस वर्ष 26 जनवरी को सतीजा ने कन्याकुमारी नदी के जल में अपने पैर धोए और उत्तर की ओर दौड़ना शुरू किया. उनकी मंज़िल श्रीनगर का ऐतिहासिक लाल चौक थी. अपनी 4,700 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने के लिए वह प्रतिदिन 50 से 60 किलोमीटर दौड़ते हैं. उनका हर कदम एक संदेश है, जो तमिलनाडु की भीषण गर्मी, दक्कन की मानसूनी बारिश, पश्चिम बंगाल की उमस, पंजाब की भीषण लू और अब हिमालय की कठिन चढ़ाई के रास्तों में समाया हुआ है.

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कुष्‍ठ रोग छूने से नहीं फैलता...

कोई सहायक दल नहीं, कोई तामझाम नहीं. बस एक बैग, एक जोड़ी पुराने जूते और एक संदेश जो वे हर पड़ाव पर दोहराते हैं- "कुष्ठ रोग ठीक हो सकता है. लेकिन लोग डर और शर्म के कारण इसे छिपाते हैं." ओम सतीजा का मिशन साफ है- कुष्ठ रोगियों के प्रति कलंक को करुणा से बदलना. दौड़ते हुए, उनका संदेश हर पड़ाव पर गूंजता है: "बीमारी में शर्म नहीं है. आगे आइए, इलाज करवाइए और सम्मान के साथ जिएं." हर राज्य में, सतीजा स्कूलों, कॉलेजों और गांवों के चौपालों पर रुकते हैं. वे लोगों को बताते हैं कि कुष्ठ रोग बैक्टीरिया के कारण होता है, अभिशाप नहीं. यह छूने से नहीं फैलता. हर सरकारी अस्पताल में इलाज मुफ्त है और लोग उनकी बात सुनते हैं. छात्र प्रतिज्ञा लेते हैं. स्थानीय लोग कुछ किलोमीटर तक उनके साथ चलते हैं. पंजाब के युवा, झांसी के शिक्षक, नागपुर के चाय विक्रेता, उधमपुर में साइकिल सवारों का एक समूह, सभी इस संदेश के साथ उन संग आगे बढ़े.

ओम ने बताया, "बहुत से लोग अब भी सोचते हैं कि कुष्ठ रोग पिछले जन्म का अभिशाप है. मैं उन्हें यह समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि यह सिर्फ़ एक बीमारी है. और इसका इलाज संभव है." 

भारत में 2024-25 में कुष्ठ रोग के 27,428 नए केस

भारत में 2024-25 में कुष्ठ रोग के 27,428 नए मामले सामने आए. दवाओं से इलाज करने पर यह बीमारी 6 से 12 महीनों में ठीक हो जाती है. लेकिन इससे जुड़े कलंक से निपटना अभी भी मुश्किल है. ओम के लिए कन्याकुमारी और कश्मीर के बीच 4,700 किलोमीटर की दूरी सिर्फ़ एक आंकड़ा नहीं है. यह एक संदेश है. वे कहते हैं, "मैंने यह रास्ता इसलिए चुना, ताकि भारत को बता सकूं कि कुष्ठ रोगियों को सम्मान मिलना चाहिए, भेदभाव नहीं."

ओम जब कश्‍मीर के लाल चौक पहुंचेंगे, तो दौड़ का कोई रिकॉर्ड नहीं टूटेगा. लेकिन एक मिथक जरूर टूट सकता है. वे कहते हैं, "कुष्ठ रोग छूने से नहीं फैलता. अज्ञानता से फैलता है."

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