"निराश हूं, लेकिन हतोत्साहित नहीं...": अनुच्छेद 370 पर SC के फैसले को लेकर उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र के लोग शीर्ष अदालत की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा दिये गये इस फैसले से खुश नहीं हैं.

खास बातें

  • अनुच्छेद 370 अस्थाई प्रावधान था : SC
  • 370 को हटाने का अधिकार जम्मू-कश्मीर के एकीकरण के लिए है : CJI
  • हम 370 को निरस्त करने में कोई दुर्भावना नहीं पाते : CJI
श्रीनगर:

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले से "निराश" हैं, लेकिन हतोत्साहित नहीं हैं.

उन्होंने सोशल मीडिया 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, ''निराश हूं लेकिन हतोत्साहित नहीं. संघर्ष जारी रहेगा. यहां तक पहुंचने में बीजेपी को दशकों लग गए. हम लंबी दौड़ के लिए भी तैयार हैं.''

डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी (डीपीएपी) के अध्यक्ष गुलाम नबी आज़ाद ने सोमवार को संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को "दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण" बताया, लेकिन कहा कि "हमें इसे स्वीकार करना होगा". आज़ाद ने यहां संवाददाताओं से कहा, "यह (अदालत का फैसला) दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है."

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को सुप्रीम कोर्ट द्वारा वैध ठहराए जाने पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा (Priyanka Gandhi) ने कहा, ''हम इसका पूरी तरह से स्वागत करते हैं जब 370 हटाया गया था तभी हमने इसका स्वागत किया था क्योंकि यह अस्थाई था उस समय पंडित नेहरू ने भी यही कहा था. अब बात है कि जम्मू-कश्मीर का स्टेटहुड बहाल होगा. जल्द से जल्द चुनाव होंगे. लोगों की आवाज जल्द से जल्द विधानसभा में गूंजेगी.''

उन्होंने आगे कहा, ''मैं बस इतना कहूंगी कि 370 हटाना जरूरी था. उसके हटाने के बाद सरकार ने तीन वादे किए थे जल्द से जल्द  चुनाव होंगे. कश्मीरी भाई बहन वापस लौटेंगे आतंकी हमले खत्म होंगे. आतंकी हमले खत्म नहीं हुए हैं, भाई-बहन वापस नहीं गए हैं. अब कश्मीरी भाइयों को एक नया कश्मीरी माइग्रेंट की उपाधि देने जा रहे हैं. देखिए इंडिया गठबंधन में यह नहीं है कि आप हां बोलिए तो हां और न बोलिए तो न. उठो तो उठो सब पार्टी की अपनी अपनी राय है.''

PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को सुप्रीम कोर्ट द्वारा वैध ठहराए जाने पर PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा, "हिम्मत नहीं हारे, उम्मीद न छोड़े, जम्मू-कश्मीर ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. सुप्रीम कोर्ट का आज का फैसला यह एक मुश्किल पड़ाव है, यह मंजिल नहीं है... हमारे विरोधी चाहते हैं कि हम उम्मीद छोड़कर इस शिकस्त को स्वीकार करें... यह हमारी हार नहीं यह देश के धैर्य की हार है..."

असदुद्दीन ओवैसी

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को सुप्रीम कोर्ट द्वारा वैध ठहराए जाने पर AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "हम इस फैसले से निराश हैं..."

सज्जाद लोन

जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन ने कहा, "अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला निराशाजनक है. न्याय एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के लोगों से दूर है. अनुच्छेद 370 भले ही कानूनी रूप से खत्म कर दिया गया हो, लेकिन यह हमेशा हमारी राजनीतिक आकांक्षाओं का हिस्सा रहेगा." .

कांग्रेस नेता कर्ण सिंह

सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने वाले राष्ट्रपति के आदेश की वैधता को बरकरार रखने पर कांग्रेस नेता कर्ण सिंह ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने बहुत बारीकी से हर एक चीज को देखा है. सभी परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट उस नतीजे पर पहुंची है. मैं फैसले का स्वागत करता हूं...मेरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रार्थना है कि जल्द से जल्द हमें राज्य का दर्जा दे दें. जरूरी नहीं है कि पहले चुनाव हो फिर राज्य का दर्जा मिले. चुनाव हो तो राज्य के लिए हो, केंद्र शासित प्रदेश के लिए क्यों हों. चुनाव सिंतबर तक कराने की बात कही गई है ये अच्छी बात है."
 

उच्चतम न्यायालय ने पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए सोमवार को कहा कि अगले साल 30 सितंबर तक विधानसभा चुनाव कराने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाए.

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने अपने और न्यायमूर्ति बी आर गवई एवं न्यायमूर्ति सूर्यकांत की ओर से फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था और राष्ट्रपति के पास इसे रद्द करने की शक्ति है.

शीर्ष अदालत ने पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को अलग करने के फैसले की वैधता को भी बरकरार रखा. केंद्र सरकार ने इस दिन अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था और पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में विभाजित कर दिया था.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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