
Assembly Election 2022: गुजरात चुनाव (Gujarat Assembly Election 2022) में मतदान की तारीखों के नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. ताजा मामला सूरत पूर्व से AAP उम्मीदवार कंचन जरीवाला के नामांकन वापस लेने से जुड़ा है. इस मामले में अब AAP सांसद राघव चड्ढ़ा ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने NDTV से बातचीत में कहा कि कंचन जरीवाला ने नामांकन वापस नहीं लिया है बल्कि बंदूक की नोक पर उनसे ऐसा करवाया गया है.
राघव चड्ढा ने आगे कहा कि कंचन जरीवाला (Gujarat Assembly Election 2022) दो साल पहले AAP में शामिल हुए थे. बीते दो साल में उन्होंने पार्टी के लिए दिन रात एक करके काम किया. उनकी मेहनत को देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें इस चुनाव में सूरत पूर्व से उम्मीदवार बनाया था. हमने 14 नवंबर को उनके नाम की घोषणा की और 15 नवंबर को बीजेपी ने उनके नाम पर आपत्ति जताई और उन्हें अपना नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया.
बीजेपी के लोग इतने पर ही नहीं रुके. उन्होंने कंचन को अपने गुंडों द्वारा अगवा करवाया. मैं अपनी टीम के साथ पूरी रात उन्हें ढूंढ़ते रहे. बाद में पता चला कि उनके साथ धक्का-मुक्की की गई है और दबाव बनाया गया है कि वो अपना नामांकन वापस ले लें.
बता दें कि राघवा चड्ढ़ा के इस बयान से पहले खुद कंचन जरीवाला (Gujarat Assembly Election 2022) ने एक वीडियो जारी करके अपने नामांकन वापस लेने की वजहों के बारे में बताया था. उन्होंने अपने इस वीडियो में कहा था कि चुनाव प्रचार के दौरान लोगों ने मुझसे कहा कि मैं देश विरोधी और गुजरात विरोधी पार्टी का उम्मीदवार क्यों बन गया हूं? फिर मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और बिना किसी दबाव के पर्चा वापस ले लिया. उन्होंने कहा कि मैं देश विरोधी और गुजरात विरोधी पार्टी का साथ नहीं दे सकता.
चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी में आप ने BJP की शिकायत की है. सिसोदिया ने चुनाव आयोग से कहा कि BJP जब कंचन जरीवाला का नामांकन रद्द नहीं करा पाई तो उन्होंने कंचन जरीवाला और उनके परिवार को धमकी दी. अब बीजेपी इस मामले में पुलिस के साथ मिलकर कंचन को नॉमिनेशन सेंटर लेकर आए और उनका नामांकन रद्द करवाया.
मनीष सिसोदिया ने आगे कहा कि जिस तरह से कंचन जारीवाल के नामांकन को रद्द कराया गया है, वो साफ तौर पर पुलिस मशीनरी का ही दुरुपयोग नहीं है बल्कि फ्री और फेयर चुनाव की भावना के भी खिलाफ है. उन्होंने चुनाव आयोग (Assembly Election 2022) से अनुरोध किया कि वो इस मामले का संज्ञान लें और जांच के आदेश दें. इस मामले की जांच इसलिए भी होनी चाहिए क्योंकि कंचन जारीवाल ने अपना नामांकन डर और धमकी के चलते वापस लिया है.
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