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दिवाली-छठ पर अचानक कहां से आ जाती हैं हजारों स्‍पेशल ट्रेनें? रेलवे का ये इंतजाम जानकर चौंक जाएंगे

How Railways Runs Thousands of Special Trains: छठ पर घर जाने के लिए रेलवे ने सैकड़ों स्पेशल ट्रेनें चलाई है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये हजारों कोच कहां से आते हैं? स्पेयर रैक से लेकर दूसरे रूट की ट्रेनों तक, रेलवे कई तरीकों से करता है इंतजाम.

दिवाली-छठ पर अचानक कहां से आ जाती हैं हजारों स्‍पेशल ट्रेनें? रेलवे का ये इंतजाम जानकर चौंक जाएंगे
दिवाली-छठ पर सैकड़ों स्‍पेशल ट्रेनों के लिए आखिर कहां से आ जाती हैं हजारों बोगियां?
Source: NDTV Graphics/Canva

Special Trains Story: दिवाली और छठ पूजा के लिए खासकर बिहार और पूर्वांचल के लिए रेगुलर ट्रेनें कम पड़ जाती हैं. कई बार टिकट मिलना नामुमकिन हो जाता है. ऐसे में काम आती हैं, रेलवे की स्‍पेशल ट्रेनें. थोड़ी दिक्‍कतें ही सही, थोड़ी लेटलतीफी ही सही, थोड़ा ज्यादा किराया ही सही. लोगों को हर हाल में बस घर पहुंचना होता है. इस बार भी रेलवे ने दिवाली-छठ स्‍पेशल सैकड़ों ट्रेनें चलाई हैं.

क्‍या आपने कभी सोचा है कि रेगुलर ट्रेनों के अलावा ये सैकड़ों स्‍पेशल ट्रेनें आखिर अचानक तैयार कैसे हो जाती हैं, क्‍या रेलवे छुट्टियों के लिए या त्‍यौहारों के लिए इतनी तेजी में ट्रेनसेट यानी इंजन, कोच-बोगियां वगैरह तैयार कर लेता है? 

त्‍योहारों पर जब दिल्‍ली, मुंबई, लुधियाना, सूरत या देश के अन्‍य बड़े शहरों से लाखों लोग अपने घरों की ओर रुख करते हैं, तो रेलवे हर साल सैकड़ों 'स्पेशल ट्रेनें' चलाता है. ने की घोषणा करता है. सरकारी सूचना एजेंसी PIB के मुताबिक, 2023-24 में रेलवे ने 40,500 और 2024-25 में 85,400 स्पेशल ट्रेनें चलाई. इनमें दिवाली-छठ स्‍पेशल ट्रेनें भी शामिल हैं. इस साल दिवाली-छठ भी रेलवे ने 1,053 से ज्‍यादा स्‍पेशल ट्रेनें चलाई है. 

तो सवाल वही कि अचानक इतनी ट्रेनें कहां से आ जाती हैं, क्‍या है रेलवे का वो 'मास्‍टन प्‍लान' जिसके जरिए रेलवे हर साल यात्रियों की भारी भीड़ को संभालता है. 

स्पेयर रैक और स्टैंडबाय कोच | Spare Racks and Standby Coaches

भारतीय रेलवे हर जोन और डिवीजन में कुछ 'स्पेयर कोच' और 'स्क्रैच रैक' (पूरी ट्रेन का सेट) रिजर्व में रखता है. इनका इस्तेमाल आमतौर पर इमरजेंसी (जैसे कि ट्रेन का एक्सीडेंट या तकनीकी खराबी) के लिए किया जाता है.  त्योहारों के सीजन में रेलवे इन स्टैंडबाय रखे गए डिब्बों को बाहर निकालता है और इन्हें स्पेशल ट्रेनों या रेगुलर ट्रेनों में ऑगमेंटेशन के रूप में चला देता है.  ईस्‍टर्न रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि आसनसोल डिवीजन ने 2025 में छठ के दौरान स्पेयर कोचों से ऐसे ही स्क्रैच रैक तैयार किए थे.

स्क्रैच रैक का मतलब 'स्पेयर या अतिरिक्त डिब्बों को मिलाकर तुरंत तैयार किया गया एक बैकअप रैक यानी ट्रेन का पूरा सेट होता है. आसान भाषा में कहें तो स्क्रैच रैक, वास्तव में एक इमरजेंसी बैकअप ट्रेन होती है, जिसे किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए तुरंत तैयार किया जाता है. 

कम भीड़ वाले रूट्स की ट्रेनों का इस्तेमाल

त्योहारों के दौरान कुछ खास रूट्स जैसे कि दिल्ली-बिहार, मुंबई-यूपी, बेंगलुरु-कोलकात वगैरह... पर भारी भीड़ होती है, जबकि कुछ अन्य रूट्स पर यात्रियों की संख्या काफी कम हो जाती है. रेलवे डेटा एनालिसिस के जरिए ऐसे रूट्स की पहचान करता है, जहां सीटें खाली जा रही हैं.  उन रूट्स की ट्रेनों के फेरे कम कर दिए जाते हैं या उनके डिब्बों को निकालकर अधिक भीड़ वाले रूट्स की 'स्पेशल ट्रेनों' में जोड़ दिया जाता है.  

दिवाली-छठ पर सैकड़ों स्‍पेशल ट्रेनों के लिए आखिर कहां से आ जाती हैं हजारों बोगियां?

दिवाली-छठ पर सैकड़ों स्‍पेशल ट्रेनों के लिए आखिर कहां से आ जाती हैं हजारों बोगियां?

PIB के मुताबिक, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे ने 2026 में 1,000 से अधिक स्पेशल ट्रेन ट्रिप्स 'ट्रेन्स ऑन डिमांड' (TODs) के तहत चलाए, जो वेटिंग लिस्ट और बुकिंग डेटा के आधार पर प्लान किए गए थे. 

...ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा ट्रेनें ट्रैक पर रहें

रेलवे में ट्रेनों की समय-समय पर सफाई और मरम्मत का काम होता रहता है, जिसे 'पीरियोडिकल ओवरहॉलिंग' (POH) कहा जाता है.  ICF कोचों के लिए POH हर 18 महीने और LHB कोचों के लिए 36 महीने पर होता है. 

त्योहारों के महीनों में रेलवे अपने मेंटेनेंस शेड्यूल को इस तरह प्लान करता है कि ज्‍यादा से ज्‍यादा ट्रेनें ट्रैक पर रहें. हालांकि सुरक्षा मानकों के तहत POH को कैंसिल नहीं किया जाता.  

जो कोच अपनी सर्विस लाइफ (लगभग 25 साल) पूरी करने वाले होते हैं, उन्हें कभी-कभी अतिरिक्त डिमांड के लिए सुरक्षा मानकों के साथ कुछ अतिरिक्त ट्रिप्स के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.  हालांकि रेलवे इसे सिस्टमैटिक 'अंतिम ड्यूटी' पॉलिसी नहीं मानता है. 

नए कोचों की तेज डिलीवरी 

देश में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) और रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में लगातार नए डिब्बों का निर्माण होता रहता है. रेलवे का प्रयास रहता है कि बनकर तैयार हुए डिब्बों को त्योहारों से ठीक पहले रेलवे के बेड़े में शामिल कर लिया जाए. 

PIB के अनुसार, साल 2021-22 से 2025-26 (फरवरी 2026 तक) में 1,024 नई ट्रेनें शुरू हुईं, 907 एक्सटेंड हुईं और 4,651 कोच ऑगमेंटेड किए गए.  इनकी रेगुलर सेवा बहाल करने से पहले तैयार बोगियों का इस्‍तेमाल स्पेशल ट्रेनों के लिए किया गया.  

उत्तर रेलवे ने पिछल साल यानी 2025 में त्योहारों के दौरान 52 एक्स्ट्रा कोच जोड़कर 2,740 ट्रिप्स चलाए और 2.06 लाख यात्रियों को राहत दी थी. पूर्व मध्‍य रेलवे में कार्यरत एक अधिकारी ने NDTV से बातचीत में कहा कि दिवाली-छठ में इस साल 1053 से ज्‍यादा स्‍पेशल ट्रेन ट्रिप्‍स का ऐलान किया गया.

हर साल हजारों स्पेशल ट्रेनें चलाना भले ही थोड़ी देर के लिए आश्‍चर्य का विषय हो सकता है, लेकिन ये रेलवे के बेहतर लॉजिस्टिक्स और मैनेजमेंट नेटवर्क का कमाल है. रेलवे के अलग-अलग जोन के बीच आपसी तालमेल के बनिस्‍पत ही हर साल त्‍योहारों पर लाखों प्रवासी लोग अपने गांव-घर-परिवार के बीच शामिल हो पाते हैं. 
 

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