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जामिया में जीत गए स्टूडेंट, तिरंगा लहरा रातभर मनाया जश्न, हर मांग मानी तो बोले- सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के प्रशासन ने छात्र संघ को बहाल करने के लिए एक समय-सीमा तय कर दी है. इसके साथ ही, दो दशकों के बाद एक छात्र संघ का चुनाव कराने के लिए तारीखें भी तय हो गई हैं. जानिए स्थापना दिवस के दिन प्रशासन और छात्रों के बीच कैसे बात बनी.

जामिया में जीत गए स्टूडेंट, तिरंगा लहरा रातभर मनाया जश्न, हर मांग मानी तो बोले- सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा
प्रदर्शन सफल होने के बाद तिरंगे के साथ जश्न मनाते जामिया के छात्र (फोटो- PTI)

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया के बच्चों ने अपनी आवाज, अपनी जिद्द के आगे यूनिवर्सिटी को झुकने को मजबूर कर दिया. जामिया में इस समय स्टूडेंट जश्न मना रहे हैं, क्योंकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने और लागू करने के लिए 15 मई, 2027 की समय-सीमा तय कर दी. इससे छात्र संघ की बहाली का रास्ता साफ हो गया है. 2006 में चुनी हुई छात्र यूनियन को भंग कर दिया गया था, जिसके बाद से यह व्यवस्था निष्क्रिय पड़ी थी. अब यह स्टूडेंट छात्र संघ के चुनाव के लिए एक तय समय-सीमा लेकर वापस गए हैं. पिछले 18 दिनों से चल रहा उनका प्रोटेस्ट सफल हो गया है और अब उन्होंने इंकलाब के नारों के साथ प्रदर्शन खत्म कर दिया है.

"जामिया के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा"

भूख हड़ताल में बैठने वाले छात्र प्रदर्शनकारियों में से एक एबिन बेसिल ने इस नतीजे को छात्रों की एक बड़ी जीत बताया. बेसिल ने पत्रकारों से कहा, "यह छात्रों के लिए एक बड़ी जीत है... इसे जामिया के इतिहास और विरासत में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा."

खास बात यह भी है कि अपने स्थापना दिवस के मौके पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की मांगे मानीं. उसने यह भी घोषणा की कि 8 नवंबर से सभी क्लास और परीक्षाएं वापस कैंपस में होंगी. इससे पहले, विरोध-प्रदर्शनों के चलते इन्हें ऑनलाइन मोड तक सीमित कर दिया गया था.

वहीं पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र रेहान मेवाती ने कहा कि जामिया प्रशासन ने सच्चाई का साथ दिया है. मेवाती ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, "सच्चाई की जीत हुई है. यह छात्रों की जीत है. मैं पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर था. मेरी तबीयत बिगड़ रही थी. लेकिन जामिया प्रशासन ने हमारी मांगें मान लीं और सच्चाई का साथ दिया. हम सच्चाई के लिए लड़ रहे थे. इंकलाब जिंदाबाद."

यूनिवर्सिटी ने क्या मांगे मानी हैं?

  • जामिया मिलिया इस्लामिया प्रशासन ने छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने और लागू करने के लिए 15 मई, 2027 की समय-सीमा तय की.
  • अगले शैक्षणिक सत्र (एकैडमिक सेशन) के शुरू होने के छह सप्ताह के भीतर छात्र संघ का चुनाव कराया जाएगा.
  • छात्र संघ के संविधान का मसौदा तैयार करने में छात्र प्रतिनिधियों और फैकल्टी के साथ-साथ प्रोफेसरों या कानूनी विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा.
  • विरोध-प्रदर्शन के दौरान जिन छात्रों को निष्कासित या निलंबित किया गया था, या जिन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस ले लिया गया है.
  • 8 नवंबर से सभी क्लास और परीक्षाएं वापस कैंपस में होंगी

कॉलेज के रजिस्ट्रार प्रोफेसर मो. महताब आलम रिज़वी ने कहा है कि हमें छात्रों की ओर से 3 मांगें मिली थीं और हमने उनकी तीनों मांगें मान ली हैं. 

कैसे बनी बात?

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के सांसद हारिस बीरन ने बताया कि वह पिछले 2-3 दिनों से छात्र प्रतिनिधियों और कॉलेज के वाइस चांसलर से बातचीत कर रहे हैं. ANI से बात करते हुए, बीरन ने बताया कि रजिस्ट्रार और डीन के साथ बैठक के बाद वाइस चांसलर ने छात्रों की मांगें मान ली हैं.

सांसद बीरन ने कहा, "यह भूख हड़ताल पिछले 18 दिनों से चल रही थी. मैंने छात्र प्रतिनिधियों से बात की. मैंने वाइस चांसलर से भी बात की. मैं पिछले 2-3 दिनों से फोन पर उनसे बातचीत कर रहा था. आज मैं लगभग 4 बजे कैंपस पहुंचा. सबसे पहले मेरी वाइस चांसलर से चर्चा हुई. उन्होंने बताया कि क्या समस्याएं हैं और उन्हें कैसे सुलझाया जा सकता है. इसके बाद मैं वापस छात्र प्रतिनिधियों के पास गया और उनके साथ विस्तार से बातचीत की. उनकी 3 मुख्य मांगें थीं... मैं इन मांगों को लेकर वापस वाइस चांसलर के पास गया. उन्होंने और रजिस्ट्रार और डीन ने आपस में बैठक की. फिर वे बाहर आए और बताया कि उन्होंने सभी मांगें मान ली हैं..."

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