जब भी भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की बात होती है, तो अमूमन चर्चा 'वंदे भारत एक्सप्रेस', 'अमृत भारत ट्रेनों' या 'बुलेट ट्रेन' प्रोजेक्ट के चमक-धमक तक ही सीमित रह जाती है. लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को अंदर से मजबूती देने वाला असली काम उस ट्रैक पर हुआ है, जहां आम रेल यात्री कभी सफर नहीं करते. हम बात कर रहे हैं डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor - DFC) की. रेलवे के इस साइलेंट रिवोल्यूशन ने देश के लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन का पूरा ढांचा ही बदलकर रख दिया है. आलम ये है कि अब रेलवे मालगाड़ियों के जरिए सुपरफास्ट डिलीवरी के नए रिकॉर्ड बना रहा है.
On 12.08.2026, #DFCCIL successfully operated the first UP Electric Goods Train from New Kharbao to Indian Railways' Kharbao Station, marking another important link between the Dedicated Freight Corridor and the #IndianRailways network and strengthening seamless freight… pic.twitter.com/7KhA0dUOLw
— DFCCIL (@dfccil_india) August 13, 2026
देश की पहली 'वंदे भारत फ्रेट ईएमयू' का 145 kmph पर सफल ट्रायल
इसी कड़ी में माल परिवहन को एक्सप्रेस गति देने के लिए रेलवे ने पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में देश की पहली 'वंदे भारत प्लेटफॉर्म आधारित फ्रेट ईएमयू' यानि सुपरफास्ट पार्सल रेक का तकनीकी परीक्षण शुरू कर दिया है. अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) की देखरेख में शुरू हुए इस ट्रायल के पहले ही दिन 16 कोच वाली इस फ्रेट ईएमयू ने 145 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार हासिल कर इतिहास रच दिया. सीनियर रेलवे जनसंपर्क अधिकारी सौरभ जैन के अनुसार, कोटा-नागदा-सवाई माधोपुर रेलखंड पर यह ट्रायल अगले एक महीने तक जारी रहेगा.
The weather changes. The momentum doesn't. 🌧️🚆
— DFCCIL (@dfccil_india) August 11, 2026
Even in intense monsoon conditions, #DFC keeps the nation's freight moving with speed, efficiency and reliability.#DFCCIL #DedicatedFreightCorridor #FreightMovement #RailFreight #Rain #Monsoon pic.twitter.com/T8eEKMDNVD
क्या है 'फ्रेट ईएमयू' और क्यों है यह खास?
आईसीएफ (ICF) चेन्नई द्वारा विकसित यह फ्रेट ईएमयू भविष्य में ई-कॉमर्स, कूरियर सेवाओं, कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स और दूध-सब्जी जैसे जल्दी खराब होने वाले सामान की समयबद्ध डिलीवरी के लिए तैयार की गई है.
सेल्फ-प्रोपल्ड तकनीक: इसमें अलग से इंजन जोड़ने की जरूरत नहीं होती. वंदे भारत की तरह इसके डिब्बों के नीचे ही मोटर लगी होती है, जिससे यह बहुत तेजी से रफ्तार पकड़ती है.
100% इलेक्ट्रिक और सुपरफास्ट: यह पूरी तरह बिजली से चलने वाली पार्सल ट्रेन है, जो बिना किसी ऊर्जा बर्बादी के 145 से 160 kmph की स्पीड से दौड़ सकती है.
सुपरफास्ट स्पीड और 'टाइम-टेबल फ्रेट सेवा'
दरअसल सालों से भारतीय रेलवे की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जिस ट्रैक पर सवारी गाड़ियां चलती थीं, उसी पर मालगाड़ियां भी दौड़ती थीं. DFC ने मालगाड़ियों को अपना एक अलग 'डेडिकेटेड हाईवे' दे दिया है.
24 घंटे में डिलीवरी: पहले जहां दिल्ली से मुंबई या लुधियाना से कोलकाता सामान भेजने में 40 से 50 घंटे का लंबा वक्त लगता था, वहीं अब DFC ट्रैक्स की बदौलत यह दूरी महज 20 से 24 घंटे में तय हो रही है.
टाइम-टेबल से संचालन: अब मालगाड़ियों को केवल तेज ही नहीं चलाया जा रहा, बल्कि पैसेंजर ट्रेनों की तरह 'टाइम-टेबल' (समय सारणी) के हिसाब से संचालित किया जा रहा है.
'ट्रक-ऑन-ट्रेन' (ToT) मॉडल: सड़क पर चलने वाले बड़े मालवाहक ट्रकों को सीधे ट्रेन के डिब्बों पर लादकर भेजा जा रहा है, जिससे ईंधन, समय और प्रदूषण तीनों की बचत हो रही है.
आम यात्रियों को इससे क्या फायदा?
आपको लग सकता है कि मालगाड़ियों की स्पीड से आम रेल यात्री को क्या लाभ? लेकिन इसका सीधा असर आपकी यात्रा पर पड़ रहा है. मुख्य रेल रूटों से मालगाड़ियों का बोझ हटने की वजह से अब 'वंदे भारत', 'राजधानी' और अन्य सुपरफास्ट पैसेंजर ट्रेनों के लेट होने की समस्या काफी हद तक खत्म हो रही है और उनकी पंक्चुअलिटी सुधरी है. जब पूरे देश में DFC कॉरि़डोर लागू हो जाएगा तो संभव है कि पैसेंजर ट्रेनों की लेट होने की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी.
पारदर्शिता के लिए 3 महीने का विशेष अभियान
DFC के इस विशाल और हाई-टेक नेटवर्क को पारदर्शी बनाए रखने के लिए DFCCIL के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री प्रवीण कुमार ने 17 अगस्त 2026 से 16 नवंबर 2026 तक तीन महीने के विशेष 'प्रिवेंटिव विजिलेंस कैंपेन' की शुरुआत की है. "सत्यनिष्ठा से समृद्धि" (Probity for Prosperity) थीम पर चलने वाला यह अभियान पूरे संस्थान में पारदर्शिता, ई-प्रोक्योरमेंट (GeM) और साइबर सुरक्षा को मजबूत करेगा, ताकि इस पूरे नेटवर्क का संचालन पूरी ईमानदारी और दक्षता से हो सके.
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