- धराली आपदा को 1 साल हो चुका है. लेकिन अपनों को खोने, रोजगार और आशियाना छिनने का दर्द आज भी वैसा ही है.
- इस त्रासदी में 70 से अधिक लोगों की मौत हुई और करोड़ों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई.
- स्थानीय लोगों ने बताया कि इस तबाही में करीब 112 होटल , रिसोर्ट, दुकानें सब कुछ मलबे में दब गए.
Dharali Disaster: 5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धराली में आई आपदा को आज एक साल हो गया. लेकिन आज भी आपदा के जख्म वैसे ही है, 5 अगस्त 2025 को खीरगंगा में आई भीषण बाढ़ ने धराली, हर्षिल और आसपास के क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई थी. सैकड़ों परिवारों की आजीविका उजड़ गई, कई होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान मलबे में समा गए और 70 से अधिक लोगों की जान चली गई. एक साल बाद भी पुनर्निर्माण की रफ्तार बेहद धीमी है और प्रभावित लोग अब भी सरकार से स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
जिस दिन आई तबाही, उसी दिन चल रहा था मेला
धराली में पिछले साल जिस दिन तबाही आई, उसी दिन गांव में भगवान सोमेश्वर देवता का मेला चल रहा था. अधिकांश ग्रामीण मेले में शामिल थे, जबकि बाजार में सामान्य से कम भीड़ थी. लगातार बारिश के बीच अचानक धराली गांव के ऊपर खीरगंगा में भीषण जलप्रलय और मलबे का सैलाब आया, जिसने देखते ही देखते धराली बाजार, कई होटल, दुकानें, बगीचे और मकानों को अपनी चपेट में ले लिया.
धराली आपदा को 1 साल बीत चुका है. लेकिन अपनों को खोने और गुजरते आशियाना का दर्द आज भी लोगों के दिलों में इस तरह से है जिस तरह से करीब एक साल पहले यह आपदा आई थी.

70 से अधिक लोगों की हुई थी मौत
आपदा इतनी भयानक थी कि पूरा इलाका मलबे में तब्दील हो गया. धराली, हर्षिल, आर्मी कैंप के आसपास का क्षेत्र और कई पुल भी इस आपदा की चपेट में आ गए. राहत और बचाव कार्य में सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और प्रशासन की टीमों ने युद्धस्तर पर अभियान चलाया, लेकिन भारी मलबे में दबे कई लोगों को बचाया नहीं जा सका. इस त्रासदी में 70 से अधिक लोगों की मौत हुई और करोड़ों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई.
स्थानीय जेडी पंवार ने बताया- 112 होटल, रिसोर्ट, दुकानें सब मलबे में दब गए
धराली के निवासी जेडी पंवार ने NDTV से बातचीत में बताया कि धराली में आई आपदा के बाद हालात वैसे ही है, जैसे आपदा के समय थे. जेडी पंवार कहते है कि इस आपदा में धराली का बाजार बह गया और उसमें बने करीब 112 होटल , रिसोर्ट, दुकानें सब कुछ मलबे में दब गए. सबका रोजगार छिन गया है क्योंकि धराली में 12 महीने पर्यटक आते थे.

लोग सरकार से कर रहे जमीन की मांग
पवार कहते हैं कि अब हम उन्हें अपना गुजर बसर खेती-बाड़ी और सेब के बाग से ही अपना पेट पालना पड़ रहा है. क्योंकि आपदा में उनका भी होटल पूरी तरह से मलबे में दब गया था. जेडी पंवार का कहना है कि हम चाहते हैं, हमें जमीन दी जाए ताकि हम अपना घर बना पाए और अपना रोजगार भी दोबारा से शुरू कर पाए लेकिन अभी तक उतनी मदद नहीं मिल पाई है जितनी मदद हमें चाहिए थे.
होटल मलबे में दब गया, अब मामूली खेती और सेब के बाग से चल रहा जीवन
जेडी पंवार की तरह ही धराली के रजत पंवार भी अपना होटल व्यवसाय करते थे. उनका भी धराली बाजार में घर और होटल था. लेकिन 5 अगस्त को आई आपदा में उनका घर और होटल सब कुछ बह गया. अब उनके पास रोजगार के कोई साधन नहीं है, सिर्फ जो गांव में खेत और सब का बाग है. उसी के सहारे अब वह अपनी जिंदगी आगे बढ़ा रहे हैं.

रजत का कहना है कि ऐसे कई लोग हैं, जिनका रोजगार पूरी तरह से छिन गया है. अब वह अपने आप को कैसे अपने पैरों पर खड़ा करें क्योंकि अगर उनका होटल या रिजॉर्ट जैसा छोटा व्यवसाय नहीं शुरू होता तो उनकी स्थिति काफी खराब हो जाएगी.
एक साल बाद भी पुनर्वास का वादा नहीं हुआ पूरा
आपदा के बाद मुख्यमंत्री, मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावितों को पुनर्वास, पुनर्निर्माण और आजीविका बहाल करने का भरोसा दिया था. सरकार ने मकानों और होटलों के नुकसान का मुआवजा भी वितरित किया, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थायी पुनर्निर्माण कार्य जमीन पर दिखाई नहीं देता. प्रभावित परिवार आज भी अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं.

विधायक बोले- पुनर्वास के लिए 70 करोड़ रुपए स्वीकृत
स्थानीय विधायक सुरेश चौहान का कहना है कि पुनर्निर्माण के लिए लगभग 70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं और करीब 300 करोड़ रुपये का विस्तृत प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है. इसके बावजूद धराली और हर्षिल क्षेत्र में पुनर्निर्माण कार्य अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया है. प्रभावित लोगों का कहना है कि एक साल बाद भी वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और उनकी उम्मीदें अब भी सरकार पर टिकी हुई हैं.
स्थाही पुनर्वास का इंतजार कर रहे लोग
5 अगस्त 2026 को धराली आपदा को पूरे एक वर्ष हो चुका है. लेकिन यहां का इलाका आज भी उस भीषण त्रासदी की गवाही दे रहा है. मलबे के निशान अब भी मौजूद हैं और कई परिवार आज भी स्थायी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं. सरकार ने मुआवजा तो दिया, लेकिन पुननिर्माण और लोगों की आजीविका को पूरी तरह बहाल करने का काम अभी अधूरा है. धराली के लोगों की निगाहें वतर्मान में भी सरकार की ओर टिकी हैं कि आखिर कब उनके जीवन में फिर से सामान्य स्थिति लौटेगी.
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