- 'तरंग शक्ति-2026' में अमेरिका 6 F-35A के साथ KC-135 टैंकर लाया है.
- फ्रांस ने 7 राफेल के साथ A400M और MRTT टैंकर उतारे हैं.
- भारत ने सुखोई-30 MKI, स्वदेशी तेजस, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर से ताकत दिखाई.
राजस्थान के जोधपुर में 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक इंडियन एयरफोर्स का बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति-2026' चल रहा है. इसमें भारत सहित 8 देशों के 80 से ज्यादा विमान शामिल हैं, जबकि 32 देश पर्यवेक्षक हैं. अमेरिका के 6F-35A पहली बार भारत में अभ्यास कर रहे हैं. फ्रांस के 7 राफेल, UAE के F-16 और भारत के सुखोई-30 MKI, तेजस, मिराज, मिग-29, जगुआर के साथ AWACS भी हिस्सा ले रहे हैं. भारतीय वायुसेना का यह युद्धाभ्यास जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन और आसपास के एयरबेस पर हो रहा है. इसमें भारत सहित आठ देश अपने विमान और सैन्य संसाधन लेकर हिस्सा ले रहे हैं, जबकि 32 देश पर्यवेक्षक के तौर पर जुड़े हैं. कुल मिलाकर करीब 40 देशों की भागीदारी है और 80 से ज्यादा विमान अभ्यास का हिस्सा हैं.

सबसे ज्यादा F-35 की चर्चा
इस बार अमेरिका के छह F-35A पहली बार भारत में इस तरह के बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास का हिस्सा बने हैं. F-35 को पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान कहा जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसे दुश्मन की नजर से बचकर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसके अलावा विमान अपने आसपास की स्थिति को समझने के लिए कई तरह के सेंसर का इस्तेमाल करता है. आसान भाषा में कहें तो पायलट को सिर्फ सामने दिखाई देने वाली चीजों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. यही वजह है कि F-35 को मॉडर्न हवाई जंग के लिए बेहद अहम विमान माना जाता है.
अमेरिका F-35 के साथ KC-135 टैंकर विमान भी लेकर आया है. टैंकर हवा में उड़ते लड़ाकू विमानों को ईंधन देने का काम करता है. यानी लड़ाकू विमान को बार-बार एयरबेस लौटने की जरूरत कम पड़ती है.

भारत और फ्रांस दोनों के पास राफेल
तरंग शक्ति में फ्रांस के सात राफेल भी शामिल हैं. राफेल भारत के लिए नया विमान नहीं है. भारतीय वायुसेना के पास भी राफेल है. ऐसे में इस अभ्यास में एक ही विमान उड़ाने वाले भारतीय और फ्रांसीसी पायलटों को साथ काम करने का मौका मिल रहा है. राफेल की खासियत है कि यह सिर्फ हवा में दूसरे विमान से मुकाबले के लिए नहीं बना है. इसका इस्तेमाल जमीन पर मौजूद टार्गेट्स के खिलाफ भी किया जा सकता है. यानी एक ही विमान अलग-अलग तरह के मिशन कर सकता है.
फ्रांस राफेल के अलावा A400M ट्रांसपोर्ट विमान और MRTT टैंकर भी लेकर आया है. इससे अभ्यास में सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि सैनिकों और सामान को तेजी से पहुंचाने और हवा में ईंधन भरने जैसी क्षमताएं भी शामिल हो रही हैं.
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मैदान में यूएई का F-16 भी मौजूद...
यूएई के छह F-16 भी तरंग शक्ति का हिस्सा हैं. F-16 दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले लड़ाकू विमानों में से एक है. यह हल्का और तेज मल्टीरोल फाइटर है. यानी इसे अलग-अलग तरह के मिशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. यूएई के F-16 आधुनिक रूप में अपग्रेड किए गए हैं और इस अभ्यास में इनकी मौजूदगी से भारतीय पायलटों को एक अलग ऑपरेशनल अनुभव मिलेगा.
भारत की अपनी पूरी ताकत
भारत ने भी इस अभ्यास में अपने कई प्रमुख लड़ाकू विमान उतारे हैं. सुखोई-30 MKI भारतीय वायुसेना का भारी और लंबी दूरी तक जाने वाला प्रमुख लड़ाकू विमान है. इसे हवा से हवा और हवा से जमीन, दोनों तरह के मिशन में इस्तेमाल किया जा सकता है.
इसके अलावा, तेजस भारत में बनाया गया हल्का लड़ाकू विमान है. यह भारतीय वायुसेना की स्वदेशी लड़ाकू क्षमता का एक अहम हिस्सा है. मिराज-2000 भारतीय वायुसेना का पुराना लेकिन बेहद भरोसेमंद लड़ाकू विमान माना जाता है. वहीं, मिग-29 मुख्य रूप से हवा में मुकाबले के लिए जाना जाता है. जगुआर की पहचान जमीन पर हमला करने वाले विमान के तौर पर रही है. यानी तरंग शक्ति में भारत ने हल्के, भारी, पुराने और नए कई तरह के लड़ाकू विमानों को एक साथ उतारा है.
असली ताकत सिर्फ लड़ाकू विमान नहीं
आसमान में लड़ाकू विमान जितने अहम हैं, उतने ही जरूरी वे विमान भी हैं, जो उन्हें ऊपर से जानकारी और मदद देते हैं. भारत के AWACS और AEW&C विमान इसी काम में अहम भूमिका निभाते हैं. इन्हें आसान भाषा में आसमान में उड़ता हुआ निगरानी और कमांड सेंटर समझ सकते हैं. ये दूर तक हवाई गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करते हैं और लड़ाकू विमानों को जरूरी जानकारी पहुंचाते हैं. यानी एक तरफ F-35, राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमान हैं, तो दूसरी तरफ उन्हें जानकारी और सहायता देने वाले विमान.
असली परीक्षा ‘साथ उड़ने' की
वायुसेना के सह वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के मुताबिक, तरंग शक्ति का मकसद सिर्फ अलग-अलग देशों के विमानों को एक साथ उड़ाना नहीं है. मिशन से पहले योजना बनाई जाएगी, उसके बाद विमान अपने-अपने मिशन करेंगे और फिर डीब्रीफिंग होगी. इसमें सभी टीमें बताएंगी कि क्या हुआ और उससे क्या सीखा गया. यानी तरंग शक्ति का असली मकसद है- साथ उड़ना, साथ काम करना और एक-दूसरे से सीखना और यही इस अभ्यास को खास बनाता है. क्योंकि आधुनिक हवाई लड़ाई में सिर्फ ताकतवर विमान होना काफी नहीं है.
यह भी जरूरी है कि अलग-अलग विमान और उनकी टीमें जरूरत के वक्त एक-दूसरे को समझें, सही जानकारी साझा करें और एक ही मिशन के लिए साथ काम कर सकें. तरंग शक्ति-2026 में जोधपुर के आसमान पर इसी क्षमता की बड़ी परीक्षा हो रही है.
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