पत्रकार सौम्या विश्वनाथन के पिता का निधन, बेटी को 2 हफ्ते पहले ही दिलवाया था न्याय

30 सितंबर, 2008 को सौम्या सुबह 3 बजे के थोड़ी देर बाद अपने झंडेवालान कार्यालय से दिल्ली के वसंत कुंज स्थित अपने घर के लिए अकेले गाड़ी चलाकर निकलीं. पुलिस ने बताया कि रास्ते में उसने एक कार को ओवरटेक किया.

पत्रकार सौम्या विश्वनाथन के पिता का निधन, बेटी को 2 हफ्ते पहले ही दिलवाया था न्याय

टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन (Soumya Vishwanathan) के पिता की शनिवार को मृत्यु हो गई. पूर्व पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की 2008 में सितंबर की रात को काम से लौटते समय दिल्ली में हत्या कर दी गई थी. दिल्ली की एक अदालत ने 2 सप्ताह पहले ही टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन मर्डर केस में चारों दोषियों को सजा सुनाई.

30 सितंबर, 2008 की है घटना

पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की 30 सितंबर 2008 को हत्या कर दी गई थी. 25 वर्षीय पत्रकार सौम्या विश्वनाथन हेडलाइंस टुडे में न्यूज प्रोड्यूसर थीं. वे एक ब्रेकिंग न्यूज को लेकर टीम की मदद के लिए देर तक न्यूज रूम में रुकी थीं. सौम्या सुबह 3 बजे के थोड़ी देर बाद अपने झंडेवालान कार्यालय से दिल्ली के वसंत कुंज स्थित अपने घर के लिए अकेले गाड़ी चलाकर निकलीं. पुलिस ने बताया कि रास्ते में उसने एक कार को ओवरटेक किया. कार में रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक और अजय कुमार सवार थे, जिन्हें मामले में दोषी ठहराया गया है.

मामले की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों ने कहा कि घर लौटते समय सौम्या ने कपूर, शुक्ला, कुमार और मलिक की कार को ओवरटेक किया था. पुलिस ने बताया कि चारों दोषियों ने देखा कि उन्हें ओवरटेक करने वाली महिला ड्राइवर अकेली है. इसके बाद वे उसका तेजी से पीछा करने लगे. पहले तो उन्होंने सौम्या की कार को रोकने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं रुकी. इसके बाद कपूर ने उस पर देसी हथियार से गोली चला दी. गोली उसके सिर में लगी, जिससे उसकी तुरंत मौत हो गई. उनकी कार उनके घर के पास नेल्सन मंडेला मार्ग पर एक डिवाइडर से टकराकर रुक गई.

एक अधिकारी ने कहा कि हत्यारे घटनास्थल से भाग गए थे लेकिन 20 मिनट बाद वे पीड़ित की स्थिति की जांच करने के लिए वापस लौटे थे. वहां उन्होंने जब पुलिस कर्मियों को देखा तो वे भाग गए.

25 नवंबर को सुनाई गई सज़ा

चार दोषियों - रवि, अमित, बलजीत और अजय को 18 अक्टूबर को दोषी पाया गया और 25 नवंबर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. पांचवें दोषी, अजय सेठी को उनकी मदद करने के लिए तीन साल की जेल हुई. अदालत ने मौत की सज़ा देने से इनकार करते हुए कहा कि अपराध दुर्लभतम से भी दुर्लभतम नहीं है. सौम्या की मां माधवी विश्वनाथन ने कहा कि वह फैसले से "संतुष्ट" हैं, लेकिन "खुश" नहीं हैं.

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