हिंदू रीति-रिवाजों के मुताबिक, पवित्र महीना सावन शुरू हो गया है और जगह-जगह से कांवड़ यात्राओं की तस्वीरें और खबरें आ रही हैं. यह एक सालाना यात्रा होती है, जिसमें श्रद्धालु गंगा नदी से पवित्र जल लेकर यात्रा करते हैं. ऐसे महीने में उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसको देखकर श्रवण कुमार से जुड़ा किस्सा याद आता है, जब उन्होंने अपने माता-पिता को कंधे पर तीर्थ यात्रा करवाई थी.
महिला ने सास को कंधे पर उठाया
एक ऐसे दौर में जब सास और बहुओं के बीच अदावत के किस्से आए दिन सुनने के मिलते रहते हैं, एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर लोगों का दिल पसीज जा रहा है. कांवड़ यात्रा के दौरान एक महिला को अपनी सास को कंधे पर उठाकर ले जाते हुए देखा गया.
दरअसल, मंगलवार, 28 जुलाई को मेरठ में कांवड़ यात्रा के दौरान, भक्त आरती हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौटते वक्त अपनी सास उषा को कंधे पर रखी सीट पर बिठाकर ले जा रही हैं. आरती अपने परिवार के साथ यह यात्रा कर रही हैं. तस्वीर में देखा जा सकता है कि वे भक्ति और देखभाल के भाव से अपनी सास को कंधे पर उठाए हुए हैं. कांवड़ यात्रा के बीच यह तस्वीर वायरल हो रही है और चर्चा का मौजू बनी हुई है.
आरती ने अपनी बूढ़ी सास ऊषा को कांवड़ में बैठाकर कंधे पर लेकर निकलीं. उन्होंने ऐसा करते हुए समाज के सामने भक्ति और सेवा की अनूठी मिसाल पेश की है.
कांवड़ यात्रा क्या है?
बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में इस तीर्थयात्रा को आम तौर पर 'बोल बम यात्रा' कहा जाता है. भक्त पवित्र जगहों, खासकर उत्तराखंड में गंगोत्री, गोमुख और हरिद्वार और बिहार के भागलपुर जिले में सुल्तानगंज से गंगाजल लाने के लिए पैदल यात्रा करते हैं. सुल्तानगंज का खास महत्व है क्योंकि यह उन कुछ जगहों में से एक है, जहां गंगा उत्तर की ओर बहती है. इसे 'उत्तरवाहिनी गंगा' कहा जाता है.
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