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ईरान-इजरायल युद्ध में भारत की सबसे बड़ी चुनौती, 90 लाख भारतीयों की सलामती, पीएम ने बुलाई CCS की बैठक

पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात को देखते हुए पीएम मोदी की अध्यक्षता में आज रात कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति की अहम बैठक होगी.

ईरान-इजरायल युद्ध में भारत की सबसे बड़ी चुनौती, 90 लाख भारतीयों की सलामती, पीएम ने बुलाई CCS की बैठक
पीएम मोदी सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक की अध्यक्षता करेंगे
  • कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति की बैठक पीएम मोदी के दिल्ली लौटने के बाद आज रात साढ़े नौ बजे होगी
  • पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण भारत ने खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है
  • क्षेत्र में करीब 80 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें छात्र, पर्यटक और कामगार शामिल हैं, उनकी सुरक्षा प्राथमिकता
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नई दिल्ली:

पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात को देखते हुए कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) की अहम बैठक आज रात साढ़े नौ बजे होगी. पीएम मोदी के दिल्ली लौटते ही यह बैठक आयोजित की जाएगी. भारत सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है. खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीयों की मौजूदगी को देखते हुए भारत ने एडवाइजरी जारी की है. पश्चिम एशिया में 80 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं, वहीं बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक भी क्षेत्र में फंसे हुए हैं. ईरान समेत कई देशों में भारतीय छात्र भी मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है.

बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे.

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आर्थिक चुनौतियों की आशंका, एक्सपर्ट की राय

जेएनयू के वेस्ट एशियन स्टडीज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मदस्सिर कमर के मुताबिक, ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या ने भारत के लिए पश्चिम एशिया में बड़ी सामरिक चुनौती खड़ी कर दी है. भारत के ईरान और इजरायल, दोनों देशों के साथ बेहद ही घनिष्ठ संबंध हैं, ऐसे में नई दिल्ली को अपनी विदेश नीति को अत्यंत संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना होगा. खाड़ी क्षेत्र में लगभग 90 लाख भारतीय कामगार और छात्र रहते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है.

संघर्ष बढ़ने का भारत पर क्या असर

एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मदस्सिर कमर ने कहा कि ऐसे में भारत ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकता जिससे खाड़ी क्षेत्र में भारतीय समुदाय के हित प्रभावित हों. ऊर्जा मोर्चे पर भी मुश्किलें बढ़ रही हैं, क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल और गैस का लगभग 40 से 50 प्रतिशत आयात मध्य‑पूर्व देशों से करता है और मौजूदा तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ रही है. यदि संघर्ष और बढ़ता है या लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर भारत के ऑयल‑गैस आयात बिल पर पड़ेगा. यही कारण है कि इस स्थिति में भारत को बेहद सावधानी के साथ कूटनीतिक टाइटरोप पर चलते हुए संतुलन बनाए रखना होगा.

तेल अर्थशास्त्री ने मिडिल संकट पर क्या बताया

एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में तेल अर्थशास्त्री और योजना आयोग के पूर्व सदस्य किरित पारेख ने कहा कि अमेरिका‑इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते महंगे होते कच्चे तेल के दबाव को कम करने के लिए भारत को रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाना चाहिए. उनके मुताबिक, यदि यह युद्ध लंबा चलता है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में उथल‑पुथल और बढ़ेगी और तेल लगातार महंगा होता चला जाएगा. भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल अलग‑अलग देशों से आयात करता है; ऐसे में आयात लागत पर सीधा असर पड़ता है.

भारत के पास अब क्या रास्ता

पारेख ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल यदि प्रति बैरल 1 डॉलर महंगा होता है, तो भारत का तेल आयात बिल लगभग 1.4 बिलियन डॉलर तक बढ़ जाता है. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत अमेरिका के सामने यह बात रख सकता है कि मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध अमेरिका से जुड़ी परिस्थितियों के कारण भड़का, इसलिए महंगे तेल के प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत के लिए रूस से अधिक कच्चे तेल का आयात करना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि मध्य पूर्व में युद्ध का असर गैस आयात पर भी पड़ेगा, अभी भारत अपनी जरूरत की करीब 50% गैस विदेश से आयात करता है और यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो गैस की कीमतें और आयात व्यय भी बढ़ते जाएंगे.

कच्चे तेल की आपूर्ति बड़ी समस्या

पश्चिम एशिया की अस्थिरता का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है क्योंकि कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने और दाम बढ़ने की आशंका है. भारत ने हाल ही में रूस से कच्चे तेल के आयात में कटौती की है, ऐसे में भारत को ऊर्जा जरूरतों के लिए वैकल्पिक स्रोत भी तलाशने होंगे. ईरान–इजरायल युद्ध के चलते हवाई यात्रा के मार्ग बदले गए हैं. भारत से कई उड़ानें या तो रद्द कर दी गई हैं या उनका रूट चेंज किया गया है. इन परिस्थितियों का समाधान खोजने पर भी सरकार को विचार करना होगा.

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नागरिकों की सुरक्षा फिर से बड़ी चुनौती

ऐसे हालात में भारत पहले भी अपने नागरिकों को सुरक्षित निकाल चुका है. अबकी बार भी भारत के सामने वही चुनौती है, और उम्मीद है कि सीसीएस में इस पर विस्तार से चर्चा होगी. पीएम मोदी हाल ही में इजरायल दौरे से लौटे हैं. इसके बाद वे शनिवार को राजस्थान और गुजरात तथा रविवार को तमिलनाडु और पुड्डुचेरी के दौरे पर थे. दो दिन की यात्रा के बाद आज रात दिल्ली पहुंचते ही वे सीसीएस बैठक की अध्यक्षता करेंगे.
 

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