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शादी के बाद पति को छोड़ा, सेना के जवानों पर टारगेट; जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी जयपुर की बबीता का क्या था प्लान

जयपुर की महिला बबीता धाकड़ से मिलिट्री इंटेलिजेंस और राजस्थान ATS की संयुक्त टीमें जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी बबीता धाकड़ से पूछताछ कर रही हैं. बबीता के मोबाइल की जांच में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने की बात सामने आई है.

जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी जयपुर की बबीता का क्या था प्लान

जयपुर से गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद की स्लीपर सेल की सदस्य बबीता धाकड़ को नई-नई जानकारी सामने आ रही है. बबीता धाकड़ गिरफ्तारी के बाद अब 7 दिनों की एटीएस रिमांड पर है. सुरक्षा एजेंसी की पूछताछ में सामने आया कि स्लीपर सेल की सदस्य बबीता करीब 2 साल से पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी हुई थी. जांच एजेंसियों को पता चला कि बबिता धाकड़ को भारतीय सेना के जवानों पर टारगेट करने के लिए ट्रेनिंग दी गई थी. वह अपने जाल में फंसाने के लिए सेना के कई जवानों से संपर्क भी की थी. जैश-ए-मोहम्मद के महिला विंग जमात-उल-मुमिनात' से भारत में युवतियों को जोड़ने के लिए बबीता को जिम्मेदारी सौंपी गई थी. वह देश के कई राज्यों में कुछ युवतियों का ब्रेनवॉश कर रही थी. 

बबीता की आत्मघाती हमले की ट्रेनिंग

जांच में सामने आया कि जयपुर की बबीता को आत्मघाती हमले की ट्रेनिंग दी जा रही थी. जैश कमांडर उसे ट्रेनिंग दे रहा था. बबीता के फेसबुक अकाउंट से जुड़े कई ऐसे अकाउंट मिले हैं, जो आतंकवादी संगठन से जुड़े हैं. एक प्रोफाइल पर आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का झंडा लगा हुआ मिला. साथ ही बबीता धाकड़ से जुड़े कई ऐसे फेसबुक अकाउंट मिले जो जिस पर आतंकवादियों जैसी हथियार के साथ संदिग्ध गतिविधियां पोस्ट मिलीं. इसके अलावा फेसबुक अकाउंट पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद व आईएसआई के फ्लेग व उनसे जुड़े फोटो और वीडियो पोस्ट मिले हैं.

बबीता धाकड़ मूल रूप से गंगापुर सिटी की रहने वाली है. वह जयपुर के वाटिका स्थित घर पर अपने मां-बाप के साथ रह रही थी.  जानकारी के मुताबिक, उसकी शादी हो चुकी है, पर उसने पति को छोड़ दिया. जिसकी वजह से तलाक की प्रक्रिया अभी चल रही है.
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जैश-ए-मोहम्मद से कैसे जुड़ी बबीता

जब  बबीता से जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ने का कारण पूछ गया कि वह क्यों और कैसे जुड़ी? तो उसने बताया कि शुरू में तो उसने सोशल मीडिया पर संपर्क किया था. बाद में उनमें से कुछ उसके अच्छे दोस्त बन गए. उसने बताया कि इनमें से अबू-उबैदाह से उसके भावनात्मक संबंध बन गए. बबीता के मुताबिक, अबू-उबैदाह उससे शादी करना चाहता था. जिसके लिए उसने और पाकिस्तान के एक मुफ्ती ने हिंदू धर्म से मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए कहा. जिसके लिए मुफ्ती ने नमाज, सना व कुरान पढ़ने व अमल करने के लिए कहा था. बबीता ने बताया कि उसे ऑनलाइन कलमा पढ़ाकर मुस्लिम बना दिया था.

इसके बाद बबीता ने अपना नाम खदीजा रख लिया. जैश-ए-मोहम्मद में काम करने के लिए बबीता को पाकिस्तान बुलाना चाह रहे थे. जिस पासपोर्ट और वीजा बनवाने के लिए बबीता ने ऑनलाइन सर्च किया था. उसकी पाकिस्तान जाने के लिए अबू-उबैदाह व मुफ्ती साहब से खर्चे के बारे में बात हुई थी. जिसमें उन्होंने नेपाल, सऊदी अरब या यूएई के रास्ते से होकर पाकिस्तान बुलाने व खर्चा क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से देने के लिए कहा था.

तीन सिम कार्ड चलाती थी बबीता

जानकारी के अनुसार, बबीता ने अपने नाम से 3 मोबाइल नंबर ले रखे थे. तीनों नवंबर को वह चलाती थी. जब सुरक्षा एजेंसियों ने बबीता के मोबाइल की जांच की तो उसमें वाट्सएप और फेसबुक पर जैश-ए-मोहम्मद समेत अन्य आतंकवादी संगठन जुड़े होने की बात सामने आई. उसके वाट्सएप पर कई ऐसे नंबर से कॉल या मैसेज मिले जो पाकिस्तानी थे. बबीता के मोबाइल में मौजूद नंबर के आधार पर पता चला कि उसका संपर्क जैश कमांडर कारी जरार से था. कारी जरार नवंबर 2016 में जम्मू में बलिनी विज के पास भारतीय सेना के कैंप पर हमले में शामिल था. उस समय हमले में सेना के 6 जवान शहीद हुए थे. अधिकारियों के मुताबिक, बबीता के यूसुफ अज़हर से जुड़े होने के भी बात पता चली है. यूसुफ अज़हर को गोरी' के नाम से भी जाना जाता है और वह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के संस्थापक मसूद अज़हर का साला है.

वहीं, ATS एसपी मनीष त्रिपाठी ने बताया कि महिला से पूछताछ की जा रही है. अभी जांच शुरुआती दौरे में है. जितने भी डिजिटल साक्ष्य मिले हैं. उनकी पुष्टि होनी बाकी है. एटीएस के अनुसार, लेकिन प्रारंभिक तौर पर यह बात सामने आई है कि पिछले छह-सात महीनों से वे इसका धर्म परिवर्तन करवाना चाहते थे और उसकी मदद से भारत में घटनाएं करवाना चाहते थे. 

बबीता से जांच एजेंसियों की पूछताछ

जांच एजेंसियां यह भी जानने की कोशिश में हैं कि जयपुर ग्रामीण, सवाई माधोपुर और मिलिट्री ठिकानों के आस-पास के इलाकों में उसकी कथित गतिविधियों के दौरान क्या सीमा पार कोई संवेदनशील जानकारी भेजी गई थी. इधर राजस्थान पुलिस ने उन संभावित स्थानीय सहयोगियों की पहचान करने के लिए बड़े पैमाने पर जांच शुरू कर दी है, जिन्होंने लॉजिस्टिकल सपोर्ट, इंटरनेट एक्सेस, सिम कार्ड या आर्थिक मदद दी हो सकती है. अधिकारियों को शक है कि इस नेटवर्क से और भी लोग जुड़े हो सकते हैं, और ATS की टीमें चल रही जांच के तहत राज्य भर में कई जगहों पर तलाशी और छापेमारी कर रही हैं.

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