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This Article is From Oct 15, 2025

जलती बस में खत्म हो गईं 21 जिंदगियां, जैसलमेर बस हादसे का जिम्मेदार कौन

स्लीपर बस को मॉडिफाई करके एसी बस में कन्वर्ट किया गया. बस तो नई थी लेकिन इसमें ना इमरजेंसी गेट था और ना ही विंडो हैमर. इसी महीने एक तारीख को बस का रजिस्ट्रेशन हुआ था. बस को 9 अक्टूबर को ऑल इंडिया का परमिट भी मिल गया. मंगलवार को इसका महज चौथा ट्रिप था, लेकिन ये खाक हो गई. 

  • जैसलमेर से जोधपुर जा रही एसी स्लीपर बस में आग लगने से 21 की मौत और कई लोग झुलसे
  • हादसा वार मेमोरियल के पास हुआ जहां बस में 57 लोग सवार थे और आग लगने के कारण गेट लॉक हो गया था
  • बस को हाल ही में मॉडिफाई करके एसी बस बनाया गया था, लेकिन इसमें इमरजेंसी गेट और विंडो हैमर मौजूद नहीं थे
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राजस्थान से बस में आग और 21 जिंदगियां खत्म हो गई. बस जलकर खाक हो गई और इस बस के जलने में इक्कीस जाने चली गई. और है. बस पूरी तरह से जलकर राख हो गई उसके बाद क्रेन मंगाई गई, जिसने इसे हटाया है. इसमें पचास से ज़्यादा मुसाफिर सवार थे, जिनमें से इक्कीस की मौत हुई है. इसमें जो शव बस से निकले वो ऐसी हालत में थे जिन्हें देखना मुश्किल था, बहुत से शव बस से चिपक गए थे. एक सेना का जवान भी इस बस में परिवार के साथ सवार था. पूरा परिवार इस बस में था और सभी की मौत हो गई. पति पत्नी और दोनों बच्चों की मौत हो गई. सेना के जवान महेंद्र मेघवाल, पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे के साथ दिवाली की छुट्टियां मनाने जा रहे थे, लेकिन नियति को ये मंजूर न था, बस में आग लगी और उनका पूरा परिवार खत्म हो गया. एसी बस बीच सड़क आग का गोला बन गई, जिसमें महेंद्र और उनके परिवार के अलावा सोलह और लोग जलकर खाक हो गए. कई बसों में ये होता है कि ग्लास तोड़ने के लिए यंत्र लगा होता है. ये बस वाले हद से ज्यादा सवारी भर के ये चलते हैं. उसमें कोई रेगुलेटरी नहीं है कोई इसमें कोई नियम कायदे नहीं है.

कैसे हुआ ये हादसा

एसी स्लीपर बस में मंगलवार दोपहर तीन बजकर तीस मिनट पर आग लग गई. बस जैसलमेर से जोधपुर जा रही थी उसमें 57 लोग सवार थे. हादसा जैसलमेर से करीब 15 किलोमीटर दूर वार मेमोरियल के पास हुआ. हादसे के वक्त 19 लोगों की मौत बस के अंदर ही हो गई थी. बस में कई लाश एक दूसरे के ऊपर चिपकी हुई मिली. चश्मदीदों के मुताबिक आग लगने से बस का गेट लॉक हो गया था. आर्मी ने जेसीबी लगाकर बस का गेट तोड़ा है और लोगों को रेस्क्यू किया है. झुलसे यात्रियों में 8 साल के मासूम से लेकर 89 साल के बुजुर्ग तक फंस गए थे. स्लीपर बस को मॉडिफाई करके एसी बस में कन्वर्ट किया गया. बस तो नई थी लेकिन इसमें ना इमरजेंसी गेट था और ना ही विंडो हैमर. इसी महीने एक तारीख को बस का रजिस्ट्रेशन हुआ था. बस को 9 अक्टूबर को ऑल इंडिया का परमिट भी मिल गया. मंगलवार को इसका महज चौथा ट्रिप था, लेकिन ये खाक हो गई. चौथे ट्रिप में आग लगने का कारण एसी में शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है. जैसे ही शॉर्ट सर्किट हुआ पीछे लगे एसी की यूनिट में आग लग गई.

चश्मदीदों ने क्या कुछ बताया

चश्मदीदों के मुताबिक बस पूरी भरी हुई थी लोग गैलरी में भी बैठे थे. बीच के रास्ते में भी लोग बैठे थे. मरने वालों की पहचान के लिए परिजनों के अब डीएनए लिए जाएंगे. डीएनए से शवों की पहचान होगी. 15 लोग गंभीर है, 5 लोगों को जोधपुर में वेंटिलेटर पर रखा गया है. इस बीच राजस्थान सरकार ने बस हादसे में एक्शन लिया है. चित्तौड़गढ़ के कार्यवाहक डीटीओ को सस्पेंड कर दिया गया है. सहायक प्रशासनिक अधिकारी को भी सस्पेंड कर दिया है. बस की बॉडी को चित्तौड़गढ़ में परिवहन विभाग ने अप्रूव किया था, बस मालिक और ड्राइवर के खिलाफ जैसलमेर में केस दर्ज किया गया है. ये भी कहा जा रहा है कि बस में पटाखे भी रखे हुए थे. लोगों ने कहा कि हमारे को पता चला फिर हमको रात के वहां गए जोधपुर, रात को वही डेथ हो गई, ये बहुत गरीब परिवार है और सरकार ने दो लाख रुपए का मुआवजा दिया है वो तो ऊंट के मुह में जीरा है. सरकार चाहे तो इनको एक करोड़ रुपए का मुआवजा मिलना चाहिए.  सिर्फ ये एक हादसा नहीं, जयपुर में भी एक बस में आग लग गई. जयपुर की तस्वीर सामने आई, बस में मुसाफिर जा रहे थे आग लगी तो लोग फौरन बस से उतरे.

आखिर बस क्यों इतनी खतरनाक होती जा रही

बस आम तौर पर भारतीय स्लीपर बसों में 30 से 60 सीट होती है. सभी बर्थ की लंबाई करीब छह फीट और चौड़ाई दो दशमलव छह फीट होती है, लेकिन बसों में आने जाने के लिए बेहद पतली गैलरी होती है. जहां एक वक्त में सिर्फ एक शख्स ठीक तरह से एक भी नहीं चल सकता. हादसा हुआ तो एक साथ कई लोगों को निकलना उनके लिए नामुमकिन हो जाता है. आमतौर पर स्लीपर बसों की ऊंचाई 8-9 फीट तक होती है. हादसे की सूरत में अगर बस अचानक एक तरफ झुक जाती है तो यात्रियों के लिए इमरजेंसी विंडो या गेट तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है. एसी स्लीपर बसों को ऑपरेटर खुद ही ऑपरेटर करते हैं. इन एसी बसों को मॉडिफाई करा लेते हैं यानी इनको और बेहतर बनाने की कोशिश करते है और इसी वजह से इसमें सुरक्षा मानकों का अक्सर ध्यान नहीं रखा जाता है. ज्यादातर स्लीपर बस 1000 किलोमीटर तक का सफर रात में तय करती है, इसलिए ड्राइवर के थकने और झपकी आ जाने की संभावना पूरी पूरी होती है. 

हादसे पर जमकर सियासत

इस हादसे पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और हृदय विदारक घटना कल जैसलमेर जोधपुर के बीच में हुई. ये हादसा जांच का विषय है. एक बार जांच की रिपोर्ट आ जाने के बाद में ही इस विषय पर आगे टिप्पणी करना उचित होगा. दिल को दहलाने वाली ये घटना हुई है, सभी इसके लिए संवेदना भी प्रकट करते हैं. बड़ा गहरा सदमा लगा पूरे प्रदेश को. राजस्थान के पूर्व सीएम और सीनियर कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा कि दुखद घटना है. जांच का विषय भी है कि बस में आग लगी क्यों? ये जांच का विषय भी हो सकता है. कई बार नई बस खरीदते हैं. 10 दिन पहले बस खरीदी थी तो पता नहीं कोई टेक्निकली गलत तो नहीं है. ऐसे वक्त में कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए. राजस्थान के मंत्री जवाहर सिंह ने कहा कि पहली हमारी प्राथमिकता है कि जो झुलस गए है उनको अच्छा उपचार मिले. जो भी जांच में आएगा उसके हिसाब से कार्रवाई होगी.

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