भारत सरकार के नीति थिंक टैंक नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत ने 'इग्नाइट इंडिया समिट' में NDTV से बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बडी़ क्रांति बताया है. उनका कहना है कि आने वाले समय में AI सबकी पहुंच में आएगा. ऐसे में इसे और बेहतर बनाने के लिए भारत को टैलेंट और डेटा पूल के साथ-साथ प्रगतिशील नीतियों और बड़े पैमाने पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तैयार रहना होगा.
भारतीयों को AI की आदत डालनी होगी: अमिताभ कांत
अमिताभ कांत ने अक्टूबर 2024 में NDTV वर्ल्ड समिट में कही अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा 'आने वाले समय में उन्होंने AI को जरूरी बताया था और कहा था कि इससे नई तरह की नौकरियां आएंगी. हमें इसके लिए तैयार रहना होगा क्योंकि यह बिजली या कंप्यूटर से भी बड़ी क्रांति होगी. हम पहले ही दुनिया में संघर्ष और सप्लाई चेन के टूटने जैसी चीजों को लगातार देख रहे हैं. लेकिन हम समय के हिसाब से आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे में आने वाले समय में दुनिया प्रोडक्टिविटी में सबसे बड़ी बढ़ोतरी देखेगी. इसलिए भारतीयों को भी AI की आदत डालनी होगी. ऐसा तभी होगा जब स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी अपने सेलेबस में बदलाव करेंगे, क्योंकि नई नौकरियां इसी से पैदा होंगी.
'दुनिया का 20 प्रतिशत डेटा भारत से आता है'
अमिताभ कांत से जब AI की दौर की नौकरियों और क्वालिटी पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा 'जब नई टेक्नोलॉजी होगी तो इसकी नौकरियां भी नई होगी. क्योंकि नई टेक्नोलॉजी के आने से कभी भी नौकरियां नहीं गईं. जब बिजली आई, कंप्यूटर आया तो इसी तरह की निराशा जताई गई थी. लेकिन ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत को एक ऐसे क्षेत्र में खास फायदा है, जिसमें कोई भी देश दूसरों से अलग होकर काम नहीं कर सकता और बढ़त हासिल नहीं कर सकता. क्योंकि AI मॉडल डेटा पर आधारित होते हैं और दुनिया का 20 प्रतिशत डेटा भारत से आता है. अगर आप स्टैनफोर्ड का लेटेस्ट AI इंडेक्स देखें, तो आपको पता चलेगा कि पहली बार टैलेंट भारत लौट रहा है. और ऐसा स्टार्टअप्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स की वजह से हो रहा है.'
भारत को ये तीन काम करने होंगे
अमिताभ कांत ने कहा कि AI मॉडल्स को सिर्फ भारत के लिए नहीं बल्कि दूसरे देशों और भाषाओं के हिसाब से भी लोकल बनाना होगा. क्योंकि अगर AI कई भाषाओं वाला नहीं है तो फिर वह बेहतर काम नहीं कर पाएगा. लेकिन अगर कई भाषाएं होगी तो फिर यह बेहतर काम करेगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका मतलब है कि भारत में एप्लीकेशन के मामले में बहुत क्षमता है. इसके लिए भारत को तीन काम करने होंगे. जिसमें पहला हम इन नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) के साथ एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं. अगर हम यूरोप और यूके जैसे देशों के साथ 12 FTA साइन करते हैं, तो उनकी कंपनियों से निवेश आता दिखेगा.'
दूसरा भारतीय कंपनियों के लिए ग्लोबल लेवल पर मुकाबला करने लायक बनना और एक्सपोर्ट बढ़ाना जरूरी है. आपको मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में एक्सपोर्ट बढ़ाना होगा. भारतीय कंपनियों में ग्लोबल मार्केट में जगह बनाने की महत्वाकांक्षा होनी चाहिए. हमें यह महत्वाकांक्षा लानी होगी. अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो FTA की वजह से हमारे कारोबार को नुकसान होगा. भारतीय कारोबारियों के लिए सबसे जरूरी काम यही है कि अब हमें ग्लोबल सोच अपनाना होगा. भारत को AI के लिए सही दिशा में मार्केटिंग करनी होगी.
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