- IPS निहारिका भट्ट ने अमेरिका की सरकारी नौकरी छोड़कर भारत लौटकर UPSC पहली कोशिश में पास की
- उन्होंने मिशिगन यूनिवर्सिटी से एमटेक की डिग्री प्राप्त की और अमेरिका में नैनो पार्टिकल्स पर रिसर्च की थी
- वर्तमान में दिल्ली में DCP के पद पर कार्यरत निहारिका ने एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया
IPS निहारिका भट्ट वह शख्सियत हैं, जो आईपीएस बनने के लिए यूएसए की सरकारी नौकरी और डॉलर में मिलने वाली तनख्वाह छोड़कर भारत लौट आईं. भारत आकर न केवल उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा क्रैक की, बल्कि अब दिल्ली में DCP रहते हुए एक शातिर साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश करके चर्चा में हैं.
निहारिका भट्ट मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं. 30 जनवरी 1988 को जन्मीं निहारिका ने बायोटेक्नोलॉजी में इंटीग्रेटेड बी.टेक और एम.टेक की डिग्री हासिल की है. उनके पिता डॉक्टर और मां गृहिणी हैं.
रिसर्च के दौरान मन में आया सिविल सेवा का ख्याल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निहारिका भट्ट ने अपनी एमटेक की डिग्री अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी से हासिल की. इसके बाद उन्हें अमेरिका डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन में नौकरी मिल गई. वहां उन्होंने मानव शरीर पर नैनो पार्टिकल्स के प्रभाव विषय पर करीब डेढ़ साल तक रिसर्च पर काम किया.

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अमेरिका में नौकरी करने के दौरान निहारिका भट्ट को चीन जाने का मौका मिला. वहां उन्होंने सरकारी मशीनरी के कामकाज को काफी करीब से देखा. तभी उनके मन में विचार आया कि क्यों न अपने देश वापस लौटकर एक सिविल सेवक (प्रशासनिक अधिकारी) के रूप में लोगों की सेवा की जाए.
पहले ही प्रयास में बिना कोचिंग हासिल की 146वीं रैंक
सिविल सेवक बनने का सपना लेकर निहारिका भट्ट अमेरिका की नौकरी छोड़कर भारत आ गईं और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारियों में जुट गईं. बिना किसी कोचिंग के उन्होंने दिल्ली में रहकर पहले ही प्रयास में साल 2014 की यूपीएससी परीक्षा क्रैक कर डाली. उन्हें अखिल भारतीय स्तर पर 146वीं रैंक हासिल हुई और AGMUT कैडर अलॉट हुआ.
दुकानदारों को शिकार बनाने वाले साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश
न्यूज़ एजेंसी एएनआई के अनुसार, दिल्ली में एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश करने के बाद DCP (नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट) निहारिका भट्ट ने बताया, "आरोपी का नाम निखिल है. उसका काम करने का तरीका यह था कि वह किसी दुकान पर जाता, छोटी-मोटी चीज़ें खरीदता और दुकानदार को UPI पेमेंट सफल होने का एक फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाता. इसके बाद वह दुकानदार से अपने फोन पर इसे वेरीफाई करने के लिए कहता था. जब दुकानदार चेक करने के लिए अपना पेमेंट ऐप खोलता, तो उसमें ट्रांजेक्शन शो नहीं होता था."
#WATCH दिल्ली। साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफ़ाश करने के बाद, DCP नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट निहारिका भट्ट ने कहा, "आरोपी का नाम निखिल है और उसका काम करने का तरीका यह था कि वह किसी दुकान पर जाता, छोटी-मोटी चीजें खरीदता और दुकानदार को UPI पेमेंट सफल होने का स्क्रीनशॉट दिखाता। इसके बाद उनसे… pic.twitter.com/KEHaJX1qjN
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 26, 2026
फोन छीनने से लेकर म्यूल अकाउंट्स तक का जाल
आईपीएस निहारिका भट्ट ने आगे जानकारी देते हुए बताया, "इसके बाद आरोपी निखिल ट्रांजेक्शन चेक करने के बहाने दुकानदार से उसका फोन मांगता था और फोन में पहले से अनलॉक किए गए ऐप का इस्तेमाल करके तुरंत 1 लाख से 2 लाख रुपये अपने अकाउंट तथा अन्य म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर कर लेता था. कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें दुकानदार के फोन देने से मना करने पर वह झपट्टा मारकर फोन छीनकर भाग जाता था."
उन्होंने आगे कहा, "अब तक आरोपी से जुड़े ऐसे 8 मामले सामने आ चुके हैं. हमने निखिल को गिरफ्तार कर लिया है और इस धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए म्यूल अकाउंट्स के खाताधारकों को भी पाबंद कर लिया है. उसे पकड़ने में थोड़ा समय लगा, क्योंकि वह कई लेयर्स के जरिए ट्रांजेक्शन करता था और बड़ी संख्या में अलग-अलग अकाउंट्स में छोटी-छोटी रकम ट्रांसफर करता था."
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