उत्तरकाशी के धराली आपदा के बाद मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर को फिर से खोजने की कोशिश शुरू हो गई है. दोबारा से मंदिर को खोजने की कोशिश सरकार ने नहीं बल्कि स्थानीय ग्रामीणों ने की है. धराली गांव के ग्रामीणों ने एकजुट होकर फिर से प्राचीन कल्प केदार मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए नवरात्रि के पहले दिन से खुदाई शुरू कर दी है. नवरात्रि के पहले दिन ग्रामीणों ने आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में पूजा-अर्चना के बाद खुदाई शुरू की.
5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धराली में आयी आपदा के सैलाब में घर मकान खेत सड़क दुकान होटल यहां तक की प्राचीन कल्प केदार मंदिर जमीदोंज हो गया था, लगभग 50 फीट मालवा जिसमें बड़े-बड़े बोल्डर मिट्टी और रेत थी. इस मलबे में सब कुछ दफन हो गया लगभग 1 साल से ज्यादा के समय हो गया है. धराली आपदा को आए हुए. आपदा के उस सैलाब में पौराणिक काल के समय का प्राचीन कल्प केदार मंदिर मलबे में दब गया था.

इस प्राचीन मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए ग्रामीण लगातार प्रशासन और सरकार से बातचीत कर रहे थे. लेकिन अब खुद ग्रामीण ने मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए बीड़ा उठाया है. धराली गांव के ग्रामीणों ने आपदा के 14 महीने बाद प्राचीन कल्प केदार मंदिर के जिम्मेदार के लिए खुदाई शुरू करती है, मंदिर समिति से जुड़े लोगों ने पूरे गांव से स्वेच्छा से चंदा इकट्ठा किया है. हर ग्रामीण को ₹5100 चंदा देने का आग्रह किया है. अब तक डेढ़ सौ ग्रामीणों में 5100 का चंदा दिया है.
11 अक्टूबर से खुदाई हुई शुरू
मंदिर समिति से जुड़े लोगों ने बताया कि धराली गांव में सोमेश्वर महादेव की देवडोली के आदेश और सानिध्य में प्राचीन कल्प केदार मंदिर को मलबे भी के नीचे ढूंढने के लिए काम शुरू कर दिया है. ग्रामीणों के मुताबिक देवडोली के आदेश के मुताबिक नवरात्रि के पहले दिन यानी 11 अक्टूबर से खुदाई शुरू कर दी गई है. मंदिर को तलाश करने के लिए जहां पर पहले मंदिर था वहां पर विधि विधान से पूजा पाठ और हवन किया गया उसके बाद सोमेश्वर महादेव की देव डोली के दिए गए समय और जगह पर खुदाई शुरू कर दी गई है.
दीपक सिंह पवार बताते हैं कि इसके लिए सोमेश्वर महादेव मंदिर में देवता की डोली लाई गई जहां पर देव डोली के आदेश पर नवरात्रि के पहले दिन से खुदाई करने को कहा गया. दीपक सिंह पवार ने बताया कि सभी ग्रामीणों से सहयोग की अपील की गई और 5100 प्रत्येक ग्रामीण की तरफ से देने का आग्रह किया गया. अब तक 150 से ज्यादा ग्रामीणों ने 5100 दिए हैं जिसके आधार पर वहां पर खुदाई का काम शुरू किया गया है.

आदि गुरु शंकराचार्य ने कराया था मंदिर का जीर्णोद्धार
धराली के ही ग्रामीण जीडी पवार ने बताया कि न सिर्फ ग्रामीणों से सहयोग की अपील की गई है बल्कि आसपास के लोग भी इसमें मदद कर रहे हैं. जीडी पवार ने कहा प्राचीन कल्प केदार मंदिर को सभी ग्रामीणों की मदद और सहयोग से ही मलबे से बाहर निकल जाएगा.
मान्यता यह है कि कल्प केदार मंदिर की स्थापना पांडवों ने महाभारत काल में की थी. यह माना जाता है कि पांडवों ने यहां ब्रह्म हत्या और महाभारत युद्ध में हुए पापों से मुक्ति के लिए यहां पर मंदिरों का निर्माण करवाया था.

कल्प केदार मंदिर में 204 मंदिरों का समूह होता था, इसके बाद साल 1887 में यहां पर तीन मंदिर दिखे थे, इसके बाद साल 1926 में यहां आपदा में मुख्य कल्प केदार मंदिर आधा दब गया था और अन्य छोटे मंदिर बह गए थे, आधा के बाद ग्रामीणों ने इस पूरे मंदिर क्षेत्र की खुदाई की और पूरा मंदिर बाहर निकाला था. ठीक 100 साल बाद यानी 5 अगस्त 2026 को धराली में आई आपदा में मंदिर फिर से दब गया है. इसे दोबारा निकालने का प्रयास नवरात्रि के पहले दिन से शुरू किया गया है.
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